Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

फिर से वार्ता की मेज पर भारत-पाकिस्तान

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अफगानिस्तान पर हो रहे हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान जा रही हैं

फिर से वार्ता की मेज पर भारत-पाकिस्तान
X
पाकिस्तान की जो स्थिति है, उसे देखते हुए इस पड़ोसी देश से संवाद बनाए रखना न सिर्फ भारत बल्कि पूरे एशिया के हित में है। गत दिनों पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से एक संक्षिप्त मुलाकात करने को इसी संदर्भ में लिया गया था।
अब रविवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और विदेश सचिवों ने आतंकवाद, सीमा पर शांति, घुसपैठ और जम्मू-कश्मीर समेत कईमुद्दों पर बातचीत कर इस सिलसिले को आगे बढ़ाया है। वहीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अफगानिस्तान पर हो रहे हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान जा रही हैं, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तान के विदेश मंत्री से होगी।
इससे लंबे समय से ठप पड़ी द्विपक्षीय वार्ता फिर से पटरी पर लौटती दिख रही है। जाहिर है, दस दिनों के अंदर प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, एनएसए और विदेश सचिव स्तरीय बैठकों को बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि भारत में नई सरकार आने के बाद दो बार बातचीत की प्रक्रिया पाकिस्तान के अड़ियल रुख के कारण रुक चुकी है। गत वर्ष विदेश सचिव स्तर की वार्ता मजबूरन रद करनी पड़ी थी जिसकी नींव मई में प्रधानमंत्री मोदी के शपथग्रहण के दौरान पड़ी थी।
वहीं इसी साल सितंबर में एनएसए स्तर की वार्ता भी रद हो गई थी, जिसकी नींव रूस के शहर उफा में पड़ी थी। पहली बार जहां पाक ने भारत की भावनाओं को दरकिनार करते हुए कश्मीरी अलगाववादियों से वार्ता कर लिया था। वहीं दूसरी दफा उफा के एजेंडे से दूर जाते हुए उसने जम्मू-कश्मीर को वार्ता में शामिल करने की शर्त रख दी थी। जाहिर है, अब तीसरा प्रयास कितना आगे बढ़ता है यह पाकिस्तान के रुख पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
यदि उसकी मंशा सच में रिश्तों को सुधारना है तो उसे भारत को उकसाने या बेजा शतरें को थोपने से बचना होगा। हालांकि गत दिनों नवाज शरीफ कह चुके हैं कि वे भारत से बिना शर्त बातचीत करने को तैयार हैं। हालिया वार्ता पर नजर डालें तो पाकिस्तान अलगाववादियों को तरजीह देने के रुख से भी पीछे हटा है। भारत यह बखूबी जानता है कि पड़ोसी देश से संबंधों की एक अपनी अहमियत होती है। लंबे समय तक कटुता किसी के लिए लाभकारी नहीं हो सकती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के साथ ही कड़वाहट के बीज पड़ गए थे। 67 साल बाद भी इसमें कमी आने की बजाय वृद्धि ही देखने को मिली है। इसे और लंबा खींचना किसी के भी हित में नहीं होगा। बहरहाल, रविवार की बातचीत को दोनों पक्षों ने उत्साहवर्धक बताया है। टकराव की बजाय सहयोग का वातावरण बनाने व सभी विवादित मुद्दों पर दोनों देशों में बातचीत से उम्मीद है कि भारत-पाक आगे बढ़ेंगे। हालांकि दोनों देशों के बीच आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा रहा है।
भारत इसका भुक्तभोगी है। जब जब रिश्ते पटरी पर आते प्रतीत होते हैं तभी कुछ अनहोनी हो जाती है और मामला जहां से चला होता है वहीं पहुंच जाता है। पाकिस्तान को इसका ध्यान रखना होगा कि उसकी जमीन का भारत के खिलाफ इस्तेमाल होना रुके क्योंकि जब तक सीमा पर शांति नहीं आएगी, तो न ही संबंधों में मधुरता आएगी और ना ही व्यापार बढ़ेगा।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top