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भारत ने तोड़ी आतंकवाद की कमर, पाकिस्तान को विश्व में किया बेनकाब

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई किसी मजहब के खिलाफ नहीं है।

भारत ने तोड़ी आतंकवाद की कमर, पाकिस्तान को विश्व में किया बेनकाब
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आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई किसी मजहब के खिलाफ नहीं है। यह भारत की नीति में मुखरता से स्पष्ट है। आतंकवाद में शामिल लोगों का मजहब से कोई नाता भी नहीं है। यह अनेक आतंकवादी घटना में साबित हो चुका है। आतंकवाद अपने आप में एक विचारधारा है जो मानवता और शांति के खिलाफ है। संयोग से दुनिया इस वक्त कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से त्रस्त है।

इसके चलते इस्लाम को लेकर एक भ्रम पैदा हुआ है कि यह धर्म जिहाद के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देता है, जबकि हकीकत यह नहीं है। इस्लाम भी अन्य धर्मों की तरह अमन, भाईचारा और प्रेम का संदेश देता है। आज पूरी दुनिया कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से पीड़ित है। भारत करीब चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है।

भारत ने आतंकवाद के ग्लोबल खतरे के प्रति समूचे विश्व का ध्यान आकृष्ट किया है। इसका परिणाम है कि आज विश्व एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है। भारत में सभी धर्म के लोग अमन और भाईचारे के साथ रहते हैं। अभी हाल के दिनों से कुछ लोग प्रचारित कर रहे हैं कि भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई धर्म विशेष को लक्षित है, लेकिन यह सच नहीं है।

इस्लामिक हेरिटेज पर आयोजित सम्मलेन में इस्लाम के मूर्धन्य विद्वानों और जॉर्डन के नरेश शाह अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के खिलाफ मुहिम किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। मजहब का मर्म अमानवीय नहीं हो सकता। कट्टरपंथी ये नहीं जानते हैं कि जिस धर्म के नाम पर वह लड़ाई लड़ने की बात करते हैं वो उसी धर्म का नुकसान कर रहे हैं।

दरअसल धर्म के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों ने इस्लाम को ही बदनाम किया है, उसको ही नुकसान पहुंचाया है। कट्टरपंथियों की वजह से ही आज मुसलमानों को शक की नजर से देखा जाता है। अमेरिका ने तो छह मुस्लिम देशों के नागरिकों को अपने यहां आने पर रोक लगा दी है। इंसानियत के खिलाफ दरिंदगी करने वाले ये नहीं जानते कि ऐसा करने से इस्लाम का भी नुकसान हो रहा है।

जॉर्डन नरेश ने भी कहा कि विश्वभर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई मुस्लिम या किसी भी धर्म को टारगेट नहीं करती है। ये लड़ाई उदारवादियों और कट्टरपंथ की सोच के बीच है। पैगंबर मोहम्मद ने दया और मानवता पर जोर दिया है, धर्म सभी से प्रेम करना सिखाता है, विश्व में कट्टरपंथ का उभार चिंता का विषय है।

मानवीयता और इंसानियत ही दुनिया की बुनियाद है। सऊदी अरब के नेतृत्व में 32 मुस्लिम बहुल देशों ने भी आतंकवाद के खात्मे के लिए मुहिम छेड़ी है। आतंकवाद के खिलाफ आज विश्व को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। इसको मजहब से जोड़कर कदापि नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि धार्मिक विद्वानों को कट्टरपंथ के खिलाफ पैगाम देना चाहिए, इससे ही आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है।

इस्लाम की कट्टर छवि को सुधारे जाने की जरूरत है और इसे मिलकर करना चाहिए। जेहाद के नाम पर आतंकवाद से इस्लाम का ही नुकसान हो रहा है। हमें शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की भावना से दुनिया को विकसित करना होगा।

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