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पाकिस्तान की किरकिरी भारत की कूटनीतिक जीत

यह भारत की बड़ी जीत है और कुलभूषण यादव के परिवार को बड़ी राहत है।

पाकिस्तान की किरकिरी भारत की कूटनीतिक जीत
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पाकिस्तान के झूठ का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है। कुलभूषण जाधव के मामले में हेग अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाक की दलीलें तथ्यों की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। भारत की तथ्यपूर्ण दलीलों पर गौर करते हुए हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर आखिरी फैसला आने तक रोक लगा दी।

आईसीजे ने पाकिस्तान को सख्त आदेश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे व गारंटी दे कि कुलभूषण जाधव की जान को कोई खतरा नहीं हो। यह भारत की बड़ी जीत है और कुलभूषण यादव के परिवार को बड़ी राहत है। 46 वर्षीय पूर्व नौसेना अधिकारी जाधव को तीन मार्च 2016 को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया गया था। उन पर जासूसी करने और आतंकी व विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया था।

पाक ने उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट बताया था। पाक की सैन्य अदालत ने जाधव को उक्त आरोपों में दोषी करार देते हुए इसी वर्ष 10 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई थी। इस सजा पर रोक की मांग करते हुए भारत ने आठ मई को आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले पर गत 10 मई को भारत और पाकिस्तान ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थीं।

आईसीजे ने एक एक कर पाक की सभी दलीलें खारिज कर दीं। पाक ने कहा था हेग अंतरराष्ट्रीय अदालत को इस मामले को सुनने का अधिकार नहीं है। आईसीजे ने कहा कि उसके पास जाधव मामले में सुनवाई करने का पूरा अधिकार है। पाक ने कहा था कि जाधव मामले में वियना संधि लागू नहीं होती है, उसका तर्क था कि वियना समझौते में कांंसुलर संपर्क से जुड़े प्रावधान आतंकी गतिविधियों में शामिल किसी जासूस के लिए नहीं है।

तो आईसीजे ने कहा कि इस केस में वियना संधि लागू होती है और भारत व पाकिस्तान दोनों वियना संधि से बंधे हैं। वियना संधि के तहत कुलभूषण को राजनयिक पहुंच न देकर पाक ने गलत किया। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कहा कि कुलभूषण जाधव से राजनयिक संपर्क की भारत की मांग जायज है। कोर्ट ने पाक को आदेश दिया कि जाधव को हर तरह की राजनयिक मदद मुहैया कराई जाए।

11 जजों की बेंच ने कहा कि जाधव को गिरफ्तार करना विवादित मसला है। कोर्ट ने कहा कि जासूस होने का पाक का दावा सही नहीं माना जा सकता। आईसीजे में पाक पुख्ता सबूत देने में नाकाम रहा। इससे पहले 18 साल पूर्व 1999 में दोनों पड़ोसी आईसीजे में आमने-सामने थे, जब पाकिस्तान ने उसके एक नौसैनिक विमान को मार गिराने को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत की मध्यस्थता की मांग की थी।

उस मामले में भी कोर्ट ने पाक के दावे को खारिज कर दिया था। आईसीजे में इस शर्मनाक किरकिरी के बाद पाकिस्तान में नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हीं के पास विदेश मंत्रालय भी है। शरीफ पर विपक्ष के हमले तेज होंगे। इतना ही नहीं विश्व में पाक की करतूतों का भांडा फूट गया। दुनिया को पता लगा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानूनों व संधियों का पालन नहीं करता है और दुश्मनी की भावना से भारत को परेशान करता है।

वह अपने कुत्सित मकसद के लिए बिना पुख्ता सबूत ही सजा सुना देता है। इसके उलट पाक को लेकर भारत का पक्ष फिर से मजबूत बन कर उभरा है। विश्व को भान हो गया कि भारत सच के साथ है, वह शांति चाहता है, जबकि पाक अशांति फैला रहा है। इस मामले में आईसीजे का अंतिम फैसला अगस्त में आएगा, तब पाकिस्तान कह सकता है कि वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का फैसला मानने के लिए वह बाध्य नहीं है।

ऐसा हुआ तो भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपील कर सकता है। लेकिन पाक जो भी पैंतरा अपनाए, आईसीजे के ताजा आदेश से पाकिस्तान समूचे विश्व में पूरी तरह एक्सपोज हो गया है, उसकी किरकिरी हुई है और भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत हुई है। अब पाक कुछ भी कहे, विश्व में किसी को विश्वास नहीं होगा। आईसीजे के आदेश ने उसे कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा है। अब आगे कश्मीर को लेकर पाक के स्यापे को भी बेनकाब करने की जरूरत है।

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