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पाक सीमा की सीलबंदी में अनेक चुनौतियां भी

इंडो-पाक बोर्डर को सील करने के लिए दो साल का टाइम बॉन्ड एक्शन प्लान तैयार किया गया है।

पाक सीमा की सीलबंदी में अनेक चुनौतियां भी
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पाकिस्तान से लगातार हो रही आतंकी घुसपैठ को रोकने के लिए भारत-पाक सीमा को 2018 तक पूरी तरह सील करने का लक्ष्य सकारात्मक है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में चार सीमावर्ती राज्य सरकारों और आला पुलिस व सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान बताया है कि इंडो-पाक बोर्डर को सील के करने के लिए दो साल का टाइम बॉन्ड एक्शन प्लान तैयार किया गया है। सरकार ने बॉर्डर सिक्यॉरिटी ग्रिड बनाने का कॉन्सेप्ट भी तैयार किया है।
जिसमें पाक की सीमा से लगे चारों राज्यों- जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात का सहयोग लिया जाएगा। ये राज्य इस ग्रिड को अपने इनपुट देंगे, जिसके हिसाब से जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जो भी शिकायतें दर्ज कराएंगे, राज्यों को उन पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। दरअसल, एलओसी पर भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के साथ जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्य राजस्थान, पंजाब, जम्मू कश्मीर और गुजरात के सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को हाई प्रायोरिटी पर रखना जरूरी है।
इन्हीं सीमाओं से आतंकियों का घुसपैठ अधिक होता है। पाक फौज भी सीमावर्ती क्षेत्र में लगातार सीजफायर का उल्लंघन करते रहते हैं। इन सीमाओं के जरिये ड्रग्स और जाली नोट की तस्करी भी होती है। खासकर पंजाब और राजस्थान की सीमा से। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या भारत-पाक सीमा को सील करना व्यवहारिक रूप से इतना सरल है? भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा करीब 3 हजार 323 किलोमीटर लंबी है जिसमें से 1225 किलोमीटर हिस्सा एलओसी सहित जम्मू-कश्मीर में, 1 037 किलोमीटर राजस्थान में, 553 किलोमीटर पंजाब में और 508 किलोमीटर गुजरात में पड़ती है।
इनमें एलओसी समेत जम्मू-कश्मीर के साथ पाक से लगते सीमा क्षेत्र बेहद दुरुह है। इस सीमा क्षेत्र में ऊंचे-ऊंचे दुर्गम पहाड़ हैं, घने जंगल हैं, उफनाती नदियां हैं, ऊबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते हैं। ऐसे क्षेत्र में पूर्ण बाड़बंदी आसान नहीं होगी। की भी गई तो उसे घुसपैठ प्रूफ बनाना थोड़ा कठिन है। गुजरात से लगते सीमा क्षेत्र में थल से अधिक जलीय सीमा है। जल क्षेत्र से सटे तटीय क्षेत्र में सीमा सील कैसे हो सकेगी। ऐसे कई सवाल हैं, जिस पर सरकार को गौर करना होगा।
आइडिया यह भी है कि सीमा पर जहां बाड़बंदी संभव नहीं है, वहां लेजर बीम से सीमा को सील किया जाएगा। लेजर बीम घुसपैठ रोकने में कितना उपयोगी है, इस सवाल को भी प्लान बनाते वक्त सरकार को एड्रेस करना होगा। ऐसा नहीं है कि अभी भारत-पाक सीमा पर बाड़बंदी नहीं है, अभी भी सीमा सील है। फिर भी सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ हो रही है। ड्रग्स और नकली नोटों की तस्करी भी हो रही है। इधर हाल में जम्मू-कश्मीर सीमा क्षेत्र में एलओसी पार से आतंकियों की घुसपैठ कुछ ज्यादा ही बढ़ी है।
पाकिस्तान में आतंकी गुटों का पूरा नेटवर्क है, जो भारत में तबाही मचाने के लिए फिदायीन की फौज तैयार करते हैं और उन्हें पाक फौज व आईएसआई की मदद से भारत भेजते हैं। पाक यह छद्म युद्ध भारत से वर्षों से लड़ रहा है। इसी कड़ी में ही सरकार ने पाक सीमा सील करने के एक्शन प्लान तैयार किया है। लेकिन रणनीतिकारों को सीमा सील से संबंधित सभी प्रकार की चुनौतियों को पार करना होगा। इजराइल ने भी फिलिस्तीन से सटी सीमा को पूर्ण रूप से सील किया हुआ है। हम इजराइल के अनुभव का लाभ ले सकते हैं। हम जैसे भी करें, सीमा सील को फुलप्रूफ बनाएं।
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