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चीन को भारत का कूटनीतिक जवाब

भारत की ओर से कहा गया है कि हम भी दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज भेजने या उसके ऊपर उड़ान भरने को आजाद हैं।

चीन को भारत का कूटनीतिक जवाब

अमेरिका के बाद भारत ने भी चीन की दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में तानाशाही को चुनौती दिया है। अमेरिका ने पिछले हफ्ते दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज भेजा था जिस पर चीन ने कड़ा ऐतराज जताया था। अब भारत की ओर से कहा गया है कि हम भी दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज भेजने या उसके ऊपर उड़ान भरने को आजाद हैं। दूसरी ओर भारत और फिलीपींस के विदेश मंत्री के स्तर पर हुए एक समझौते में दक्षिण चीन सागर को पश्चिम फिलीपींस सागर के नाम से बुला गया है।

कहा जा रहा है कि यह पहली बार है कि जब विवादित दक्षिण चीन सागर के मामले में भारत ने इतना सख्त रुख अख्तियार किया है। दरअसल, केंद्र सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि वह इलाका फ्रीडम ऑफ नेविगेशन के दायरे में आता है। दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर चीन के दावे को खारिज करने के पीछे भी देश की यही सोच रही है। साथ ही इस इलाके के अधिकार को लेकर विवाद का हल इंटरनेशनल कानून के दायरे में निकाले जाने की सलाह देता रहा है।

दरअसल, चीन दक्षिण चीन सागर में 12 समुद्री मील इलाके पर हक जताता है। चीन के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया भी इस इलाके पर अपना दावा जताते हैं। समस्या तब शुरू हुई जब चीन ने उनके दावे को दरकिनार कर कहने लगा कि उस क्षेत्र पर सिर्फ उसका अधिकार है। चीन यहां मिलिट्री एक्टिविटीज भी बढ़ा रहा है।

एक स्वतंत्र इलाके पर कब्जा जमाने की चीन की कुटिल मंशा उजागर होने के बाद से ही सभी देश उसका विरोध कर रहे हैं। विरोध स्वरूप उसे चुनौती देते हुए इस इलाके में आवाजाही करने की बात कर रहे हैं। इस वजह से इस क्षेत्र में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के कई विशाल भंडार दबे हुए हैं।

अमेरिका के मुताबिक 213 अरब बैरल तेल यहां मौजूद है। 900 ट्रिलियन घन फीट नेचुरल गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार किया जाता है। यह क्षेत्र सामरिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से मायने रखता है। ऐसे में चीन की मंशा है कि यदि उसका इस पर अधिकार हो जाएगा तो दुनिया के व्यापारिक मार्ग पर पकड़ मजबूत हो जाएगी।

साथ ही हिंद महासागर में उसका प्रभाव बढ़ जाएगा। भारत का 55 फीसदी समुद्री कारोबार इसी रास्ते से होता है। चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत स्वतंत्र या दूसरे देशों के क्षेत्रों को हड़पने की कोशिश में लंबे अरसे से लगा हुआ है। एक जमाने में स्वतंत्र देश रहे तिब्बत को अपने अधीन कर लिया है। भारत के बहुत बड़े हिस्से पर वह अपना दावा जताता आ रहा है। वह देश को चारों ओर से घेरने की भी पूरजोर कोशिश कर रहा है।

हालांकि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से श्रीलंका सहित कई पड़ोसी देशों में उसकी कोशिशों को धक्का पहुंचा है, लेकिन पाकिस्तान और इन दिनों नेपाल पर उसका प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। नेपाल आजकल उसी की भाषा बोलता प्रतीत हो रहा है। ऐसे में दक्षिण चीन सागर पर उसके अधिकार को लेकर भारत का सख्त रुख चीन को उसी की भाषा में जवाब देने जैसा है।

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