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योग में विश्व को एकसूत्र में पिरोने की ताकत

विकसित देश-विकासशील देश, ताकतवर देश-कमजोर देश, अमीर देश-गरीब देश, आतंकवाद, मानवीय श्रेष्ठता का दंभ, रंगभेद-जातिवाद, धर्मोन्माद, विश्व में बादशाहत कायम करने की होड़, आर्थिक महाशक्ति बनने की चाहत आदि विभाजन के सूत्र हैं।

योग में विश्व को एकसूत्र में पिरोने की ताकत

आज दुनिया में हर ओर विभानकारी ताकतें सक्रिय हैं। विश्व हर स्तर पर बंटा हुआ दिख रहा है। विकसित देश-विकासशील देश, ताकतवर देश-कमजोर देश, अमीर देश-गरीब देश, आतंकवाद, मानवीय श्रेष्ठता का दंभ, रंगभेद-जातिवाद, धर्मोन्माद, विश्व में बादशाहत कायम करने की होड़, आर्थिक महाशक्ति बनने की चाहत आदि विभाजन के सूत्र हैं।

इनके अलावा विचारों का संघर्ष है, संस्कृति का टकराव है, आर्थिक-सामाजिक-राजनीतिक मतभेद हैं, मानव के बीच मनभेद है। असमान विकास ने विश्वभर में असमानता बढ़ाई है। इनके चलते समूचे विश्व में तनावपूर्ण माहौल है, हिंसा, नरसंहार, उपद्रव घटित हो रहे हैं। चहुंओर जारी विनाश को देखकर प्रतीत होता है कि मानव सभ्यता अपने अंत की ओर अग्रसर है।

यह स्थितियां विश्व के स्तर पर भी हैं और देश के स्तर पर भी हैं। हर देश में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक विभाजन बढ़ा है। इस वक्त अमेरिका की मनमानियों से वैश्विक संस्थानों को नुकसान पहुंच रहा है। चीन की महत्वाकांक्षा के चलते छोटे देशों की संप्रभुता संकट में है। रूस की शक्तिशाली बनने की चहत के चलते विभाजन को हवा मिल रही है।

पाकिस्तान-उत्तर कोरिया जैसे देश विश्व के लिए सिरदर्द बन गए हैं। इनके चलते भी विश्व स्तर पर तनाव बढ़ा है। इन विषम परिस्थतियों में विश्व को एकसूत्र में पिरोने की ताकत योग में है। आज जब समूचे विश्व ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया, तो वह इसके माध्यम से आपस में जुड़ गए। चौथे विश्व योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश प्रासंगिक है कि जब समाज को तोड़ने वाली ताकतें हावी हों,

तब योग जोड़ने का काम करता है। यह बात राष्ट्र के संदर्भ में भी अर्थपूर्ण है और विश्व के स्तर पर भी। पीएन ने कहा कि देहरादून से लेकर डबलिन तक, योग पूरी दुनिया को जोड़ रहा है। समाज में बिखराव आता है तो व्यक्ति खुद ही अंदर से टूटता जाता है। जीवन में तनाव बढ़ता जाता है। इस बिखराव के बीच योग जोड़ने का काम करता है।

आज विश्व में तनाव के चलते, पर्यावरण को नुकसान के चलते, खान-पान में बदलाव के चलते, गलत रहन-सहन के चलते हेल्थ की समस्याएं बढ़ी हैं। अधिक से अधिक लोग बीमार पड़ रहे हैं। जिससे स्वास्थ्य सेवा पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। ऐसे में योग लोगों के स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में मददगार है।

अगर अधिक से अधिक लोग योग अपनाएंगे तो समूचे विश्व का स्वास्थ्य पर बजट कम होगा, बचे पैसे को गरीबी उन्मूलन में लगाया जा सकेगा। योग चित्त और मन दोनों को नियंत्रण में रखता है। योग ने दुनिया को इलनेस से वेलनेस का रास्ता दिखाया है। राष्ट्रनिर्माण की किसी भी प्रक्रिया से जुड़ने के लिए सभी का स्वस्थ्य रहना आवश्यक है और इसमें योग का बड़ा योगदान है।

विश्व स्तर पर नहीं भारत भी योग को अपना कर अपने को वेलनेस की ओर ले जा सकता है। भारत में यह सर्वधर्म समभाव का माध्यम भी बन रहा है। संयुक्त राष्ट्र को विश्व स्तर पर योग को और बढ़ावा देना चाहिए। खास कर गरीब देश, अल्पविकसित देश योग का लाभ उठाकर अपने नागरिकों को स्वस्थ रख सकते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।

आज की आपाधापी वाली जिंदगी में योग मन, शरीर, बुद्धि और आत्मा को जोड़कर व्यक्ति को शांति की अनुभूति कराता है। समाज में सद्भाव बढ़ाता है। समाज राष्ट्र की एकता का सूत्र बनता है। ऐसे समाज देश में शांति का सूत्रपात करते हैं। योग संपूर्ण मानवता को जोड़ता है। योग स्वास्थ्य बीमा का पासपोर्ट, तंदुरुस्ती और आरोग्य का मंत्र है, इसे समूचे विश्व को आत्मसात करना चाहिए।

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