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प्रभात कुमार रॉय का लेख : नए दौर में भारत-रूस के रिश्ते

भारत और रूस के संबंध वस्तुतः कूटनीतिक संबंधों से कहीं आगे बढ़कर भावनात्मक और सांस्कृतिक शिखरों को स्पर्श करते हैं। भारत और रूस के संबंध अब एक नए दौर में पहुंच चुके हैं, जो अमेरिका कूटनीतिक धमकियों की परवाह किए बिना निकट सहयोगात्मक सक्रियता को बनाए रखने में अत्यंत सक्षम है। एक नया दौर जिसमें कि भारत में रूस की आधुनिकतम वैज्ञानिक तकनीकों से विराट सैन्य सामग्री का निर्माण किया जाएगा। एक नया दौर जिसमें कि आत्मनिर्भर भारत का सृजन करने में रूस एक सहायक मित्र शक्ति सिद्ध होगा।

प्रभात कुमार रॉय का लेख : नए दौर में भारत-रूस के रिश्ते
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

भारत और रूस के मध्य गहन संबंधों को महज कूटनीतिक ताल्लुकात के दायरे में कदापि नहीं समझा जा सकता। वस्तुतः सदियों पुराने रिश्ते सिर्फ नए-नए रूप और आकार धारण करते रहते हैं। भारत और रूस के संबंध वस्तुतः कूटनीतिक संबंधों से कहीं आगे बढ़कर भावनात्मक और सांस्कृतिक शिखरों को स्पर्श करते हैं। 6 अप्रैल को जब रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावारोव एक तूफानी दौरे पर भारत आए और भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर से बातचीत होने के पश्चात आयोजित प्रेसवार्ता में यह तथ्य उजागर हुआ कि अमेरिका के गहन कूटनीतिक दबाव के बावजूद भारत और रूस अत्यंत निकट साझेदारी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु शक्ति, अंतरिक्ष और रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी सक्रियता को और अधिक शक्तिशाली बनाएंगे। आगामी दौर में रूस की आधुनिकतम वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से सैन्य सामग्री का उत्पादन बड़े पैमाने पर मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की महान्ा अवधारणा के तहत भारत की सरजमीन पर किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन द्वारा यह चेतावनी दी गई है कि जो भी देश रूस के साथ अपने व्यापारिक और सैन्य ताल्लुकात कायम रखेगा, उस देश के ऊपर अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों को आयद कर दिया जाएगा। क्रिमिया युद्ध के पश्चात अमेरिका और रूस के मध्य वैमनस्यपूर्ण शत्रुता का दौर प्रारम्भ हो गया। विगत वर्ष नॉटो संधि के एक देश टर्की द्वारा रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा गया तो अमेरिका ने टर्की के बरखिलाफ फिर सख्त रुख अख्ितयार करते हुए आर्थिक प्रतिबंधों को आयद कर दिया। वर्ष 1997 परमाणु परीक्षण करने के पश्चात भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को बाकायदा झेला है। भारत क्योंकि रूस के साथ अपने व्यापारिक और सैन्य संबंधों को निरंतर गति से ताकतवर बनाता जा रहा है, बहुत मुमकिन है कि भविष्य में भारत को भी अमरिका द्वारा आयद आर्थिक प्रतिबंधों को झेलना पड़ सकता है।

भारत द्वारा रूस के साथ अक्तूबर 2018 में पांच बिलियन डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को खरीदने का सौदा संपन्न किया गया। इस वर्ष भारत को एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम हासिल हो जाएगा। इस सौदे पर भी अमेरिका ने कड़ा एेतराज दर्ज किया, किंतु भारत ने अमेरिकी सरकार के कड़े एेतराज को दरकिनार करते हुए अपने राष्ट्रीय हित में रूस से यह बड़ा सैन्य सौदा अंजाम दिया। भारत को सैन्य सामग्री का तकरीबन 60 फीसदी रूस द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। विगत माह जब अमेरिका के विदेश मंत्री लॉयड ऑस्टिन भारत यात्रा पर आए थे तो रूस के साथ भारत के निरंतर प्रगाढ़ होते जा रहे सैन्य और रणनीतिक रिश्तों पर उन्होंने बाकायदा तल्ख प्रश्न खड़े किए। भारत द्वारा विगत कुछ वर्ष के दौरान अमेरिका से भी सैन्य सामग्री का आयात किया गया है। भारत ने आजादी हासिल होने के पश्चात सदैव एक स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति का अनुसरण किया है। कोल्ड वार के अत्यंत कटु दौर में भी भारत द्वारा अमेरिका और सोवियत रूस के साथ अत्यंत मधुर संबंध कायम रखे गए। वर्ष 1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान सोवियत रूस के साथ भारत के संबंधों को एक नया रणनीतिक आयाम हासिल हुआ, जबकि रूस ने बहुत खुलकर भारत के पक्ष में हिंद प्रशात क्षेत्र में अपने नेवल फ्लीट तैनात कर दिए थे। हिंद प्रशांत में रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत ने रूस को पुनः आमंत्रित किया है। रूस के उप विदेश मंत्री इगोर मोरगूलोव और रूस में तैनात भारत के राजदूत बाल वैंकेटेश वर्मा के बीच एक लंबे दौर की बातचीत हुई है। रूस और भारत के मध्य आयोजित की जाने वाली सालाना मीटिंग में इस दफ़ा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के शरीक हाेने की संभावना है। इस सालाना मीटिंग में हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत और रुस द्वारा रणनीतिक साझेदारी का करने का फैसला किया जाएगा।

भारत और रूस द्वारा परस्पर व्यापारिक साझेदारी को तीव्र गति से बढ़ने के लिए चेन्नई और व्लाडिवोस्तक के मध्य एक समुद्री कॉरिडोर निर्मित करने का निर्णय भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि अभी भारत और रूस के मध्य एक ही समुद्री मार्ग है, जो मुबंई और सेंट पीट्सबर्ग के मध्य स्थित है। चेन्नई और व्लाडिवोस्तक के मध्य एक नया समुद्री मार्ग निर्मित हो जाने पर दोनों देशों के मध्य समुद्री दूरी करीब आधी रह जाएगी। रूस के विदेश मंत्री ने एक बात स्पष्ट कर दी कि रूस वस्तुत चीन के साथ कोई सैन्य संधि नहीं करने जा रहा है। रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावारोव का कहना है कि भारत की तरह से चीन भी रुस का एक निकट दोस्त देश है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मत है कि भारत और चीन के मध्य सीमा विवाद के निपटाने में रूस वस्तुतः भारत के लिए मददगार सिद्ध हो सकता है। डोकलाम विवाद के दौरान चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की रूस द्वारा मास्को में बैठक आयोजित कराई गई थी, जिससे कि अंततः विवाद का निदान निकाला जा सका। विस्तारवादी चीन का निर्णायक मुकाबला करने में रूस-भारत में रणनीतिक सहयोग की प्रबल दरकार है।

कोविड-19 के विश्वव्यापी कहर का मुकाबला करने में रूस और भारत के मध्य निरंतर सहयोग किया जा रहा है। रूस के डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड द्वारा अनेक भारतीय मेडिसिन कंपनियों के साथ स्पूतनिक वैक्सीन की 750 मिलियन डोज निर्मित करने का करार हो चुका है। भारत द्वारा निर्मित वैक्सिन की 500 मिलियन डोज का निर्माण रूस की कंपनियों द्वारा किया जाएगा। अफ़गानिस्तान के गृहयुद्ध को लेकर दोनों देशों का गहन सरोकार कायम रहा है। दोहा समझौते के पश्चात अमेरिकी फौज़ को अफ़गानिस्तान छोड़कर वापस चला जाना है, किंतु इसमें अभी कुछ देरी हो रही है, किंतु इसके बाद अफ़गानिस्तान में क्या होगा? क्या अफगानिस्तान फिर से तालिबान हुकूमत के दौर में चला जाएगा? कट्टरपंथी इस्लामिक हुकूमत का दौर अफ़गानिस्तान में फिर से वापस न लौट पाए, अतः इसके लिए जनतांत्रिक हुकूमत को अत्यंत ताकतवर बना होगा। अफ़गानिस्तान के विकट मसले पर भारत और रुस एकजुट हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के निकट सहयोग से पाकिस्तान के प्रभाव को अफ़गानिस्तान से हटाया जा सकता है।

विहंगम दृष्टि डाले तो भारत और रूस के संबंध अब एक नए दौर में पहुंच चुके हैं, जो अमेरिका कूटनीतिक धमकियों की परवाह किए बिना निकट सहयोगात्मक सक्रियता को बनाए रखने में अत्यंत सक्षम है। एक नया दौर जिसमें कि भारत में रूस की आधुनिकतम वैज्ञानिक तकनीकों से विराट सैन्य सामग्री का निर्माण किया जाएगा। एक नया दौर जिसमें कि आत्मनिर्भर भारत का सृजन करने में रूस एक सहायक मित्र शक्ति सिद्ध होगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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