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पीएम मोदी की विदेश नीति से भारत को मिली अभूतपूर्व सफलता, पाक-चीन परेशान

कश्मीर में हिंसा और उपद्रव के पीछे पाक का हाथ है।

पीएम मोदी की विदेश नीति से भारत को मिली अभूतपूर्व सफलता, पाक-चीन परेशान
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विदेश नीति, सामरिक भागीदारों के साथ तालमेल, पीएम की विदेश यात्राओं और सीमा पर तनाव को लेकर सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट कर न केवल विपक्ष के सवालों का जवाब दिया बल्कि आवाम को भी बताया कि देश किस दिशा में जा रहा है। केवल विपक्ष ने ही नहीं, एक बौद्धिक तबका भी सरकार की आक्रामक विदेश नीति और पीएम की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाता रहा है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जिस स्पष्टता से सरकार की विदेश नीति के हर आयाम पर प्रकाश डाला, उससे साफ हो गया कि सरकार गंभीरता से दूसरे देशों के साथ रिश्ते प्रगाढ़ कर रही है और वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत कर रही है। पीएम मोदी की विदेश यात्राओं से विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में मदद मिली है। चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव की वजहों को भी सरकार ने देश के समक्ष रखा।

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चीन के साथ डोकलाम विवाद पर सरकार ने अपना स्टैंड साफ कर दिया कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। सरकार कूटनीति से विवाद का हल निकालने में जुटी हुई है। शांति से ही मसले सुलझाए जा सकते हैं। चीन जिस तरह रोज डोकलाम पर भारत के साथ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करता रहा है, उसमें भारत ने डोकलाम में डटे रहकर जहां चीन को कड़ा संदेश दिया वहीं वार्ता का संदेश देकर कूटनीति के विकल्प को भी सामने रखा।

डोकलाम मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह चीनी राजदूत से मिलने चले गए, उससे कांग्रेस की ही किरकिरी हुई। कश्मीर में जारी अशांति के पीछे सीमा पार से पाक प्रायोजित आतंकवाद पर भी सरकार ने नीति स्पष्ट कर दी कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, भारत वार्ता नहीं करेगा। समूचा विश्व जानता है कि पाकिस्तान भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल करता है।

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कश्मीर में हिंसा और उपद्रव के पीछे पाक का हाथ है। टेर फंडिंग और अलगाववादियों पर नकेल कस कर सरकार आतंकवाद की ही कमर तोड़ रही है। पिछली सरकारों के पाक के आतंकवाद पर नरम रुख का नतीजा रहा है कि पाक भारत को घाव देता रहा है। पीएम मोदी ने जबसे कमान संभाली है, जहां उन्होंने ग्लोबल मंचों पर पाक के आतंकवाद को बेनकाब किया है,

वहीं उनकी सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद और उसके पोषकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई है। आतंकवाद और कश्मीर को लेकर पाक को जो रवैया रहा है उसमें भारत सरकार के लिए कठोर नीति अपनानी जरूरी भी है। नरमी से काम नहीं चलने वाला। जहां तक अन्य पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते की बात है तो नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार से भारत के संबंध मधुर हैं।

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सार्क उपग्रह लांच कर भारत ने अफगानिस्तान समेत पड़ोसियों को तोहफा दिया है। पीएम मोदी खुद सभी पड़ोसी देशों की यात्रा की है, उनसे कई समझौते किए हैं। पीएम की विदेश यात्राओं व कूटनीतिक धार से एशिया में ही आसियान देशों से भारत के संबंध मजबूत हुए हैं। चीन के विरोधी देशों का भारत पर भरोसा जगा है।

जापान, वियतनाम, फिलिपींस, दक्षिण कोरिया, कंबोडिया, थाईलैंड, मालदीव, मलेशिया, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि देशों से भारत के आर्थिक संबंध मजबूत हुए हैं। अफ्रीकी देशों, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, कनाडा, इटली, स्पेन, आयरलैंड, सशेल्स से मोदी के शासनकाल में भारत के आर्थिक व सामरिक संबंध प्रगाढ़ हुए हैं।

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अमेरिका से भारत की दोस्ती अपने चरम पर पहुंची है। पीएम की इजराइल यात्रा ने समूचे विश्व का ध्यान खींचा। खाड़ी व पश्चिम एशियाई देशों में भी सऊदी अरब, यूएई, कतर, ईरान, तुर्की आदि देशों से भारत के संबंध मजबूत हुए हैं। आज विश्व में भारत की स्थिति यह है कि चीन और पाकिस्तान के अलावा किसी भी देश के साथ तनावपूर्ण रिश्ते नहीं हैं।

इससे पहले भारत ने कभी भी अपनी कूटनीति के दम पर विश्व में अपनी इतनी मजबूत पहचान नहीं बनाई है। विपक्ष को केवल आरोप लगाने के लिए ही सरकार पर आरोप नहीं लगाना चाहिए। कांग्रेस को अपने काल की विदेश नीति का आकलन भी करना चाहिए कि कैसे भारत की छवि सॉफ्ट स्टेट की बन गई थी। मोदी सरकार की विदेश नीति की तटस्थता से समीक्षा की जानी चाहिए।

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