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पाकिस्तान को भारत की चेतावनी, संघर्ष विराम उल्लंघन का मिलता रहेगा करारा जवाब

पाकिस्तान की ओर से लगातार भीषण गोलीबारी की जा रही है जिसके चलते सीमा के पास रहने वाले करीब 40 हजार लोगों को अपना घर-बार छोड़ कर सुरक्षित जगहों पर पलायन करना पड़ा है।

पाकिस्तान को भारत की चेतावनी, संघर्ष विराम उल्लंघन का मिलता रहेगा करारा जवाब

कश्मीर सीमा पर पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहा है। पिछले साल 2017 में पाकिस्तान की फौज ने करीब 841 बार सीजफायर तोड़ा था। इस साल भी अनेक बार वह संघर्ष विराम तोड़ चुका है। पिछले चार दिनों से पाकिस्तान की ओर से लगातार भीषण गोलीबारी की जा रही है। जिसके चलते सीमा के पास रहने वाले करीब 40 हजार लोगों को अपना घर-बार छोड़ कर सुरक्षित जगहों पर पलायन करना पड़ा है।

18 हजार की आबादी वाला अरनिया कस्बा वीरान नजर आता है। पाकिस्तान की गोलीबारी के चलते सीमा पर खेती, स्कूली शिक्षा, मवेशी पालन समेत सभी जरूरत के कार्य बाधित हो गए हैं। जमीन पर खून के निशानों, टूटी खिड़कियों, घायल जानवरों और दीवारों पर छर्रे के निशानों से बस्तियों में तबाही का मंजर साफ नजर आता है। यह पाकिस्तान का घृणित चेहरा है जो अंतरराष्ट्रीय सैन्य नियमों का भी पालन नहीं कर रहा है।

उसके मुताबिक नागरिकों पर सैन्य कार्रवाई वर्जित है। पाकिस्तान अगर यूं ही संघर्ष विराम तोड़ता रहेगा, तो भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देता रहेगा। पाक को उसी की भाषा में सैन्य जवाब देना जरूरी भी है, लेकिन पाकिस्तान समझें कि सीमा पर शांति जरूरी है। शांति सैन्य अभियान से संभव नहीं है। भारत पिछले करीब 40 साल से पाकिस्तान के आतंकवाद और करीब 70 साल से उसकी दुश्मनी को झेल रहा है।

भारत के प्रति पाकिस्तान की फौज व खुफिया एजेंसी आईएसआई में इस कदर नफरत व्याप्त है कि दोनों देशों में शांति वार्ता कभी परवान नहीं चढ़ पाई है। भारत सरकार अभी भी पाकिस्तान के साथ शांति की कोशिश कर रही है। हाल ही में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की थाईलैंड में गुप्त बैठक भी हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी सत्ता में आने के समय से ही पाक से शांति कायम की कोशिश कर रहे हैं,

लेकिन पाकिस्तान भारत के खिलाफ न ही आतंकवाद बंद कर रहा है, न ही सीजफायर तोड़ना बंद कर रहा है और न ही कूटनीतिक कोशिश में साथ निभा रहा है। भारत की एकमात्र मांग है कि पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद बंद करे, तो वह शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाक आतंकवाद की राह छोड़ने को तैयार नहीं है।

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड ग्लोबल आतंकी हाफिज सईद के प्रति लचीला रुख के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि धूमिल हो रही है, आतंकी गुट जैश के मुखिया मसूद अजहर, हिज्बुल के सरगना सैयद सलाहुद्दीन समेत करीब 32 आतंकी गुटों के लोगों को पाकिस्तान सरकार संरक्षण दी हुई है। सवाल है कि आखिर कब तक? पाकिस्तान यूं ही आतंकवाद को पनाह देता रहेगा? आतंकी भारत भेजता रहेगा? सीमा पर सीजफायर तोड़ता रहेगा?

भारत जब भी कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ता है, घाटी से आतंकियों का सफाया करता है, पाकिस्तान की ओर से सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन तेज हो जाता है। भारत कश्मीर में शांति के लिए वार्ता और सैन्य ऑपरेशन साथ-साथ कर रहा है पर पाकिस्तान हमेशा इस कोशिश में रहता है कि कश्मीर में अशांति रहे, एसओसी पर अशांति रहे, ताकि वैश्विक मंच पर भारत को बदनाम किया जा सके।

हालांकि पाकिस्तान का यह पैतरा नाकाम हो चुका है और उसकी पोल खुल चुकी है। दुनिया जान गई है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पनाहगाह देश है। आतंकवाद पर पाक को संयुक्त राष्ट्र से चेतावनी मिल चुकी है, अमेरिका लगातार आतंक के खत्मे के लिए कह रहा है, ट्रंप प्रशासन ने पाक की मदद तक रोक दी है, इसके बावजूद वह सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय 2003 में भारत व पाक ने सीमा पर संघर्ष विराम रखने का समझौता किया था, लेकिन 15 वर्षों में पाक ने हजारों बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। इस वक्त भारत और पाक दोनों सरकारों को सीमा पर संघर्ष विराम कायम रखने की कोशिश करनी चाहिए। दोनों देशों को सीमा पर युद्ध जैसे हालात से बचना चाहिए। दोनों देशों को अवाम की तरक्की को प्राथमिकता बनाना चाहिए इसलिए दोनों देशों को कश्मीर में सीमा पर शांति बहाली का प्रयास करना चाहिए।

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