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अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा भारत

भारत एक संप्रभु राष्ट्रीय है इसको लेकर अन्य देशों को किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।

अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा भारत
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भारत एक संप्रभु राष्ट्रीय है, इसको लेकर अन्य देशों को किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। अमेरिका और पाकिस्तान की ओर से जिस तरह से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता तथा कश्मीरी पंडितों के बारे में टिप्पणी की गई है, वह भारत के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप है। भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताकर बता दिया है वह इस तरह के दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। तमाम भाषाई, धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता होने के बावजूद यहां लोकतंत्र अन्य देशों के मुकाबले अधिक फलफूल रहा है।
आजादी के बाद से यदि भारतीय लोकतंत्र अपनी जिम्मेदारियों व कर्त्तव्यों के प्रति सजग नहीं होता तो इसकी एकता तथा अखंडता बरकरार नहीं रह पाती और न ही सामाजिक समरसता कायम रह पाती। हिंसा की घटनाएं होने के बावजूद इसके सामाजिक तानेबाने को कोई आंच नहीं पहुंची है, तो इसका कारण यही है धार्मिक स्वतंत्रता के साथ सभी मौलिक अधिकार ज्यादा सुरक्षित हैं। दरअसल, अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की 2015 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को चिंताजनक बताया गया है। केंद्र सरकार की ओर से इसके बारे में उचित ही कहा गया है कि लगता है कि इस रिपोर्ट को बनाने वालों को भारत, उसके संविधान और समाज के बारे में सीमित जानकारी है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यह ना तो किसी धर्म को बढ़ावा देता है, न ही किसी से भेदभाव करता है।
यह सभी धर्मों का सम्मान करता है व एक समान व्यवहार करता है। भारत के संविधान में हर नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। हर व्यक्ति को अपने पसंद के किसी भी धर्म की उपासना, पालन और प्रचार का अधिकार है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने कश्मीरी पंडितों का मुद्दा उठाते हुए उन्हें अलग बसाए जाने की भारत की कोशिशों पर विरोध जताया है। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार बने दो महीने हुए हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विस्थापित कश्मीरियों के पुनर्वास की पहल तेज कर दी हैं। पाक को एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इस बाबत देश की संसद ने प्रस्ताव भी पारित किया है। ऐसे में उसे भारत के अंदरूनी मामले में दखल देने से बाज आना चाहिए। कश्मीर और कश्मीरी दोनों भारतीय हैं। उन्हें किस तरह और कहां बसाना है, यह देश की चुनी हुई सरकारों और कश्मीरियों को तय करने का अधिकार है।
वहीं अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। बावजूद इसके वहां अभी भी नस्लभेद की समस्या बरकरार है। कुछ दिन पहले फर्ग्युसन और अभी बाल्टीमोर में श्वेत-अश्वेत का झगड़ा हिंसक रूप लिए हुए है। पाकिस्तान को भारत के साथ ही आजादी मिली थी, लेकिन वहां अभी भी न तो सच्चे अर्थों में लोकतंत्र स्थापित हो सका, न ही धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित हो पाई है। वह अपने नागरिकों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक न्याय तक नहीं दे पा रहा है। और तो और अपनी अखंडता को भी सुरक्षित नहीं सका है। परिणामस्वरूप आज आतंकवाद के जनक के रूप में दुनिया में उसकी पहचान बन गई है। ऐसे में दूसरे देशों को भारत के मामलों पर हल्ला मचाने से पहले अपने गिरेबान में भी झांक लेना चाहिए।
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