Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

भारत-चीन के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलना जरूरी

भारत और चीन के बीच रिश्तों में जमी बर्फ का पिघलना जरूरी है। यह दोनों ही देशों के हित में है। डोकलाम के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ रहे संवाद के सिलसिले को सकारात्मक देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीनी शहर वुहान जाने से लेकर चीनी रक्षा मंत्री के भारत आने तक दोनों देशों के बीच वार्ता के कई दौर हो चुके हैं।

भारत-चीन के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलना जरूरी
X

भारत और चीन के बीच रिश्तों में जमी बर्फ का पिघलना जरूरी है। यह दोनों ही देशों के हित में है। डोकलाम के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ रहे संवाद के सिलसिले को सकारात्मक देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीनी शहर वुहान जाने से लेकर चीनी रक्षा मंत्री के भारत आने तक दोनों देशों के बीच वार्ता के कई दौर हो चुके हैं।

हालांकि भारत के संदर्भ में चीन भरोसेमंद नहीं रहा है, लेकिन दूसरी सच्चाई यह भी है कि 1962 के विश्वासघात के बाद चीन व भारत के बीच सीमा पर एक भी गोली नहीं चली है। सीमा पर कई बार तनाव रहा है, विभाजन रेखा को लेकर मान्यता में फर्क रहा है, इसके बावजूद दोनों मुल्कों के सैनिक शांत रहे हैं। वर्तमान में वैश्विक शक्ति संतुलन बदल चुका है।

न ही अब शीत युद्ध का दौर है और न ही अमेरिकी बादशाहत बची है। इस वक्त कोई भी मुल्क सामरिक युद्ध में नहीं उलझना चाहता है, सभी देशों के बीच ग्लोबल ट्रेड में अधिक से अधिक हिस्सेदारी को लेकर होड़ है, जिसमें विवाद व युद्ध की कोई जगह नहीं है। सभी देशों की प्राथमिकता वैश्विक व्यापार है। वैश्विक कूटनीति ट्रेड के ईर्द-गिर्द तय हो रही है। भारत और चीन दोनों भलीभांति इस तथ्य को समझते हैं।

इसलिए सीमा विवाद के बावजूद दोनों देश अपने संबंधों को मधुर करने में जुटे हुए हैं। चीन के रक्षा मंत्री वी फेंघे का भारत दौरा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अब दोनों देश डोकलाम जैसी स्थिति से बचना चाहते हैं और परस्पर विश्वास बढ़ाना चाहते हैं। दरअसल, अमेरिका के साथ ट्रेड वार शुरू होने से चीन के पास बहुत विकल्प नहीं है।

भारत तेजी से उभरता हुआ बाजार है, इसलिए वह भारत से दूर रहकर ग्लोबल आर्थिक अवसर से वंचित नहीं रहना चाहता है। चीन की हरसंभव कोशिश है कि विवादों को दरकिनार कर भारत के संबंधों को प्रगाढ़ किया जाय। चीनी मल्टीनेशनल कंपनियों का भी चीन सरकार पर दबाव है कि वह भारत के तनाव नहीं रखे। यही कारण है कि चीन ब्रह्मपुत्र का बाढ डाटा भारत को देने पर राजी हुआ, गैर बासमती चावल के आयात को अनुमति दी।

भारत को इस मौके को अपने हित में इस्तेमाल करना चाहिए। पहले तो भारत को चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। फिर चीन के साथ सभी सीमा विवाद को हल करने की दिशा में कूटनीतिक पहल तेज करनी चाहिए। भारत व चीन के बीच ट्रेड बढ़ेगा व शांति कायम होगी तो पाकिस्तान पर शांति के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा। इस वक्त पाकिस्तान की नई सरकार भी आतंकवाद को मिटाने की चाहत रखती है।

चीन को साध कर भारत पाकिस्तान को आतंकवाद के खात्मे के लिए विवश कर सकता है। इसके लिए भारत व चीन के बीच निरंतर संवाद जरूरी है। अब सभी एशियाई देशों को शांति के बारे में सोचना चाहिए और उसे यूरोपीय व अमेरिकी निर्भरता कम करना चाहिए। भारत, चीन और जापान एशिया का नेतृत्व कर सकते हैं, इसके लिए तीनों में परस्पर विश्वास, सहयोग और समन्वय जरूरी हैं।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top