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पाक के खिलाफ कूटनीति से आगे बढ़ने की जरूरत

भारत वर्षों से कूटनीतिक तौर पर आतंकवाद के मसले पर पाक को दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिश करता रहा है।

पाक के खिलाफ कूटनीति से आगे बढ़ने की जरूरत
कश्मीर के उरी में भारतीय सैन्य ठिकानों पर पाक प्रायोजित आतंकी हमले के बाद आवाम के जेहन में एक ही सवाल है कि अब क्या? हम कब तक यूं ही तमाशा देखते रहेंगे? सरकार कब पाकिस्तान को सबक सिखाएगी? अवाम और सेना में पाक पर इतना गुस्सा है कि वे उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई चाहते हैं। अधिसंख्य लोगों को लगता है कि पाक सैनिकों व पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस जनाकांक्षा को समझ रहे होंगे। इस कारण पाक प्रयोजित आतंकवाद का क्या रणनीतिक तोड़ निकाला जाय, उसे किस तरह जवाब दिया जाए, इन सभी पहलुओं पर गहन मंथन के लिए पीएम ने गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, एनएसए अजित डोभाल, सेना प्रमुखों व खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ हाईलेवेल मीटिंग की। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम उरी में सैन्य ठिकाने पर आतंकी हमले को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। इस हाईलेवेल मीटिंग में पाक को जवाब देने के सभी विकल्पों पर चर्चा जरूर हुई होगी।
इसमें सबसे अधिक कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा होने की बात सामने आई है कि पाक को और भी तेजी से अलग-थलग किया जाए। लेकिन हकीकत ये भी है कि भारत वर्षों से कूटनीतिक तौर पर आतंकवाद के मसले पर पाक को दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिश करता रहा है। भारत सभी ग्लोबल मंचों पर पाक को आतंक को पनाह देने वाले देश के रूप में कटघरे में खड़ा करता रहा है। अभी फिर संयुक्त राष्ट्र में मौका है। 26 सितंबर को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यूएन सम्मेलन को संबोधित करेंगी।
निश्चित ही वह उरी आतंकी हमले में पाक के हाथ के सबूतों के साथ पाकिस्तान को बेनकाब करेंगी और पाक के खिलाफ सख्त ग्लोबल एक्शन की मांग करेगी। लेकिन एक तो इस तरह की भारतीय कूटनीति का अधिक असर पाक पर नहीं पड़ा है। भारत की ओर से बार-बार सबूत देने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने कभी भी पाक के खिलाफ कोई भी एक्शन नहीं किया है। दूसरा, अमेरिका ने भी पाक को चेतावनी व मदद रोक देने से अधिक कुछ नहीं किया है। इसलिए यूएन व अमेरिका से भारत को इस बार भी अधिक उम्मीद नहीं लगानी चाहिए।
अभी वक्त का तकाजा है कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ कुछ ठोस करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी सरकार से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। केवल कूटनीति से ही पाक को सबक नहीं सिखाया जा सकता है। आगे सोचना होगा, लेकिन युद्ध हरगिज नहीं। क्योंकि पाक की यही चाल है कि भारत को इतना उकसाया जाए कि वह अपना संयम खो दे और हमले को मजबूर हो जाए। चूंकि भारत पाक को विश्व में आतंकी राष्ट्र घोषित करवाने के लिए रणनीतिक प्रयास कर रहा है, इसलिए पाक हर हाल में भारत को रोकना चाहता है।
पाक भारत को एनएसजी की मेंबरशिप से भी रोकना चाहता है। ऐसे में भारत की ओर से युद्ध की घोषणा उसकी शांति की ग्लोबल छवि को धक्का पहुंचाएगा। म्यांमार जैसा सैन्य ऑपरेशन भी पाक के साथ नहीं कर सकते। हम ग्लोबल नियमों में बंधे हैं। हां, हम पाक से सभी व्यापारिक, राजनयिक रिश्ते खत्म कर सकते हैं। अफगानिस्तान को भी पाक से भी रिश्ते खत्म करने के लिए मना सकते हैं। हम चीन से बेहतर संबंध बनाकर भी पाक की घेराबंदी कर सकते हैं। इसके साथ ही सैनिकों को भी सीमा पार में सामित एक्शन की छूट दे सकते हैं।
कश्मीर में जितने भी आतंकी गुट व अलगावादी एलिमेंट हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई कर सकते हैं। हम पाक सीमा के पास आतंक के सभी स्रोतों को काट सकते हैं। हम पाक के बलूचिस्तान, स्वात, कराची जैसे और टुकड़े करवा सकते हैं। पीओके हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। अब यह तय हो चुका है कि पाक भारत से शांति नहीं चाहता है। भारत की सभी सरकारों ने पाक के साथ शांति बहाल करने की पहल की, लेकिन बदले में पाक की सभी सरकारों ने हमें युद्ध और आतंकवाद के घाव दिए।
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