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आतंकवाद पर विश्व में अकेला पड़ा पाकिस्तान

अब तक किसी भी छोटे-बड़े देश ने आतंक के खिलाफ भारतीय कार्रवाई का विरोध नहीं किया।

आतंकवाद पर विश्व में अकेला पड़ा पाकिस्तान
अब यह साफ हो चुका है कि आतंकवाद पर विश्व बिरादरी में पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है। भारत की ओर से पीओके में किए गए सजिर्कल स्ट्राइक के बाद भी किसी देश से पाकिस्तान को सर्मथन नहीं मिलना साबित करता है कि आतंकवाद को पनाह देने और एक्सपोर्ट करने के चलते वह अकेला है। कोई उसके साथ खड़ा नहीं है।
बड़ी बात यह है कि किसी भी छोटे-बड़े देश ने आतंक के खिलाफ भारतीय कार्रवाई का विरोध नहीं किया। अब तक साथ निभा रहा चीन ने भी आतंकवाद पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। सजिर्कल स्ट्राइक के बाद चीन ने पाक के पक्ष में सहानुभूति के दो बोल भी नहीं कहे। चीन ने एक सप्ताह में दो बार पाकिस्तानी मीडिया के दावों की हवा निकाल दी।
पाक मीडिया ने दावे किए कि कश्मीर पर चीन पाक की मदद करेगा और भारत के साथ किसी भी जंग की सूरत में वह पाक का साथ देगा, लेकिन ड्रैगन ने पाक को भारत से वार्ता की सलाह दी। 1971 की जंग में पाकिस्तान को साथ देने वाला देश ईरान ने भी बलूचिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मोर्टार हमले कर जता दिया कि वह किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।
शांत देश ईरान का पाक सीमा के अंदर मोर्टार दागना वहां की हुकूमत के लिए बड़ा झटका है। ईरान इस समय भारत के साथ खड़ा है। मुस्लिम देशों में भी कोई पाक के साथ नहीं आया। लंबे समय से साथ दे रहे सऊदी अरब ने भी पाक को अकेला छोड़ दिया। दरअसल सऊदी अरब के नेतृत्व में 34 मुस्लिम देशों ने सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए इसी साल ग्लोबल मंच बनाया था, जिसका नेतृत्व पाकिस्तान को ही दिया था।
लेकिन इस दिशा में पाक ने कुछ भी नहीं किया। सऊदी अरब पाक के इस रवैये से संतुष्ट नहीं है। उल्टे सऊदी अरब के भारत से अच्छे ताल्लुकात बन गए हैं। कश्मीर में मानवाधिकार पर पाक के पक्ष में आवाज उठाने वाले पेट्रोलियम उत्पादक व निर्यातक देशों का संगठन ओपेक ने भी पीओके में सजिर्कल स्ट्राइक की निंदा तक नहीं की। एनएसजी में भारत की एंट्री के विरोध में रहे तुर्की ने भी सजिर्कल स्ट्राइक के मसले पर पाक के साथ नहीं आया।
इसके अलावा कतर, संयुक्त अरब अमीरात समेत पश्चिम एशिया का कोई भी देश पाक के पक्ष में नहीं आया। सार्क देशों में भी अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान के बाद अब र्शीलंका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्लामाबाद में नवंबर में प्रस्तावित सम्मेलन में भाग नहीं लेगा। वैसे यह सम्मेलन रद भी हो चुका है। लेकिन र्शीलंका ने भी पाक से दूरी बना ली। संयुक्त राष्ट्र ने भी पाक को भारत से वार्ता की ही सलाह दी।
यूएन द्वारा घोषित आतंकियों का पाकिस्तान में सरेआम जलसा करना, घूमना-फिरना और उसके खिलाफ पाक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करना आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के रूप में पाकिस्तान की पहचान के लिए काफी है। अमेरिका ने तो पाक को अपने आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। ब्रिटेन, फ्रांस, र्जमनी, जापान जैसे ताकतवर देश पहले ही आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के साथ है।
इस तरह आतंकवाद पर पाक का दुनिया में अलग-थलग पड़ जाना भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत है। इसके पीछे पीएम नरेंद्र मोदी की दो साल की मेहनत है। भारत के खिलाफ आतंकवाद की नीति पर चलते रहने की पाक की जिद स्पष्ट हो जाने के बाद पीएम ने हर ग्लोबल मंच से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जंग की अपील की। सभी प्रमुख देशों की यात्रा कर आतंकवाद पर पाक के खिलाफ पेशबंदी की और अपने पक्ष में सर्मथन जुटाया।
पठानकोट और उरी हमले के बाद यूएन में सबूतों के साथ पाक को बेनकाब किया और विश्व समुदाय से पाक को अलग-थलग करने की जोरदार अपील की। मोदी सरकार की नीति सफल रही। आगे भी सरकार को आतंकवाद को लेकर पाक के खिलाफ कठोर रुख अपनाए रखना चाहिए। उसे आर्थिक तौर पर भी आइसोलेट करने की जरूरत है।
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