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भारत की रणनीति से पाकिस्तान दुनियाभर में हुआ अलग-थलग, चीन इस मजबूरी के कारण कर रहा है समर्थन

पाकिस्तान को दुनियाभर में अलग-थलग करने में भारत बहुत हद तक कामयाब हो गया है और अब चीन ही पाकिस्तान के साथ खड़ा हुआ दिख रहा है और उसकी वजह उसके आर्थिक हित हैं।

भारत की रणनीति से पाकिस्तान दुनियाभर में हुआ अलग-थलग, चीन इस मजबूरी के कारण कर रहा है समर्थन

पाकिस्तान को दुनियाभर में अलग-थलग करने में भारत बहुत हद तक कामयाब हो गया है। अब ले-देकर चीन ही उसके साथ खड़ा हुआ दिख रहा है और उसकी वजह उसके आर्थिक हित हैं। वह मध्य एशिया और यूरोप तक अपना उत्पाद पहुंचाने के लिए पाकिस्तान के जरिए गलियारा चाहता है, जिस पर अब तक उसके अरबों डालर खर्च हो चुके हैं।

एक वक्त था, जब सुपर पावर अमेरिका पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई देता था, परंतु जब से उसके भारत के साथ आर्थिक, सामरिक और राजनयिक रिश्ते बेहतर हुए हैं, तब से अमेरिका ने पाक से दूरी बढ़ानी शुरू कर दी थी।

पाकिस्तान की दुष्टता जगजाहिर है। वह लंबे समय तक पूरे विश्व के समक्ष झूठ बोलता रहा कि उसने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पनाह नहीं दी,परंतु अंततः अमेरिकी सेना ने उसे पाकिस्तान के सैन्य क्षेत्र एबटाबाद में मार गिराया।

दुनिया के किसी भी हिस्से में आतंकी वारदात हो, किसी न किसी रूप से पाकिस्तान का उससे लिंक निकल ही आता है। वह अफगानिस्तान से तालिबानी आतंक को खत्म करने के नाम पर अमेरिका तैंतीस अरब डाॅलर हासिल कर चुका है, परंतु हक्कानी और दूसरे गुटों को खत्म करने के बजाय उन्हें छिपाने और मजबूत करने में लगा रहा।

इसी तरह यह कहते हुए अमेरिका और दुनिया की आंखों में धूल झोंकता रहा कि वह भारत या किसी भी देश के खिलाफ होने वाली आतंकवादी वारदात के लिए पाकिस्तान की जमीन का उपयोग नहीं होने देगा,परंतु चाहे मुंबई अटैक हो, दिल्ली में संसद पर हमला हो, पठानकोट एयरबेस पर अटैक हो या उरी में सैन्य कैंप पर हमला, हरेक के तार सीमा पार से जुड़े हुए मिले।

चाहे मनमोहन सिंह की सरकार रही हो या मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार, भारत की ओर से बार-बार रिश्ते सामान्य कर भरोसा बहाल करने की हरदम चेष्टा की गई, परंतु पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और आतंकवादी जमातों ने हर बार भारत की कोशिशों में पलीता लगाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। हर कोशिश के बाद कुछ ऐसा हुआ कि बातचीत की कोशिश पटरी से उतर गई।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी पाक हुक्मरानों को समझाने की कोशिश की, परंतु वह अपनी मक्कारी से बाज नहीं आए। डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता हाथ में आते ही पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दे दी थी कि उसे चालबाजियों से बाज आना होगा। नहीं तो उसे दी जा रही मदद बंद कर दी जाएगी। एक-दो बार बीच में ऐसा हुआ भी, परंतु उसे फिर बहाल कर दिया गया।

जब ट्रंप प्रशासन को लगा कि पाकिस्तान मदद भी हासिल कर रहा है और आतंकवादियों को भी पाल-पोस रहा है तो उसे मदद रोकने का कड़ा फैसला करना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा के तुरंत बाद पठानकोट एयरबेस पर अटैक किया गया था। उसके बाद 18 सितंबर 2016 को उरी में हमला हुआ। उसी के बाद प्रधानमंत्री ने ऐलान कर दिया था कि भारत पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने न केवल बेनकाब करेगा, बल्कि उसे पूरी तरह अलग-थलग कर देगा।

वैसा ही हुआ। सितंबर खत्म होने से पहले ही भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को उसकी हदें और औकात बताई। इसके बाद वहां होने वाले सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया। भारत की देखा-देखी अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया और आखिरकार सम्मेलन को रद करना पड़ा।

पाकिस्तान की इससे काफी फजीहत झेलनी पड़ी। इसके अलावा ब्रिक्स सम्मेलन में भी भारत ने चीन की मौजूदगी में पाकिस्तान को उसकी औकात बताई। ब्रिक्स देशों ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों का नाम अपने घोषणापत्र में शामिल किया और तमाम आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

इसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना गया। भारत को सबसे अहम कामयाबी मोदी की वाशिंगटन यात्रा से मिली। ट्रंप से उनकी मुलाकात के बाद अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति रुख और भी सख्त हो गया, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। हालांकि चीन अब भी पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखने की कोशिश कर रहा है, परंतु कब तक वह उसकी मदद करेगा, कोई पक्के तौर पर दावा नहीं कर सकता।

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