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इमरान खान प्रोफाइल, कोई नहीं जानता ये सीक्रेट्स

लाहौर के एक पश्तून परिवार में वर्ष 1952 में जन्में इमरान खान की शिक्षा एटकिसन कॉलेज लाहौर, बस्र्टर (ब्रिटेन) में हुई और बाद में आक्सफोर्ड से ग्रेज्युएशन किया।

इमरान खान प्रोफाइल, कोई नहीं जानता ये सीक्रेट्स

अब लगभग तय है कि पूर्व क्रिकेटर इमरान अहमद खान पाकिस्तान के पीएम-इन-वेटिंग हैं। लाहौर के एक पश्तून परिवार में वर्ष 1952 में जन्में इमरान की शिक्षा एटकिसन कॉलेज लाहौर, बस्र्टर (ब्रिटेन) में हुई और बाद में आक्सफोर्ड से ग्रेज्युएशन किया। आने वाला कल कैसा रहेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन इतना तय है कि शादियों के विवादों के अलावा ऐसा कुछ नहीं, जिस पर स्वयं इमरान व उसके समर्थकों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।

वैसे ज्यादा उम्मीदें बांधने का वक्त भी नहीं है। ऐसा नहीं लगता कि इमरान, सेना व आतंकी संगठनों के बारे में तत्काल कोई बदलाव ला सकेंगे। जब वर्ष 1992 में उसने क्रिकेट से संन्यास लिया, तब उसके खाते में 3807 रनों और 362 विकेटों की कमाई दर्ज थी। रिटायर होने से पहले ही उसने अपनी सामाजिक गतिविधि शुरू कर दी थी।

उसने अपनी कैंसरग्रस्त-मां की स्मृति में एक कैंसर अस्पताल बनवाना शुरू किया। मां से बेहद प्यार था और मां इसी बीमारी से ही मरी थी। जिस दिन उसने आखिरी सांस ली, इमरान ने तय कर लिया था कि अब वह अपनी मां की कैंसर-पीड़ा की भरपाई ऐसे ही एक प्रोजेक्ट से करेगा। इमरान की मां शौकत खातून का संबंध एक सूफी संत पीर रोशन की विरासत से था।

उत्तर-पश्चिमी पाक में स्थित दक्षिणी वज़ीरीस्तान में सूफी पीर रोशन की दरगाह है, जहां पर श्रद्धालु जुटे रहते हैं। इमरान के पिता ज़मींदार तो थे ही, पेशे से इंजीनियर भी थे। विदेश में पढ़ाई व क्रिकेट का जुनून, दोनों में मां-बाप की बेपनाह दौलत ने कोई रुकावट नहीं आने दी। इमरान के नाम पर इस्लामाबाद में 300 कनाल जमीन में फैला विशाल बंगला है।

लाहौर में लगभग तीन करोड़ की लागत (रिकार्ड में इतनी ही दर्ज है) से बनी एक विशाल कोठी है, जिसका बाज़ार भाव 50 से 80 करोड़ तक अनुमानित है। अलग-अलग धंधों में उसने सरकारी रिकार्ड के अनुसार चार करोड़ डॉलर का निवेश किया हुआ है। इसके इलावा बेपनाह दौलत बैंकों व बेनामी संपत्तियों में जमा है।

अपनी ऐश्वर्य भरी जि़न्दगी के बावजूद इमरान की निजी जि़न्दगी में ढेरों ऐसे किस्से हैं जिनकी इजाजत कुरान में कतई नहीं है। 18 मार्च, 2012 को उसे इंडिया टुडे के कान्कलेव में भाग लेने नई दिल्ली आना था, मगर वहां पर आमंत्रित वक्ताओं की सूची में सलमान रश्दी का नाम शामिल होने पर आपत्ति उठाते हुए इमरान ने यात्रा स्थगित कर दी थी।

सलमान रश्दी ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इमरान को डिक्टेटर-इन-वेटिंग कहा। ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने लिखा था, वह एक दिन लोकतंत्र का झंडा उठा लेता है मगर दूसरे ही दिन कट्टरपंथियों मुल्लाओं की शरण में दौड़ पड़ता है। पाकिस्तान में उसकी क्रिकेट-जिंदगी पर एक फिल्म भी बनी थी कप्तान: दी मेकिंग आफ ए लीजैंड। वह ब्रिटेन की 'यूनिवर्सिटी आफ बैर्डफोर्ड का चांसलर भी रहा है।

लंदन में शिक्षा प्राप्ति के समय उसकी छवि एक आवारा एय्याश युवक की थी, जो हर शाम वहां के नाइट क्लबों में पाया जाता था। इन सब बहुरंगी धाराओं में बहने वाले इमरान के नाम छह पुस्तकों का लेखन भी दर्ज है। इनमें उसकी 'आत्म कथा भी शामिल है। उसकी दूसरी चर्चित पुस्तक थी इंडस जर्नी, ए पर्सनल व्यू आफ पाकिस्तान।

तीसरी चर्चित पुस्तक है 'ए जर्नी थ्रू द लैंड आफ ट्राइबल पठान्स। उसकी वैवाहिक जि़न्दगी भी विवादों में घिरी रही है। वर्ष 1995 से 2004 तक वह ब्रिटेन के एक बहुचर्चित संपन्न परिवार गोल्ड स्मिथ की बेटी जेमिना गोल्ड स्मिथ से विवाहित रहा। वर्ष 2004 में दोनों पक्षों की सहमति से तलाक हो गया। दूसरी शादी ब्रिटेन में बसी पाकिस्तानी पत्रकार रेहन खान से हुई।

यह शादी सिर्फ नौ महीने कायम रही। तीसरी शादी इसी वर्ष 18 फरवरी, 2018 को पाकपटन शरीफ की एक आध्यात्मिक शख्िसयत बुशरा मानेका से हुई। इन सबसे पहले ब्रिटिश उद्योगपति गार्डन व्हाइट की बेटी साईटा व्हाइट के साथ लगभग छह वर्ष तक लिव-इन-रिलेशनशिप रही। इस अवधि में उसके एक बच्ची भी हुई थी।

अपने अधिकार की लड़ाई के लिए साइटा व्हाइट अदालत में भी गई क्योंकि इमरान ने उस बच्ची को अपनी संतान मानने से इन्कार कर दिया था। एक अमेरिकी अदालत ने साइट व्हाइट के पक्ष में निर्णय भी दे दिया था, मगर बाद में पाकिस्तान की एक अदालत ने कानून के अनुसार इमरान की दलीलें स्वीकार कर ली थीं।

अब खान के परिवार में उसकी चार बहनें रूबीना खातुम, अलीमा खातुम, उज़मा खातुम और और रानी खातुम हैं। पहली पत्नी जेमिना से इमरान के दो बेटे सुलेमान इसा खान और कासिम खान हैं। इमरान की मां के परिवार के बहुत से रिश्तेदार भारत-पाक विभाजन से पूर्व जालंधर में रह रहे थे। वे सभी विभाजन के समय लाहौर में आकर बस गए थे।

इमरान के नज़दीकी सूत्रों के अनुसार बुशरा मानेका शादी के कुछ माह बाद ही पाकपटन लौट गई थी। इस शादी के वर्तमान स्वरूप के बारे में फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट है कि निकाह हुआ था और उसके बाद तलाक जैसी कोई नौबत भी नहीं आई थी। इमरान सरीखे रूमानी शख्स के साथ निकाह के बावजूद बुशरा मानेका ने अपना अध्यात्म का सूफी-मार्ग नहीं छोड़ा।

इस शख्स से भारत को बहुत ज़्यादा उम्मीदें नहीं लगानी चाहिए। वहां अब भी ज़्यादातर फैसले विशेष रूप से विदेश नीति व कश्मीर नीति के पूरे फैसले सेना एवं आईएएआई के अगुआ ही लेते हैं। यूं भी इमरान अपनी खुली व धाकड़ जि़न्दगी के बावजूद कट्टरपंथी मुल्लाओं और शरीया कानूनों के आगे हमेशा नतमस्तक रहे हैं। वैसे पड़ोस के इन चुनावों से कुछ उम्मीदें भी जगी हैं।

वहां के मतदाताओं और विशेष रूप से वहां की सिविल सोसायटी ने आतंकी संगठनों को जमकर पटखनी दी है। मसूद की पार्टी के सभी 265 उम्मीदवार न सिर्फ हारे बल्कि ज़्यादातर जमानतें भी नहीं बचा पाए। वहां की सिविल सोसायटी ने नवाज़ शरीफ को भी ज़मीनी हकीकतें समझा दी हैं। यह संदेश भारत के लिए महत्वपूर्ण है। वहां के आवाम का एक बड़ा हिस्सा भारत से बेहतर रिश्तों का भी इच्छुक है।

अंतिम तथ्य यह है कि पाक गम्भीर आर्थिक संकट का शिकार है। कोई संगठन अब इस मुल्क को कोई नया कर्ज देने को तैयार नहीं है। विदेशी मुद्रा का भण्डार सिर्फ नौ अरब डॉलर ही रह गया है। अमेरिका व चीन दोनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे हालात में नीतियों में बदलाव का दबाव सेना पर होगा। इमरान को अपने भी बड़बोलेपन पर काबू पाना होगा। क्रिकेट की पिच पर खेलना व देश को चलाना दो अलग-अलग बाते हैं।

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