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मानव विकास के मामले में भारत अभी भी पीछे

यूएनडीपी की पूरी रिपोर्ट बताती है कि मानव विकास के मामले में देश की स्थिति अभी भी ठीक नहीं

मानव विकास के मामले में भारत अभी भी पीछे
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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी वर्ष 2015 के मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट में भारत 188 देशों की सूची में पांच पायदान ऊपर उठकर 130वें स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले यह 135वें स्थान पर था। पिछली रिपोर्ट के मुकाबले एक-दो क्षेत्रों (औसत जीवन-काल व सामाजिक सुरक्षा) में हालात सुधरने के कारण कुछ अंकों का फायदा होने से भारत ऊपर उठने में सफल हुआ है, लेकिन यूएनडीपी की पूरी रिपोर्ट बताती है कि मानव विकास के मामले में देश की स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न कसौटियों पर कसने के बाद मानव विकास के मामले में भारत सिर्फ 0.609 अंक ही हासिल कर पाया है, जो कि वैश्विक औसत से काफी नीचे है। अभी वैश्विक औसत अंक 0.630 निर्धारित किया गया है।

दरअसल, यूएनडीपी दुनिया भर के देशों के नागरिकों में विभिन्न स्तरों पर हुई गुणात्मक प्रगति को मापता है, इसके लिए वह एक सूचकांक का प्रयोग करता है जिसे मानव विकास सूचकांक कहा गया है। यूं तो इसे तीन मानदंडों पर तैयार किया जाता है जिसमें देश की आबादी का औसत जीवन-काल, बच्चों व वयस्कों के लिए शिक्षा के अवसर और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय को शामिल किया जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई दूसरे पहलुओं पर निगाह डाली जाती है। जैसे कि लैंगिक समानता के मामले में भारत अभी बहुत पिछड़ा हुआ है।
यहां हर मोर्चे पर पुरुषों और महिलाओं में गैरबराबरी देखी जा सकती है। इस रिपोर्ट में भी जिक्र किया है कि भारत के संसद में मात्रा 12.2 फीसदी ही महिला प्रतिनिधि हैं। वहीं अभी तक केवल 27 फीसदी महिलाएं ही माध्यमिक स्तर की शिक्षा हासिल कर सकी हैं। इसी तरह गरीबी और कुपोषण आजादी के छह दशक बाद भी मुंह चिढ़ा रहे हैं। यूएनडीपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की आधी से अधिक यानी 55.3 फीसदी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इसी तरह बच्चों और महिलाओं में कुपोषण के आंकड़े भी कुछ अच्छे नहीं हैं।
जब नागरिकों के उत्थान की बात आती है तो भारत इन बिदुओं पर पिछड़ जाता है। इस मामले में भारत अपने कई पड़ोसी देशों से भी पीछे है। इस प्रकार जहां इतनी असमानता, गरीबी, कुपोषण हो, वहां मानव विकास के मोर्चे पर देश की बेहतर छवि की उम्मीद नहीं की जा सकती। यूएनडीपी की ताजा रिपोर्ट में हालात को सुधारने का रास्ता सुझाया गया है। उसकी ओर से कहा गया है कि मानव विकास बहुत हद तक इस पर निर्भर करता है कि आबादी क्या और किस प्रकार का काम करती है। अर्थात वे कार्य जिससे मानव जीवन को गरिमा मिलती है, वे मानव विकास में भी सहायक होते हैं।
वहीं जो कार्य मानव जीवन की गरिमा को भंग करते हैं, वे मानव विकास में भी बाधा बनते हैं। इसके अलावा इंटरनेट ने आज मानवजीवन को जिस कदर प्रभावित किया है, उनके विकास पर बल दिया है, उसे देखते हुए यूएनडीपी ने सभी सरकारों को इसे अपनी नीतियों में शामिल करने का सुझाव दिया है। इस प्रकार मानव विकास सूचकांक पर यूएनडीपी ने अपनी नई रिपोर्ट में एक नया दृष्टिकोण रखा है जिस पर भारत सहित सभी देशों को विचार करना चाहिए व अपनी सोच-समझ के मुताबिक मानव विकास पर शुरू हुई इस बहस को आगे बढ़ाना चाहिए।
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