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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : अनलॉक की प्रभावी रणनीति जरूरी

देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका जाहिर की जा रही है, अतएव सभी राज्यों में कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए स्वास्थ्य ढांचे की बुनियादी तैयारियों के साथ जीवन में योग को आत्मसात किए जाने की रणनीति पर ध्यान देना होगा। वस्तुतः हवा में विभिन्न सूक्ष्म जीवाणुओं का वास रहता है। जब हम खुले मुंह सांस लेते हैं और एक-दूसरे के सम्पर्क में आकर बात करते हैं, तो उस समय वातावरण में फैले अति सूक्ष्म जीवाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए मास्क लगाने एवं सामाजिक दूरी के मंत्र को जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाना होगा। अब हाथ मिलाने की बजाय हाथ जोड़ने के तरीके को जीवन का अंग बनाना होगा।

डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : अनलॉक की प्रभावी रणनीति जरूरी
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डॉ. जयंतीलाल भंडारी 

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर के बीच अप्रैल-मई में स्थानीय स्तर पर उपयुक्तता के अनुरूप लॉकडाउन लगाए गए हैं। अब विभिन्न प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन खोला जाना सुनिश्चित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस बार दूसरी लहर के बीच देशव्यापी लॉकडाउन की बजाय प्रादेशिक स्तर पर लॉकडाउन हैं। जहां कोरोना की दूसरी लहर अधिक घातक थी, वहीं इसके कारण आर्थिक से अधिक मानवीय संकट का परिदृश्य निर्मित हुआ है। इससे चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अप्रैल एवं मई महीनों में अर्थव्यवस्था की गति धीमी हुई है। दूसरी लहर से देश के 60 फीसदी से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) आर्थिक संकट में आ गए हैं। लॉकडाउन ने आपूर्ति श्रृखंला को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिससे जरूरी वस्तुओं की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। औद्योगिक शहरों से मजूदरों के पलायन ने उद्योगों की समस्याएं भी बढ़ाई हैं। दूसरी लहर में संक्रमण के मामले अधिक हैं मानवीय पीड़ाएं बढ़ी हैं और मौतें भी अधिक हुई हैं।

ऐसे में अब जिन राज्यों के जिन क्षेत्रों में संक्रमण दर पांच फीसदी से नीचे है वहां अनलॉक करने की प्रक्रिया सावधानी से आगे बढ़ाई जानी होगी। अनलॉक की ऐसी रणनीति जरूरी है, जिससे कोरोना को पूरी तरह मात दी जा सके और बहुरूपिये वायरस की वापसी के दरवाजे पूरी तरह बंद किए जा सकें। दुनिया में लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया के तहत वैज्ञानिकों द्वारा आदर्श माने जा रहे अमेरिका राज्य न्यू हैम्पशायर सहित विभिन्न देशों के औद्योगिक शहरों ने जो रणनीतियां अपनाई हैं, उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में अनलॉक करते समय स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ ध्यान में अवश्य रखा जाना लाभप्रद हो सकता है। विभिन्न राज्यों में अनलॉक की प्रक्रिया में उद्योग-कारोबार और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रणनीतिपूर्वक बाजार खोले जाने होंगे। उद्योग-कारोबार को अनलॉक करने के पहले चरण में जहां एक ओर बंद पड़े कारखानों और निर्माण गतिविधियों को छूट दी जानी होगी, वहीं आगामी दो माह तक दुकानें और कारोबार 6 से 8 घंटे के लिए खोले जाने उपयुक्त रहेंगे।

शनिवार और रविवार को पूर्णतया जनता कर्फ्यू रहे। होटल और रेस्टोरेट को सिर्फ अग्रिम बुकिंग पर खुली जगह में सीमित संख्या में ग्राहकों को खाना परोसने की इजाजत दी जाए। अभी जिम, सिनेमा और पर्यटन जैसे कारोबारों को अनलॉक नहीं किया जाए। कारोबारियों को यह ध्यान रखना होगा कि शहर खुलते ही बाज़ारों में भीड़ बढ़ेगी, अतएव दुकानों पर मास्क पहनने के साथ-साथ दो गज की दूरी बनाकर रखी जानी होगी। उद्योग-कारोबार संगठनों के द्वारा कर्मचारियों को टीका लगवाने के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित करने होंगे। श्रमिकों को रोजगार के साथ टीकाकरण की सुविधा सुनिश्चित की जानी होगी। चूंकि लॉकडाउन में दुकानें और ऑफिस बंद रहे हैं, अतएव कोरोना की दूसरी लहर के बीच के महीनों में उपभोग के हिसाब से ही बिजली बिल और अन्य स्थानीय टैक्स वसूल किए जाएं। दिसम्बर 2021 तक जीएसटी व प्राविडेंट फंड संबंधी राहत दी जाएं। एमएसएमई के लिए एक बार फिर से लोन मोरेटोरियम योजना लागू की जानी लाभप्रद होगी। बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करना होगा। कोविड-19 महामारी के कराण आर्थिक पुनरुद्धार पर मंडराते खतरे को देखते हुए केंद्र के द्वारा उपयुक्त प्रोत्साहन पैकेज दिया जाना होगा।

एक बार फिर कोरोना महामारी नियंत्रण के लिए सैंपलिंग पर जोर दिया जाना होगा। माइक्रो कंटेनमेंट की रणनीति अपनाकर लोगों को किसी नए लॉकडाउन से बचाया जा सकेगा। वार्ड मैनेजमेंट के जरिए हर संक्रमित की निगरानी रखी जानी होगी। स्कूलों-कॉलेजों में टीचर-स्टाफ को कोरोना वैक्सीन लगाए जाने सुनिश्चित किए जाएं, ताकि स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी शुरू की जाए। स्कूल–कॉलेजों को दो माह बाद शुरू किया जाए और शुरुआत में स्टूडेंट को 50 फीसदी क्षमता के आधार पर बुलाया जाए। चूकि अभी भी लोग टीकाकरण से हिचक रहे हैं, अतएव सरकार के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बन गई है कि वे वैक्सीन के लिए लोगों को प्रेरित करें। जीवन बचाने और कोरोना महामारी को हराने में वैक्सीन की भूमिका महत्वपूर्ण है।

टीकाकरण को और अधिक सुनियोजित ढंग से किया जाना होगा। संक्रमण खत्म करने से आशय शत-प्रतिशत लोगों के टीकाकरण से नहीं है बल्कि एक लक्ष्य के साथ लोगों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित करना भी है। कोविड-19 के मद्देनजर डॉक्टरों व नर्सिंग स्टॉफ के लिए विशेष वेकैंसी निकाली जाए और शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जानी होगी। सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को वेतन तभी दिया जाए, जब वे वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाएं। जब तक विभिन्न प्रदेश 'हर्ड कम्युनिटी' हासिल करने के करीब नहीं पहुंच जाते, तब तक सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना, दो मीटर की सामाजिक दूरी बनाना, समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहना और भीड़ जुटाने से बचने के लिए लगातार जन जागरण करना होगा। विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक परिवहन के तहत कोविड-19 दिशा निर्देशों का पालन कठोरतापूर्वक कराना होगा। सरकार के द्वारा टीकाकरण की पूरी सुविधा उपलब्ध कराए जाने के बाद सिर्फ उन्हीं लोगों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट दी जानी होगी, जिन्होंने टीका लगवा लिया है। पार्टी में शामिल होने के लिए वैक्सीनेशन कार्ड दिखाना अनिवार्य किया जाना होगा। अब ई-गवर्नेंस की व्यवस्था को और प्रभावी बनाना होगा। सरकारी कार्यों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाना होगा। चूंकि अभी भी देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका जाहिर की जा रही है, अतएव सभी राज्यों में कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए स्वास्थ्य ढांचे की बुनियादी तैयारियों के साथ जीवन में योग को आत्मसात किए जाने की रणनीति पर ध्यान देना होगा। वस्तुतः हवा में विभिन्न सूक्ष्म जीवाणुओं का वास रहता है। जब हम खुले मुंह सांस लेते हैं और एक-दूसरे के सम्पर्क में आकर बात करते हैं, तो उस समय वातावरण में फैले अति सूक्ष्म जीवाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इनसे बचने के लिए मास्क लगाए जाने एवं सामाजिक दूरी के मंत्र को जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाना होगा। साथ ही अब अभिवादन के लिए हाथ मिलाने और गले मिलने की बजाय हाथ जोड़ने के तरीके को जीवन का अंग बनाना होगा।

हम उम्मीद करें कि विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा लॉकडाउन को खोलने की प्रक्रिया में स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ इन विभिन्न रणनीतिक सुझावों पर अवश्य ध्यान दिया जाएगा। इससे जहां अर्थव्यवस्था को बड़ी गिरावट से रोका जा सकेगा, वहीं कोरोना से प्रभावित वर्गों के दुख-दर्द कम किए जा सकेंगे। देश की जनता के सहयोग व जागरूकता से देश अपनी इच्छा शक्ति और पब्लिक हेल्थ के जरिए कोरोना माहमारी को मात देते हुए दिखाई देगा। इससे एक बार फिर देश के उद्योग-कारोबार आगे बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था गतिशील होगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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