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संपादकीय : कट्टरपंथियों के आगे न झुके इमरान सरकार

पाक पर अधिकांश समय तक शासन करने वाले दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) हमेशा अपनी सत्ता व कुर्सी के लिए फौज, आईएसआई व इस्लामिक कट्टरपंथियों की तिकड़ी के आगे बेबस रहे और पश्चिमी ताकतों की कुटिल कूटनीति के शिकार रहे। नतीजा सामने है कि पाकिस्तान कट्टरपंथ व आतंकवाद के दलदल में धंसता चला गया।

संपादकीय : कट्टरपंथियों के आगे न झुके इमरान सरकार
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संपादकीय लेख

Haribhoomi : पाकिस्तान सरकार को कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकना चाहिए। भारत से कपास व चीनी आयात के फैसले को पलटकर अपने राष्ट्रहित को ही नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान प्रगतिशील विचारों वाले नेता हैं और उन्होंने विश्व की तमाम व्यवस्थाओं को करीब से देखा-समझा है, इसलिए जब वे पाकिस्तान के पीएम बने तो लगा कि वे कट्टरपंथियों से किनारा करने में कामयाब होंगे। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने कश्मीर को ऐसा संवेदनशील मुद्दा बनाकर अपने अवाम के सामने पेश किया कि अब वह उनके ही गले की हड्डी बना हुआ है। पाक फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने वजूद को सही ठहराने के लिए हमेशा भारत से दुश्मनी का रुख अख्तियार किया, इसका नतीजा यह हुआ कि जो पाकिस्तान एक बेहतर राष्ट्र के सपने के साथ भारत से अलग हुआ, वह फौज, आईएसआई व इस्लामिक कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन कर रह गया।

पाक पर अधिकांश समय तक शासन करने वाले दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) हमेशा अपनी सत्ता व कुर्सी के लिए फौज, आईएसआई व इस्लामिक कट्टरपंथियों की तिकड़ी के आगे बेबस रहे और पश्चिमी ताकतों की कुटिल कूटनीति के शिकार रहे। नतीजा सामने है कि पाकिस्तान कट्टरपंथ व आतंकवाद के दलदल में धंसता चला गया। नया पाकिस्तान बनाने के सपने के साथ क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान जब सत्ता में आए तो लगा कि वे व्यवस्था परिवर्तन करेंगे और पिछली सरकारों की गलतियों से सबक लेते हुए आतंकवादमुक्त पाकिस्तान बनाएंगे, लेकिन वे भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह ही कट्टरपंथियों के आगे झुकते चले गए और भारत से संबंध और खराब करते चले गए। अभी कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों के हटने के बाद भारत से रिश्तों को और तल्ख कर लिया है। पाकिस्तान ने वर्ष 2016 में ही भारत से कॉटन और अन्य कृषि उत्पादों के आयात पर रोक दिया था। भारत से ट्रेड बंद करने वाले पाक महंगे आयातों के चलते लगातार महंगाई के गर्त में डूबते गए। आतंकवाद को पालने पोसने के चलते आर्थिक रूप से पाक विश्व में वैसे ही अलग-थलग है।

चीन व तुर्की के अलावा कोई पाक का दोस्त नहीं है, और चीन पाक का उपनिवेश की तरह दोहन कर रहा है, यह पाक को भी पता है। कोरोना के बाद तो पाकिस्तान आर्थिक हालत और खराब है, वह महंगे आयात को सहने की स्थिति में नहीं है। सूत के अभाव में कपड़ा उद्योग दम तोड़ रहा है। इसलिए पाकिस्तान की इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी (ईसीसी) ने अपने यहां के उद्यमियों की मांग पर ही भारत से कपास व धागा मंगाने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी थी, साथ ही निजी क्षेत्र की कंपनियों को भारत से चीनी आयात के लिए अनुमति दी थी। भारत की चीनी दूसरे देशों से 15 से 20 रुपये प्रति किलो सस्ती है। लेकिन कट्टरपंथी की आलोचना व विपक्ष के आरोपों के सामने अपने राष्ट्रीय हितों की बलि देकर एक दिन बाद ही भारत से आयात का फैसला वापस ले लिया। चूंकि पाक पर टेरर फंडिंग के मुद्दे पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। हाल में वह भारत से संबंध सुधारने की कवायद में जुटा हुआ है, भारत से भी सकारात्मक जेस्चर मिला है। आंशिक रूप से खेल गतिविधियां शुरू हो रही हैं। ट्रेड शुरू करने से पाक व भारत और करीब आते, लेकिन इमरान सरकार यह मौका गंवा रही है। इमरान सरकार को पाक को आतंकवाद व कट्टरपंथ मुक्त पाकिस्तान के निर्माण की दिशा में काम करना चाहिए, इससे पाक की आर्थिक सेहत भी सुधरेगी व वह विश्व में स्वीकार्य भी होगा। भारत से दुश्मनी निभाने से पाकिस्तान को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है, उल्टे वह और जर्जर होता जाएगा।

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