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जैव ईंधन से विमान उड़ाना बड़ी उपलब्धि

जैव ईंधन से विमान उड़ा कर भारत ने अपने दम पर फ्यूल तकनीक में नया कीर्तिमान रचा है। भारत ने अक्सर दिखाया है कि जब भी उसे किसी तकनीक को लेकर चुनौती मिली है या विकसित देशों के भेदभाव का सामना करना पड़ा है, तो उसने आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी विकसित की है।

जैव ईंधन से विमान उड़ाना बड़ी उपलब्धि

जैव ईंधन से विमान उड़ा कर भारत ने अपने दम पर फ्यूल तकनीक में नया कीर्तिमान रचा है। भारत ने अक्सर दिखाया है कि जब भी उसे किसी तकनीक को लेकर चुनौती मिली है या विकसित देशों के भेदभाव का सामना करना पड़ा है, तो उसने आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी विकसित की है। विमान ईंधन के बारे में भी ऐसा ही हुआ है।

अपने पेट्रोलियम वैज्ञानिकों की अथक मेहनत से भारत बायो फ्यूल से विमान उड़ाने वाला पहला विकासशील देश बन गया है। एशिया में चीन व जापान ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। केवल कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने बायो फ्यूल से विमान उड़ाया है। अब भारत चौथा देश बन गया है।

इस साल की शुरुआत में दुनिया की पहली बायोफ्यूल फ्लाइट ने लॉस एंजेलिस से मेलबर्न के लिए उड़ान भरी थी और भारत ने भी इसी साल यह कारनामा कर दिखाया। जब 75 फीसदी एयर टर्बाइन फ्यूल के साथ 25 फीसदी बायो फ्यूल की मात्रा से देहरादून से नई दिल्ली के लिए स्पाइस जेट के 78 सीटर विमान की 45 मिनट की सफल उड़ान पूरी हुई तो यह भारतीय विमानन उद्योग के लिए गौरव का क्षण था।

जैव ईंधन से विमान उड़ाने की लागत में 20 फीसदी की कमी आ सकती है। केंद्र सरकार अपनी उड़ान योजना से जिस तरह घरेलू विमानन उद्योग को बढ़ावा दे रही है, उसमें सस्ते ईंधन मददगार साबित हो सकता है। भारत ने जट्रोफा (रतनजोत) से बायो फ्यूल बनाया है। 2012 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) ने कनाडा की मदद से कनाडा में ही बायोफ्यूल से उड़ान का सफल प्रयोग किया था,

लेकिन इस बार भारत ने अपने दम पर सफलतापूर्वक प्रयोग पूरा किया। 2012 में ही पेट्रोलियम विज्ञानी अनिल सिन्हा ने जट्रोफा के बीज के कच्चे तेल से बायोफ्यूल बनाने की टेक्नोलॉजी का पेटेंट कराया। जैव ईंधन से उड़ान परीक्षण के लिए पहले किंगफिशर ने रुचि दिखाई थी, लेकिन अपने घाटे की वजह से वह पीछे हट गई। फिर जेट एयरवेज, एयर इंडिया व इंडिगो ने दिलचस्पी दिखाई,

लेकिन आखिर में स्पाइस जेट तैयार हुई। एयरलाइंस इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने लक्ष्य रखा है कि विमानन इंडस्ट्री से पैदा होने वाले कॉर्बन को 2050 तक 50 प्रतिशत कम किया जाए। कुल कार्बन डाई ऑक्साइड एमिशन में एयर ट्रैवल की भूमिका 2.5% है, जो अगले 30 साल में चार गुना तक बढ़ सकती है।

बायोफ्यूल के इस्तेमाल से एविएशन क्षेत्र में उत्सर्जित होनेवाले कार्बन को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। बायोफ्यूल जट्रोफा, सब्जी के तेलों, रिसाइकल ग्रीस, काई, जानवरों के फैट आदि से बनता है। भारत में 400 किस्म के बीजों से बायोफ्यूल बन सकता है। देश अपने अधिक से अधिक बंजर जमीन का इस्तेमाल कर जट्रोफा की खेती कर सकता है।

देश में 400 लाख हेक्टेयर जमीन बंजर की श्रेणी में है। जैव ईंधन के अधिक से अधिक इस्तेमाल से किसानों की आय बढ़ेगी और इसके आयात पर निर्भरता कम होगी। देश में बायोफ्यूल का आयात तेजी से बढ़ रहा है। यह 2013 में 38 करोड़ लीटर से 2017 में 141 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।

ईंधन में बायो फ्यूल और एथनॉल के अधिक प्रयोग से कच्चे तेल पर भी भारत की निर्भरता कम होगी। भारत का लक्ष्य स्वच्छ ईंधन के प्रयोग को बढ़ावा देना है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण हो सके। जैव ईंधन इसमें भी मददगार होगा।

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