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वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पर चमक रहा है भारत

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कई नीतिगत सुधारों और विदेशी व घरेलू निवेशकों में अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पर चमक रहा है भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लगार्ड को ग्लोबल अर्थव्यवस्था के धुंधले आसमान में भारत एक चमकता हुआ सितारा लग रहा है तो इसकी वजहें भी हैं। दरअसल, केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कई नीतिगत सुधारों और विदेशी व घरेलू निवेशकों में अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है वहीं अगले वित्त वर्ष में इसके 7.5 फीसदी के आसपास रहने की उम्मीद व्यक्त की गई है। जाहिर है, भारत विकास के मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व की सबसे तेज रफ्तर वाली अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
वहीं अमेरिका को छोड़ दें तो तमाम यूरोपीय देशों सहित रूस, जापान आदि देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी रेंगने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बीते दिनों विश्व बैंक ने भी अपनी रिपोर्ट में माना था कि भारत में हालात तेजी से सुधर रहे हैं। पिछली यूपीए सरकार की नीतियों के कारण देश में मंदी जैसे हालात पैदा हो गए थे। सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किए गए आर्थिक और नीतिगत पहलों से देश में निराशा का माहौल खत्म हुआ है। उपभोक्ताओं व निवेशकों में आशा का संचार हुआ है। जिससे बाजार में माहौल बेहतर हुआ है। परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। केंद्र में तीन दशक बाद किसी सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला है, उससे भी तेजी से फैसले लेने आसान हुए हैं। इस बार के रेल बजट, आर्थिक सर्वेक्षण और आम बजट में इसकी स्पष्ट छाप देखी जा सकती है। मसलन रक्षा क्षेत्र व बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई है और रेलवे को भी विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया गया है। अब विदेशी निवेशक ढांचागत विकास में सौ फीसदी पूंजी लगा सकते हैं। कारोबार को आसान बनाने तथा श्रम बाजार को और लचीला बनाने की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। सरकारी तत्परता के कारण महंगाई नियंत्रण में है। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के उपाय किए गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया मुहिम चलाई गई है। गरीबों, वंचितों और किसानों की सामाजिक सुरक्षा व उत्थान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। और कर विवादों को दूर करने के लिए खास व्यवस्था बनाने पर काम हो रहा है। अब सरकार के एजेंडे में गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को जल्द लागू करना हैै।
नई कर व्यवस्था केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग परोक्ष करों की जगह लेगी, जिससे व्यापार जगत को बड़ी सहूलियत होगी। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश गया है। वहीं अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने का फायदा भारत को मिल रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी संभावनाएं हैं, जिसको प्राप्त करने के लिए मोदी सरकार को सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाते रहना होगा। हालांकि मोदी सरकार तमाम सुधारों को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध दिखती है। और उन पर आगे भी बढ़ रही है जिससे आने वाले दिनों में और बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
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