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डाॅ. एलएस यादव का लेख : नौसेना की ताकत में इजाफा

गार्डन रिसर्च शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के अधिकारियों का दावा है कि आईएनएस कवरत्ती के स्टील्थ फीचर्स ऐसे हैं जो दुश्मन की नजरों से इसे गायब कर देते हैं। आईएनएस कवरत्ती को वर्ष 2015 में लाॅन्च किया गया था। 109 मीटर लंबे और 12.8 मीटर लंबे इस पोत को समुद्र में कभी भी तलवार की तरह आक्रमण में प्रयोग किया जा सकता है। इसका वजन 3250 टन है। इसमें चार बी डीजल इंजन लगे हैं जो 3000 किलोवाॅट की बिजली पैदा करते हैं। प्राॅपेलिंग के लिए इसमें 3888 किलोवाॅट के दूसरे डीजल इंजन भी लगे हैं। इसकी गति 25 नाॅट्स है। यह समुद्री सुरंगों का पता लगाने में सक्षम है। इसके शामिल हो जाने से नौसेना की ताकत बढ़ जाएगी।

डाॅ. एलएस यादव का लेख : नौसेना की ताकत में इजाफा
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फोटो ट्विटर

डाॅ. एलएस यादव

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारत अब सामुद्रिक क्षेत्र में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सैन्य मजबूती की इस श्रृंखला में भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुन्द नरवणे ने 22 अक्टूबर को अांध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्वदेश में निर्मित पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस आईएनएस युद्धपोत कवरत्ती को नौसेना में शामिल कर दिया। उन्होंने आईएनएस कवरत्ती को भारतीय नौसेना को सुपुर्द करते हुए कहा कि पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस यह युद्धपोत कई मायनों में बेहद खास है। इससे दुश्मन को करारा जवाब मिल सकेगा। इस युद्धपोत को नौसेना में शामिल करने का समारोह विशाखापट्टनम डाॅकयार्ड में हुआ। इस अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग आफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल एके जैन, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के अध्यक्ष और प्रबंधन निदेशक सेवानिवृत्त एडमिरल वीके सक्सेना एवं अन्य स्टाफ अधिकारी भी मौजूद थे। इस सफलता से साफ है कि भारत का युद्धपोत निर्माण उद्योग अब अत्याधुनिक हो गया है और रक्षा तैयारियों में अहम भूमिका निभा रहा है।

आईएनएस कवरत्ती को दुश्मन देशों में पनडुब्बियों का काल माना जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि यह युद्धपोत शत्रु देश के रडार की पकड़ में नहीं आता है। आईएनएस युद्धपोत कवरत्ती के नौसेना बेड़े में शामिल हो जाने से नौसेना की ताकत में काफी बढ़ोतरी हो गई है। युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती का नामकरण वर्ष 1971 में लड़े गए युद्ध में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद करवाने के लिए चलाए गए अभियानों में विशेष भूमिका निभाने वाले युद्धपोत के नाम पर किया गया है। तत्कालीन युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती अरनल क्लास का मिसाइल युद्धपोत था। आईएनएस कवरत्ती युद्धपोत को नौसेना के संगठन डायरेक्टरेट आॅफ नेवल डिजाइन ने तैयार किया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स कोलकाता के द्वारा बनाया गया है। आईएनएस कवरत्ती का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इसके सुपर स्ट्रक्चर के लिए काॅर्बन कम्पोजिट्स यूज किए गए हैं जो भारतीय शिपबिल्डिंग की एक बड़ी उपलब्धि है। इस जहाज को सभी समुद्री परीक्षणों में सफल रहने के बाद नौसेना में श्ाामिल किया गया है। कवरत्ती युद्धपोत प्रोजेक्ट-28 के तहत स्वदेश में निर्मित चार पनडुब्बी विरोधी युद्धक स्टील्थ पोत में से आखिरी युद्धपोत है। प्रोजेक्ट-28 को 2003 में मंजूरी मिली थी।

इससे पहले भारतीय नौसेना को इस तरह के तीन युद्धपोत आईएनएस कोमोर्ता वर्ष 2014 में, आईएनएस कदमत वर्ष 2016 में एवं आईएनएस किलतान वर्ष 2017 में प्राप्त हो चुके हैं। ये सभी देशी पनडुब्बी मारक लड़ाकू युद्धपोत वर्तमान में समंदर की लहरों पर देश की शान बढ़ा रहे हैं। भारतीय नौसेना का अग्रणी युद्धपोत कोमोर्ता पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस होने के साथ हवाई और सतह से किए जाने वाले हमलों से भी बचाव कर सकता है। दुश्मन की पनडुब्बियों का काल युद्धपोत कोमोर्ता पी-28 प्रोजेक्ट का पहला पोत है। इसका निर्माण एक मार्च 2006 को शुरू किया गया था और पूरा होने पर 23 अगस्त 2014 को इसका जलावतरण हुआ। यह जल थल एवं वायु क्षेत्र में हमला करने में सक्षम है। यह शत्रु की पनडुब्बियों को मारने में सक्षम है और शत्रु के रडार की पकड़ से बाहर रहता है। इसके लिए भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने एक विशेष प्रकार का इस्पात तैयार किया है। इसका कमोर्टा नाम अंडमान एवं निकोबार के एक द्वीप के नाम पर रखा गया है।

यह परमाणु, जैविक एवं रासायनिक युद्ध लड़ने में सक्षम है। इसके ऊपर तारपीडो, राॅकेट लाॅन्चर, सेंसर, रडार व सोनार लगे हैं। इसके लिए तारपीडो लाॅन्चर लार्सन एंड टुब्रो ने तैयार किया है। इसका रडार रेवती रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने तैयार किया है। यह जमीन से हवा में कम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को ले जा सकता है। इसके अलावा पानी के अंदर निगरानी और पनडुब्बीरोधी युद्धक हेलीकाप्टर ले जाने में भी पारंगत है। यह 200 किलोमीटर की दूरी से शत्रु की पनडुब्बी को खोज लेगा, इसलिए शत्रु की पनडुब्बियां भारतीय जल क्षेत्र से दूर रहेंगी। इसका वजन 3400 टन है। कोमोर्ता युद्धपोत की लंबाई 360 फीट, चौड़ाई 45 फीट, रफ्तार 46 किलोमीटर प्रति घंटा एवं रेंज 6482 किमी है। इस पर 195 नौसैनिक तैनात रह सकेंगे। इसके लिए 3800 किलोवाॅट के चार डीजल इंजन किर्लोस्कर कंपनी ने बनाए हैं। इन्हीं विषेशताओं से युद्धपोत आईएनएस कदमत व आईएनएस किलतान भी लैस हैं।

युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती को स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और सुइट से सुसज्जित किया गया है। यह शत्रु की पनडुब्बी सूंघ लेता है और उसका पीछा भी करता है। इस युद्धपोत के अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सूइट दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उचित कार्रवाई करने में सक्षम हैं। युद्धपोत में एक मध्यम श्रेणी की बंदूक, तारपीडो ट्यूब लाॅन्चर, राॅकेट लाॅन्चर और एक करीबी हथियार प्रणाली शामिल है। नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक इसकी पनडुब्बी विरोधी युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए एवं जहाज में लंबी दूरी की तैनाती के लिए पोत को एक विश्वसनीय आत्मरक्षा क्षमता प्रणाली से भी लैस किया गया है और यह लंबी दूरी के अभियानों के लिए बेहतरीन मजबूती भी रखता है। यह किसी भी परमाणु , रासायनिक और जैविक युद्ध की स्थिति से निपटने में भी सक्षम है। कहते हैं कि समुद्र की लहरों पर राज करना है तो उसकी गहराइयों का अंदाज होना अत्यन्त आवश्यक है और यदि समुद्र की सीमा के नजदीक स्थित देशों को अपने काबू में रखना है तो समुद्र की तरह बेशुमार ताकत का अंदाज होना भी अति आवष्यक है। शायद इसीलिए भारत के नए स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती को समंदर का बाहुबली कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।

कोलकाता के गार्डन रिसर्च शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के अधिकारियों का दावा है कि आईएनएस कवरत्ती के स्टील्थ फीचर्स ऐसे हैं जो दुश्मन की नजरों से इसे गायब कर देते हैं। आईएनएस कवरत्ती को वर्ष 2015 में लाॅन्च किया गया था। 109 मीटर लंबे और 12.8 मीटर लंबे इस पोत को समुद्र में कभी भी तलवार की तरह आक्रमण में प्रयोग किया जा सकता है। इसका वजन 3250 टन है। इसमें चार बी डीजल इंजन लगे हैं जो 3000 किलोवाॅट की बिजली पैदा करते हैं। प्राॅपेलिंग के लिए इसमें 3888 किलोवाॅट के वार दूसरे डीजल इंजन भी लगे हैं जो 1050 आरएमपी पर आपरेट करते हैं। समुद्र में इसकी गति 25 नाॅट्स है। यह समुद्री सुरंगों का पता लगाने और उन्हें विफल करने में सक्षम है। इसके शामिल हो जाने से नौसेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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