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अमरनाथ आतंकी हमला: यात्रियों पर कायराना हमला

आतंकवादी सैनिक कैंप पहुंचने तक बस में गोलियां दागते रहे।

अमरनाथ आतंकी हमला: यात्रियों पर कायराना हमला
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पाकिस्तानी संगठन संगठन लश्कर ए तैयबा ने अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर किए गए हमले की जिम्मेदारी ले ली है। इसका मास्टमाइंड पाकिस्तान स्थित लश्कर का कमांडर इस्माइल है। तो एक और आतंकवादी हमारी वांछित सूची में शामिल हो गया, लेकिर लश्कर न भी लेता तो इससे क्या फर्क पड़ता। आखिर यह तो साफ है कि आतंकवादियों ने ही यह कायराना हमला किया। वो कोई भी हो सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां मान रहीं हैं कि लश्कर और हिज्बुल ने मिलकर यह हमला किया। हालांकि जिस ढंग के हमले की सूचना मिल रही है, उसमें सहसा यह विश्वास नहीं होता कि 60 यात्रियों वाली बस में केवल पांच महिलाओं समेत 7 यात्रियों की मौत हुई और शेष घायल हुए और बच गए। बस में सवार एक यात्री योगेश का जो बयान मीडिया में आ रहा है उसके अनुसार श्रीनगर से बस शाम को 5 बजे निकली थी।

दो घंटे के सफर के बाद अनंतनाग से 2 किलोमीटर पहले बस खराब हो गई थी। इसके बाद जैसे ही बस चलने को तैयार हुई तो बस की खिड़कियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसने लगीं, लेकिन ड्राइवर सलीम ने बस नहीं रोकी। आतंकवादी सैनिक कैंप पहुंचने तक बस में गोलियां दागते रहे। योगेश के अनुसार यह एक चमत्कार ही है कि 60 लोगों में से बाकी लोग जिंदा हैं और जल्दी ही घर लौंटेंगे।

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जाहिर है, सभी यात्री केवल अपनी नियति से बचे। आखिर अमरनाथ यात्रा हर वर्ष पूरी सुरक्षा व्यवस्था में कराई जाती है। यात्रियों के अमरनाथ के दर्शन करने जाने से लेकर वहां से वापसी तक पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा के आतंकवादियों के निशाने पर होने की बात कही थी और अलर्ट भी जारी किया था।

आतंकवादी बुरहान वानी की बरसी (8 जुलाई) से पहले कश्मीरी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक मुनीर खान ने सेना और सीआरपीएफ को चिट्ठी लिखी थी कि आतंकवादी सौ से डेढ़ सौ यात्रियों को मारने की साजिश रच रहे हैं। जाहिर है, इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और तगड़ी हुई होगी। वैसे भी बुरहान वानी की बरसी के आसपास आतंकवाद बड़ी वारदातें करने की कोशिश करेंगे यह बिल्कु स्पष्ट था।

हमारे पास जो सूचना है उनके अनुसार यात्रा पहलगाम और बालटाल। इन दो रूटों से 29 जून को बेहद कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शुरू की गई थी। सुरक्षा प्रबंधों को पुख्ता बनाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकार को 40 हजार अर्धसैनिक बल और प्रदान किए थे। इसके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस है, सेना है। यात्रियों से सवार गाड़ियों के आगे पीछे बीच में सुरक्षा बल एकदम सतर्क अवस्था मंे साथ चलते हैं।

इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद यदि आतंकवादी सफल हो गए तो इसे हमारी विफलता के रूप में स्वीकार करना ही होगा। न तो यह कहने से काम चलेगा कि अमरनाथ यात्रियों पर पहले भी हमले हुए हैं और न यह कहने से कि गुजरात की वह बस सुरक्षा कॉन्वॉय का हिस्सा नहीं थी। ध्यान रखिए वर्ष 2000 के बाद यह इस तीर्थयात्रा पर दूसरा सबसे घातक हमला है।

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2000 में यात्रियों को पहलगाम में निशाना बनाया गया था। उस हमले में 17 यात्रियों समेत 27 लोगों की मौत हुई थी तथा 36 घायल हो गए थे। 2002 में दो हमलों में 10 यात्री मारे गए थे तथा 25 घायल हुए थे। हमारे पास 1993 से लेकर 2015 तक अमरनाथ यात्रा पर हमले की 10 घटनाओं की सूचियां हैं, किंतु इसके आधार पर हम इस हमले को कमतर नहीं आंक सकते।

एक भी हमला होना हमारी पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा करता है। एक बार जब आतंकवादियांे की ओर से घोषित कर दिया गया कि वे केवल कश्मीर की आजादी के लिए नहीं यहां इस्लामिक राज कायम करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो साफ है कि वो पहले से कहीं ज्यादा तीव्रता से इस यात्रा पर हमले की तैयारी कर रहे होंगे।

वे किसी सूरत में देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा चुस्त और सतर्क होना चाहिए था। हम यह नहीं कहते कि सुरक्षा एजेंसियां वहां सतर्क और चुस्त नहीं है, किंतु अगर ऐसा घातक हमला हो गया तो इसका कारण क्या माना जाएगा। बस बालटाल से मीर बाजार जा रही थी। कहा जा रहा है कि उसका अमरनाथ श्राइन बोर्ड में निबंधन नहीं था।

हो सकता है यह सही हो, लेकिन कई बार लोग यात्रा के लिए अपनी सवारी करते हैं और उनको पता नहीं होता कि निबंधन भी करवाना है। वैसी बसों को रोककर उनको निबंधन करवाना तथा उसे सुरक्षा बंदोबस्त के साथ चलने की बात समझाना वहां की सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन का ही दायित्व है। पुलिस का आरंभिक बयान है कि बस उस यात्रा काफिले का हिस्सा नहीं थी जिसे पुख्ता सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

सामान्यतः अमरनाथ यात्रा में आने-जाने वाली गाडि़यों को सुरक्षा की वजह से रात में चलने नहीं दिया जाता। सभी बसों को शाम 7 बजे बेस कैंप पर पहुंचना होता है, लेकिन यह साफ है कि बस खराब होने की वजह से देर हुई। वह बस सुरक्षा घेेरे से पूरी तरह अलग नहीं थी। अगर बस खराब हुई तो वहां लगे सुरक्षा के जवानों को इस पर ध्यान देना चाहिए था।

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जाहिर है चूक तो हुई है और यह चूक महंगी पड़ी। आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की चुनौती दी और उसे पूरा कर दिया। हमले की भी जो खबर आई है उसको भी देखिए। आतंकवादियों ने पहले बोटेंगू में पुलिस के बुलेटप्रूफ बंकर पर हमला किया जिस पर जवाबी कार्रवाई की गई। पुलिस ने कहा कि इसके बाद आतंकवादियों ने खानाबल के पास पुलिस टुकड़ी पर गोलियां चलाईं।

जब पुलिस ने जवाबी कावाई की तो आतंकवादी भागे और बस पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इसका मतलब यह हुआ कि बस बिल्कुल अारक्षित नहीं थी। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। हमले की सूचना के साथ ही साउथ ब्लॉक में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। प्रधानमंत्री सीधे उच्चाधिकारियों से लेकर जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से संपर्क में रहे।

सुरक्षा और दुरुस्त किया गया है। गुजरात की बस थी तो वहां प्रतिक्रिया हो सकती है। इसका ध्यान रखते हुए सुरक्षा के सारे पूर्वोपाय किए गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भारत का कोई व्यक्ति इस हमले पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करके आतंकवादियों के लक्ष्य को पूरा नहीं होने देगा। वास्वत में ऐसे हमले के समय ही हमारी परिपक्वता का परीक्षण होता है।

आतंकवादियों के सामने यदि झुकना नहीं है तो उनके हमले से गुस्से में आकर आपस में संघर्ष भी नहीं करना है। सरकार ने यात्रा कायम रखने का जो निर्णय किया है वह बिल्कुल उचित है।

यात्रियों ने हर हाल में अमरनाथ जी के दर्शन करने की इच्छा जाहिर की है वह आतंकवादियों को मंुहतोड़ जवाब है। अब आगे आतंकवादियों को किसी सूरत में मौका न मिले, हमले के पहले उनका काम तमाम किया जाए पूरे रास्ते को सैनिटाइज कर दिया जाए। यह सब जिम्मेदारी सुरक्षा बलों की है। उम्मीद करनी चाहिए आगे आतंकवादी अपने हर प्रयास में परास्त होंगे।

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