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International Yoga Day 2019 : योग से ही विश्व गुरु बनेगा भारत

डॉ नागेन्द्र प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के योग गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर ही संयुक्त राष्ट्र ने उनके अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को तुरंत मंजूर कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका था जब 27 सितम्बर 2014 को पीएम मोदी ने अपने एक भाषण के बाद विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा तो पहली बार में ही संयुक्त राष्ट्र के 177 देशों ने अपनी स्वीकृति दे दी।

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हाल ही में सुप्रसिद्ध योग गुरु डॉ एचआर नागेन्द्र से लंदन में फोन पर बात हो रही थी। उनसे बातचीत में जो बड़ी बात पता लगी, उसे जानकर दिल प्रसन्न हो गया। वह यह कि इस साल 'विश्व योग दिवस' पर डॉ नागर ब्रिटिश संसद- हाउस ऑफ कॉमन्स को संबोधित कर रहे हैं। ब्रिटिश संसद में भारतीय योग गुरु का अभिभाषण निश्चय ही सभी भारतीयों के लिए गौरव की बात है। जो भारत के महत्व के साथ भारत की योग शक्ति को भी गौरान्वित करता है।

डॉ नागेन्द्र प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के योग गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर ही संयुक्त राष्ट्र ने उनके अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को तुरंत मंजूर कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका था जब 27 सितम्बर 2014 को पीएम मोदी ने अपने एक भाषण के बाद विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा तो पहली बार में ही संयुक्त राष्ट्र के 177 देशों ने अपनी स्वीकृति दे दी। बड़ी बात यह भी थी कि इन देशों में जहां कैथोलिक देश थे वहां इस्लामिक देश भी थे, लेकिन सभी पीएम मोदी की बात से इस कद्र कायल हुए कि किसी ने भी किन्तु परन्तु किए बिना इस प्रस्ताव को स्वीकार लिया।

उधर नरेन्द्र मोदी ने भी इस प्रस्ताव की स्वीकृति के मात्र 9 महीने बाद ही 21 जून 2015 को पहला विश्व योग दिवस एक ऐसे महान उत्सव के रूप में मनाया कि सभी दंग रह गए। यहां तक संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की मून ने भी यह देख कहा था, संयुक्त राष्ट्र साल भर में करीब 125 अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाता है, लेकिन योग उत्सव को लेकर जैसा उत्साह विश्व भर में देखा गया वैसा किसी और अंतरराष्ट्रीय दिवस को लेकर पहले कभी नहीं दिखा।

जब पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, तब उन्हें पीएम बने सिर्फ 4 महीने हुए थे। तब विपक्ष के कुछ लोग कहते थे, मोदी को विदेश नीति की जरा भी समझ नहीं है। देश को तो वह गुजरात मॉडल के विस्तार से चला भी लें, मगर दुनिया वालों का दिल वह कैसे जीतेंगे। मोदी संयुक्त राष्ट्र के अपने अभिभाषण और योग प्रस्ताव से पहले भूटान, ब्राजील, नेपाल और जापान जैसे चार देशों की यात्रा तो कर चुके थे, लेकिन उस संयुक्तराष्ट्र में यह उनका पहला भाषण था जहां इससे पूर्व भारत को अनेक बार निराशा मिल चुकी थी।

पीएम मोदी के लिए यह पहला मौका था जहां संयुक्त राष्ट्र के विशाल मंच से उनका एक साथ पूरी दुनिया से परिचय होना था। मोदी को बताना था कि वह किस तरह अलग हैं, उनके विचार क्या हैं। अपनी अन्य बातों के साथ अपने विश्व योग दिवस प्रस्ताव को स्वीकृत कराना भी उनका लक्ष्य था। एक से एक धुरंधर देश के बड़े-बड़े नेताओं के बीच हमारे मोदी जी की बात दुनिया कितना सुनेगी, यह कुछ पता नहीं था। लेकिन अपने आत्मविश्वाश और भारत देश के प्राचीन गौरव को ध्यान में रख मोदी जी ने जब संयुक्त राष्ट्र में बोलना शुरू किया तो समां बंध गया।

योग के महत्व को लेकर संयुक्तराष्ट्र में मोदी ने कहा, योग हमारी पुरातन पारम्परिक अमूल्य देन है। योग मन, शरीर, विचार व कर्म, संयम व उपलब्धि की एकात्मअकता का तथा मानव व प्रकृति के बीच सामंजस्य का मूर्त रूप है। यह स्वास्थ्य व कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है। योग केवल व्यायाम भर न होकर अपने आप से तथा विश्व, प्रकृति के साथ तादम्यग को प्राप्त करने का माध्यम है।

यह हमारी जीवन शैली में परिवर्तन लाकर तथा हम में जागरूकता उत्पन्न करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक हो सकता है। आइए हम एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को आरंभ करने की दिशा में कार्य करें। अंतत: हम सब एक ऐतिहासिक क्षण से गुजर रहे हैं। प्रत्येक युग अपनी विशेषताओं से परिभाषित होता है। प्रत्येक पीढ़ी इस बात से याद की जाती है कि उसने अपनी चुनौतियों का किस प्रकार सामना किया।

पीएम मोदी की ऐसी ही बातों ने जहां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को स्वीकृति दिलाई। वहां बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बड़ी सोच वाले एक बड़े नेता हैं। पीएम के योग गुरु भी मानते हैं कि पहली बार में ही विश्व योग दिवस को व्यापक स्वीकृति मिलने में पीएम मोदी के विचारों और उनके शानदार भाषण का अहम्ा योगदान था। नरेन्द्र मोदी के इस भाषण का सम्मोहन कुछ ऐसा ही था, जैसा सन 1893 में अमेरिका में ही दिए स्वामी विवेकानंद के भाषण का था।

असल में योग ने भारत से शुरू होकर ही धीरे-धीरे विश्व भर में अपने कदम रखे। हमारे प्राचीन शास्त्र और पुराणों में योग और योग शक्ति के अनेक उदाहरण हैं। भगवान्ा शिव और श्रीकृष्ण भी योगी थे। आधुनिक योग के जनक के रूप में महर्षि पतंजलि का बड़ा योगदान है। बाद में स्वामी विवेकानंद ने भी अपनी यौगिक शक्तियों से योग के महत्व को समझाया।

इधर पिछले कुछ बरसों से स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग को देश विदेश में अद्दभुत लोकप्रियता दिलाई है। आचार्य बालकृष्ण को भी हाल ही में योग से असाध्य रोग को साधने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सम्मानित किया है। साथ ही श्री श्री रविशंकर, जग्गी वासुदेव, अमृता सूर्यानन्द के साथ हिमाचल के स्वामी रामस्वरूप और दिल्ली के आचार्य प्रेम भाटिया सहित कई योग गुरु पिछले कई बरसों से योग के लिए अनेक बड़े कार्य कर रहे हैं।

जबकि डॉ एच आर नागेन्द्र तो सन 1975 से योग और योग अनुसंधान में जुटे हैं। भारतीय विज्ञान संस्थान और नासा जैसे बड़े संस्थानों से जुड़े रहे डॉ नागेन्द्र ने स्वामी विवेकानंद से प्रभावित होकर अपना सब कुछ त्याग, अपना जीवन योग के लिए समर्पित कर दिया। डॉ नागेन्द्र और उनके स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान द्वारा योग पर किए शोध विश्व में मान्य हैं। योग से रोग उपचार में भी उन्होंने बड़ी पहल करके योग को स्वास्थ्य के साथ जोड़ा था।

यही कारण है कि जहां पिछले वर्ष डॉ नागेन्द्र को अमेरिका ने आमंत्रित किया वहां इस वर्ष ब्रिटेन ने। नागेन्द्र कहते हैं, विश्व योग दिवस के बाद देश दुनिया में जिस तरह योग के प्रति सभी की दिलचस्पी बढ़ी है वह अद्भुत है।

निश्चय ही योग भारतीय संस्कृति का मूलाधार है, जिसने पूरे विश्व में अपनी पताका फहरा दी है। योग के माध्यम से भारत की योग शक्ति और संस्कृति आज पूरे विश्व में पहुंच रही है। जिससे यह प्रतीत होता है कि भारत को विश्व गुरु बनाने में योग की भी एक अहम्ा भूमिका रहेगी।


लेखक वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सरदाना

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