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''नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के हर पैंतरे को किया दरकिनार''

भारत ने साफ कर दिया है कि वह विश्व में किसी के दबाव में नहीं है। वह अपनी सुरक्षा के प्रति सजग है। रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम समझौता कर भारत ने अपनी स्वतंत्र कूटनीति का संदेश दिया है।

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भारत ने साफ कर दिया है कि वह विश्व में किसी के दबाव में नहीं है। वह अपनी सुरक्षा के प्रति सजग है। रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम समझौता कर भारत ने अपनी स्वतंत्र कूटनीति का संदेश दिया है। अमेरिका ने पूरा जोर लगाया कि भारत और रूस के बीच एस-400 की डील न हो, लेकिन नई दिल्ली ने वाशिंगटन के हर पैंतरे को दरकिनार कर दिया।

भारत जिस तरह से दो विषैले पड़ोसी देशों से घिरा हुआ है, वह अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। भारत शुरू से गुटनिरपेक्ष नीति पर चला है और विश्व के खेमेबाजी से दूर रहा है। आजादी के वक्त से ही रूस से भारत की दोस्ती रही है। भारत की विकास यात्रा में रूस बड़ा भागीदार रहा है। विश्व के दो देश- रूस (पहले सोवियत संघ) व इजराइल ऐसे रहे हैं,

जो मुश्किल वक्त में हमेशा भारत के साथ खड़े रहे हैं। वह अमेरिका ही था, जिसने भारत को रूस से क्रायोजेनिक ईंधन की तकनीक नहीं लेने दिया था। आज बेशक भारत और अमेरिका के संबंध प्रगाढ़ हों, पर एक दौर ऐसा भी रहा, जब उसने भारत के तकनीकी विकास की राह में रोड़ा अटकाई और आतंकवाद के बारूद पर बैठे पाकिस्तान के साथ पींगे बढ़ाता रहा।

इस वक्त बहुध्रुवीय विश्व में जरूरी है कि भारत अपनी कूटनीति में संतुलन बना कर रखे। रूस के साथ डील करके भारत ने वही कोशिश की है। अमेरिका ईरान पर अपने प्रतिबंध में भी भारत को भी घसीटने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत व ईरान के संबंध मधुर हैं। यह सही है कि भारत के अमेरिका से रणनीतिक संबंध है,

जिसमें दोनों देश वैश्विक स्तर पर सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं और यूएस भारत का बड़ा ट्रेड व डिफेंस पार्टनर भी है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि अमेरिका भारत की जरूरत को भी समझे। भारत-ईरान के बीच ट्रेड में अमेरिका को बाधा नहीं बनना चाहिए। भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

भारत ने फ्रांस के साथ राफेल व इजराइल के साथ बराक मिसाइल सौदे के बाद अब रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस डील की है। अमेरिका के साथ भी एफ-16 विमान खरीदने की तैयारी है। इससे भारत का रक्षा तंत्र और मजबूत होगा। चीन ने पहले ही रूस से एस-400 का सौदा कर रखा है। इसलिए भारत के पास वैसा सिस्टम का होना जरूरी था।

40 हजार करोड़ की लागत में पांच एस-400 सिस्टम भारत को मिलेंगे। यह सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक ट्रायम्फ मिसाइल स्क्वॉड्रन है, जो 400 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन देशों के लड़ाकू जहाजों, मिसाइलों और ड्रोन को पलक झपकते ही खत्म कर देगा। यह पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा।

36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को नष्ट कर सकने वाला यह सिस्टम अमेरिका के एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। हालांकि यक डील अमेरिकी कानून-काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट का उल्लंघन मानी जाएगी। इसके तहत अमेरिकी संसद ने रूस से हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

लेकिन भारत को अपना हित पहले देखना है। भारत ने रूस के साथ स्पेस, परमाणु, रेल व सड़क, उद्योग समेत आठ करार किए। रूस भारत अमंरिक्ष में मानव मिशन-गगनयान में सहयोगी बनेगा। दोनों मुल्कों के बीच रूबल रुपया डील, हाइ स्पीड रशियन ट्रेन, टैंक रिकवरी व्हीकल, आतंकवाद, क्लाइमेट चेंज पर बात हुई है।

दोनों देश एससीओ, ब्रिक्स, जी20, और असियान जैसे ग्लोबल मंचों पर मिल कर काम कर रहे हैं। यह संबंधों की प्रगाढ़ता दिखाता है। आने वाले वक्त में भारत व रूस के बीच ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एटमी व सोलर एनर्जी और सामुद्रिक रक्षा क्षेत्र में व्यापक सहयोग देखने को मिलेगा।

चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए भारत का रूस के साथ रणनीतिक संबंध जरूरी है। रूस के जरिये चीन का साधने में मदद मिलेगी। इस डील से भारत और रूस एक बार फिर साथ आ गए हैं।

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