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कश्मीर पर भारत को होना होगा आक्रामक

पाकिस्तान जैसे कुटिल पड़ोसी को सबक सिखाने और करारा जवाब देने के लिए उठाना होगा कड़ा कदम

कश्मीर पर भारत को होना होगा आक्रामक
शुक्रवार को कश्मीर पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिल्कुल सही दिशा पकड़ी है। पाकिस्तान जैसे कुटिल पड़ोसी को सबक सिखाने और करारा जवाब देने के लिए भारत को और आक्रामक रुख अपनाना होगा। कश्मीर के एक हिस्से को पाकिस्तान अनाधिकृत रूप से हड़पे बैठा है और वह भारतीय हिस्से पर भी अधिकार जताते हुए बेशर्मी की सारी हदें लांघता हुआ इसे संयुक्त राष्ट्र संघ और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गाहे-बगाहे उठाता रहता है। यही नहीं, वह कुछ मुट्ठीभर तत्वों को भरमाकर घाटी में हिंसा, पत्थरबाजी और आतंकी वारदातों को भी अंजाम देता रहा है।
भारत ने सर्वदलीय बैठक में बिल्कुल सही रुख अपनाया है कि पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है और अब इस समस्या के हल के लिए वहां के लोगों से भी बात करना जरूरी है। पीओके में जिस तरह ज्यादतियों की खबरें हाल के वर्षों में लगातार आती रही हैं, उससे पता चलता है कि वहां पाकिस्तान से आजादी की मांग करने वालों की आवाज को कितनी क्रूरता के साथ दबाया जाता रहा है। कुछ महीने पहले जब लोग अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरे, तब पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों ने उन पर प्रहार कर दबाने की चेष्टा की ताकि दुनिया को पता ही नहीं चल सके कि वहां क्या हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को ब्लूचिस्तान की घटनाओं की याद दिलाते हुए सही ही कहा है कि वह अपने ही लोगों पर ड्रोन के जरिए बम वर्षा करवाता आ रहा है। भारत हालांकि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल में यकीन नहीं रखता है, परन्तु पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों जिस तरह से कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर बयानबाजी की है, उसके बाद भारत की ओर से उसे आईना दिखाना जरूरी हो गया है। भारत हालांकि संसद में पहले भी इस आशय का प्रस्ताव पारित कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है और उस पर संविधान के दायरे में ही किसी से बात हो सकती है।
शुक्रवार को लोकसभा में सर्वसम्मति से फिर एक प्रस्ताव पारित कर हाल की हिंसा पर चिंता जताते हुए साफ कर दिया गया कि भारत लोकतंत्र के दायरे में रहकर वहां शांति और राजनीतिक स्थायित्व बनाने के प्रति प्रतिबद्ध है। सर्वदलीय बैठक में कुछ बातें साफ कर दी गई हैं ताकि पड़ोसी देश किसी भ्रम में नहीं रहे।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के दायरे में कश्मीर मसले के हल के लिए सरकार वार्ता के लिए तैयार है, परन्तु बातचीत पीओके में रह रहे लोगों से भी होगी। यह भी साफ कर दिया गया है कि घाटी में पिछले पैंतीस दिनों से जो कुछ हो रहा है, उसकी जड़ें सीमा पार के आतंक में छिपी हुई हैं। वहां जो हो रहा है, उसे खाद पानी सीमा पार से मिल रहा है।
सरकार हर हाल में वहां लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने को प्रतिबद्ध है। आतंक या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वहां के नौजवानों को आर्थिक विकास की प्रक्रिया में शामिल करने के प्रति भी संकल्प व्यक्त किया गया। यह अच्छी बात है कि सभी दल इस पर सहमत हैं कि जल्दी वहां एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाए जो लोगों से बातचीत कर उन्हें अमन बहाली की दिशा में उत्प्रेरित करे।
प्रधानमंत्री का यह सुझाव कारगर सिद्ध हो सकता है कि भारत पीओके से जुड़े लोगों से संपर्क स्थापित कर वहां के हालात को पूरे विश्व के सामने उजागर करे ताकि पाकिस्तान की पोल खोली जा सके। यही नहीं, कश्मीर के जो लोग देश के विभिन्न भागों में रह रहे हैं, उनका घाटी में शांति दूत के रूप में उपयोग किया जाए ताकि वहां के लोगों को देश के बाकी हिस्सों की प्रगति की जानकारी देकर फैलाए जा रहे भ्रम की हवा निकाली जा सके।
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