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चिंतन : वैश्विक अर्थव्यवस्था में चमकता सितारा भारत

मोदी सरकार की ओर से उठाए गए नीतिगत कदमों का असर देशी-विदेशी धरातल पर दिखने लगा है।

चिंतन : वैश्विक अर्थव्यवस्था में चमकता सितारा भारत

इसमें दो राय नहीं कि जब से केंद्र में एनडीए सरकार आई है, भारतीय अर्थव्यवस्था उत्तरोत्तर मजबूत हो रही है। आर्थिक सुधार की दिशा में मोदी सरकार की ओर से उठाए गए नीतिगत कदमों का असर धीरे-धीरे देशी-विदेशी धरातल पर दिखने लगा है। तभी तो, विकसित और विकासशील देशों का संगठन जी-20 के सदस्यों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के सम्मेलन में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक बातें हो रही हैं। वाशिंगटन में आयोजित इस सम्मेलन में भाग लेने आए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर पेश की और शेष जी-20 देशों में भारत के प्रति भरोसा जगाया।

जी-20 देशों ने भी भारत पर भरोसा बढ़ने की बात कही। इसी सम्मेलन में भाग लेने आए रिर्जव बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में आज 'अंधों में काना राजा' की तरह टिमटिमा रही है। राजन के कहने का तात्पर्य यह था कि जहां ग्लोबल अर्थव्यवस्था में सुस्ती है, वैश्विक विकास की दर बेहद धीमी है, वहीं भारतीय अर्थव्यस्था तेज गति से विकास कर रही है और विश्व आर्थिक क्षितिज में ध्रुवतारा की तरह चमक रहा है। हालांकि राजन प्रतीक के लिए सकारात्मक मुहावरा नहीं चुन पाए। वे भारत को वैश्विक अर्थव्यस्था में चमकता बिंदु कहना चाहते थे।
लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को 'काना राजा' की संज्ञा देकर उन्होंने इसकी उपलब्धि को कमतर आंका है। हकीकत यह है कि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद चाहे महंगाई पर अंकुश की बात हो, करप्शन में कमी हो, नीतिगत सुधार के फैसले करने में तेजी की बात हो, देशी-विदेशी निवेश की राह आसान बनाना हो, विभिन्न सेक्टर में एफडीआई कैप बढ़ाना हो, सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना हो, राजकोषीय घाटे को सीमा में रखना हो, वित्तीय घाटे को कम करना हो, सरकारी नियमन को उदार बनाना हो, ब्रिक्स बैंक में भारत की भागीदारी बढ़ानी हो, दूसरे देशों से कारोबारी रिश्ते हो, करीब-करीब हर मोर्चे पर स्थिति सुधरी है।
आम बजट में भी सरकार ने गरीबी उन्मूलन के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने, कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार लाने और देश के रोड-रेल-पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर व पावर सेक्टर को मजबूत करने पर फोकस किया है। पीएसयू बैंकों में नई पूंजी डाली है। हाल ही में कमजोर वैश्विक आर्थिक हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, ग्लोबल रेटिंग एजेंसियां-फिच, मूडीज, एसएंडपी और नामुरा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक वृद्धि के लिहाज से चमकता सितारा करार दिया है। खुद राजन को यूपीए सरकार के समय बेलगाम महंगाई के चलते 2010 से 2012 के बीच आठ बार नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि करना पड़ा था।
अब इस एनडीए सरकार के आने के बाद महज डेढ़ साल में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री राजन ने तीन बार रेपो दरें घटाई हैं। उन्होंने रेपो और रिवर्स रेपो का अंतर भी एक से घटा कर आधा फीसदी कर दिया है। हालांकि आर्थिक क्षेत्र में अभी और बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जीएसटी और भूमि सुधार पर सरकार को अब तक सफलता नहीं मिली है।
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