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मलेशिया के नए पीएम पर होगी भारत की नजर

मलेशिया के नए प्रधानमंत्री के रूप में रविवार को अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में इस्माइल साबरी याकूब ने महामारी से निपटने और अर्थव्यवस्था को पुनर्बहाल करने में विपक्ष समेत सबको साथ लेकर चलने की बात कही है। उनके इस कथन से लग रहा है कि वे अपने से पहले की सरकारों की गलतियां नहीं दोहराएंगे।

मलेशिया के नए पीएम पर होगी भारत की नजर
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना महामारी से बेहाल और डांवाडोल अर्थव्यवस्था वाले देश मलेशिया के नए प्रधानमंत्री के रूप में रविवार को अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में इस्माइल साबरी याकूब ने महामारी से निपटने और अर्थव्यवस्था को पुनर्बहाल करने में विपक्ष समेत सबको साथ लेकर चलने की बात कही है। उनके इस कथन से लग रहा है कि वे अपने से पहले की सरकारों की गलतियां नहीं दोहराएंगे। अभी मलेशिया में कोरोना के दौरान सात माह के आपातकाल और लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण से मौतों का आंकड़ा आसमान छू रहा है। पिछली सरकारों की अस्थिर नीतियों के चलते मलेशिया में महंगाई दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। 61 वर्षीय याकूब पर समस्याओं से जूझते मलेशिया को संकट से उबारने की जिम्मेदारी होगी, इसके लिए उन्हें भारत के सहयोग की जरूरत होगी। 2018 के बाद मलेशिया में दो बार सरकार बदली है। याकूब के पूर्ववर्ती मुहयुद्दीन यासीन सरकार के दौरान भारत व मलेशिया के संबंधों में गमजोशी आई थी।

यासीन से पहले मलेशिया के प्रधानमंत्री रहे महातिर मोहम्मद की सरकार के समय उनके जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने और नागरिकता कानून पर विवादित टिप्पणी करने के चलते भारत से संबंध खराब हो गए थे। महातिर के पाक परस्त इस्लामिक बयानों से भारत असहज था। भारत की गुज़ारिश के बावजूद महातिर ने जाकिर नाइक को यह कहकर भारत भेजने से मना कर दिया था कि वहाँ उसकी जान को खतरा हो सकता है। वर्ष 2011 में दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि और वर्ष 2012 में आपराधिक मामलों में एक-दूसरे की कानूनी सहायता संबंधी समझौता होने के बावजूद मलेशिया ने जाकिर नाइक को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया था। इन सबके चलते दोनों मुल्कों में संबंध इतने खराब हो गए थे कि भारत ने मलेशिया से पाम ऑयल का आयात बंद कर दिया था।

भारत हर साल लगभग 90 लाख टन पाम तेल आयात करता है, जो मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात होता है। भारत मलेशिया के पाम आयल का सबसे बड़ा खरीदार देश है। भारत और मलेशिया के बीच कुल 17.2 बिलियन डॉलर का व्यापार है, जिसमें से भारत 10.8 बिलियन डॉलर का आयात करता है। आयात बंद होने से मलेशिया की आर्थिक कमर टूट गई थी। भारत ने मलेशिया के संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में मलेशिया अकेला ऐसा दक्षिण-पूर्वी देश था जिसने न सिर्फ खुलकर भारत का साथ दिया था, बल्कि भारत को युद्ध में सहायता देने के लिये एक आर्थिक कोष की भी स्थापना की थी। भारत ने भी वर्ष 1965 में इंडोनेशिया-मलेशिया विवाद में मलेशिया का साथ दिया था। इसके चलते भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में खटास आ गई थी।

शीत युद्ध के दौरान दोनों ही देश गुटनिरपेक्ष देशों के दल के साथ रहे। एक मुस्लिम बहुल देश होने और पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद महातिर के शासनकाल तक मलेशिया और भारत के संबंध मधुर बने रहे। मलेशिया मोदी सरकार के 'एक्ट ईस्ट नीति'के केंद्र में है। मलेशिया आसियान समूह का भी सदस्य है व भारत के आसियान देशों से अच्छे संबंध हैं। सामरिक दृष्टि से मलेशिया भारत के लिए अहम है। मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 24 लाख लोग हैं जो वहाँ की कुल जनसंख्या का 8 प्रतिशत हैं। भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग के कई समझौते हैं, इनमें मलेशिया-इंडिया कोम्प्रेहेंसिवे इकॉनोमिक को-ऑपरेशन एग्रीमेंट (2011) और इनहेंस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (2016) प्रमुख हैं। राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक स्तंभों पर भारत और मलेशिया का आपस में सहयोग काफी अहम है। अब देखने वाली बात होगी कि नए पीएम याकूब भारत के साथ अपने देश के संबंधों को कैसे आगे ले जाते हैं। इस पर भारत की नजर तो रहेगी ही।

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