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भारत और अफ्रीका अहम साझीदार बनकर उभरेंगे

नरेंद्र मोदी की चार अफ्रीकी देशों की पांच दिवसीय यात्रा से भारत के साथ उनके रिश्ते और मजबूत होंगे।

भारत और अफ्रीका अहम साझीदार बनकर उभरेंगे

भारत और अफ्रीकी देशों के बीच हमेशा मधुर संबंध रहे हैं। इसकी वजह भी है। दक्षिण अफ्रीका महात्मा गांधी की कर्मभूमि रहा है। इस देश की आजादी में गांधी की बड़ी भूमिका रही है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला गांधी से बेहद प्रभावित नेता थे और हमेशा सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले। इसके अलावा इतिहास में भी भारत और अधिकांश अफ्रीकी देश ब्रिटिश हुकूमत के औपनिवेशिक काल को झेला है, सहा है।

इस मायने से भारत और अफ्रीकी देशों के बीच काफी ऐतिहासिक निकटता है। आज भी भारत और कई अफ्रीकी देश राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं। इसलिए निश्चित ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार अफ्रीकी देशों की पांच दिवसीय यात्रा से भारत के साथ उनके रिश्ते और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री ने खुद कहा भी है कि मेरी यात्रा का मकसद अफ्रीकी महाद्वीप से भारत के आर्थिक व सांस्कृतिक रिश्ते को प्रगाढ़ करना है।

यात्रा के पहले पड़ाव मोजाम्बिक के साथ लंबे समय तक दालों की खरीद, युवा व खेल क्षेत्र में करार कर पीएम ने साफ संकेत दिया है कि भारत की विकास यात्रा में अफ्रीका महाद्वीप की बड़ी भूमिका है। मोदी ने मोजाम्बिक को हमेशा साथ देने का भरोसा दिया है। पीएम इसके बाद दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और केन्या जाएंगे। ये सभी देश खनिज संपदा से भरपूर हैं। इन देशों के साथ भारत के पास हाइड्रोकार्बन, समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, कृषि एवं खाद्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भरपूर अवसर है। मोदी की इस यात्रा का कूटनीतिक महत्व भी है।

यूरोप, दक्षिण अमेरिका, मध्य व पश्चिम एशिया और ऑस्ट्रेलिया को साधने के बाद लैटिन अमेरिका (उत्तरी अमेरिका) और अफ्रीका महाद्वीप में भारतीय पैठ बढ़ाना जरूरी है। इधर हाल के दिनों में चीन ने अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने शुरू किए हैं। कई अफ्रीकी देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाकर चीन ने अपना दखल बढ़ाने की कोशिश की है।

समुद्री सुरक्षा के लिहाज से मोजाम्बिक अहम देश है। भारत और मोजांबिक के बीच डायरेक्ट सामुद्रिक लिंक है। दक्षिण सागर समेत समुद्र में चीन अपना दबदबा बढ़ा रहा है। इससे देर-सबेर भारत समेत कई सीमाई देशों की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए चीन को चुनौती देने में भारत को मोजाम्बिक का साथ मददगार साबित हो सकता है।

आज भारत की कई बड़ी कंपनियां अफ्रीकी देशों में काम कर रही हैं। ऐसे में भारत और अफ्रीका के रिश्ते जितने मजबूत होंगे, आपसी कारोबार उतना ही आगे बढ़ेगा। भारत के पास रक्षा, विज्ञान और कृषि क्षेत्र में तकनीक है, जिससे वह अफ्रीकी देशों के विकास में मदद कर सकता है। यहां से भारत को बड़े स्तर पर हाइड्रोकार्बन मिल सकता है।

दक्षिण अफ्रीका भारत के साथ ब्रिक्स में सदस्य है। इसमें चीन, रूस और ब्राजील भी हैं। इसलिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के अच्छे द्विपक्षीय रिश्ते ब्रिक्स को भी फायदा पहुंचा सकते हैं। तंजानिया और केन्या छोटे देश होने के बावजूद खनिज और कृषि क्षेत्र में भारत के साथ कदमताल कर सकते हैं। कुल मिलाकर पीएम की इस यात्रा से भारत और अफ्रीका एक-दूसरे की विकास यात्रा में अहम साझेदार बन कर उभरेंगे।

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