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प्रदूषण पर मौन सरकार, हनन होता मानवाधिकार

इन दिनों सबकी निगाहें पोलेंड के काटोवित्से में चल रहे 24वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन में टिकी हैं। इस समिट में देश के शीर्ष नेता विश्व में बढ़ रहे पर्यावरण प्रदूषण को कम पर सोच-विचार कर रहे हैं।

प्रदूषण पर मौन सरकार, हनन होता मानवाधिकार

इन दिनों सबकी निगाहें पोलेंड के काटोवित्से में चल रहे 24वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन में टिकी हैं। इस समिट में देश के शीर्ष नेता विश्व में बढ़ रहे पर्यावरण प्रदूषण को कम करने पर सोच-विचार कर रहे हैं।

दिनों-दिन विश्व में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यदि हम भारत की राजधानी दिल्ली की बात करें तो प्रदूषण के मामले में दिल्ली विश्व के पहले पायदान पर है। हाल ही में WHO ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें दिल्ली पहले, मुंबई चौथे, बांग्लादेश की राजधानी को प्रदूषण के मामले में तीसरा स्थान मिला है।

सरकार के इतने प्रयास के बावजूद भी राजधानी में प्रदूषण कम नहीं होने का नाम ले रहा है। हर साल दिल्लीवासियों को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना है कि धूम्रपान नहीं करने वाला व्यक्ति भी एक दिन में 50 बार सिगरेट पी रहा है। यह अत्यंत ही दुखदायी है।

बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि सांस लेने का अधिकार सबको है। साथ ही संविधान का अनुच्छेद 21 सभी भारतवासियों को जीवन जीने (Right To Life) का अधिकार देता है।

इससे भारत के लोगों को वंचित नहीं किया जा सकता है। इस बात को यहां इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि आज मानवाधिकार दिवस है और सांस लेने का अधिकार हर नागरिक को है।

पिछले दिनों दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर दो ठेकेदारों पर प्रदूषण को बढ़ाने के जुर्म में उन पर 50 हजार का जुर्माना लगा दिया था। इस बात की जानकारी इमरान हुसैन ने खुद दी। लेकिन क्या सिर्फ इतने भर से ही दूसरे लोगों को सबक मिलेगा।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए अपनी योजनाओं की झड़ी लगा दी। जैसे हैलीकॉप्टर से पूरी दिल्ली में पानी का छिड़काव करना। साथ ही ऑड-इवन सिस्टम को लागू करना।

पिछले साल 'आप' नेता इस बारे में कहते हैं कि अभी हैलीकॉप्टर से कॉन्ट्रेक्ट किया जा रहा है। लेकिन तब तक क्या दिल्ली सरकार कोई फौरी कदम नहीं उठा सकती।

साथ ही दिल्ली के तीनों निगम में भाजपा के मेयर की नींद नहीं खुली है। लेकिन चुनाव के वक्त दोनों पार्टी ग्राफिक्स के जरिए लोगों को बताते है कि उसने प्रदूषण को लेकर इस तरह के कदम उठाने चाहें लेकिन दूसरे ने उन कानूनो और कदमों को बीच में ही लटका दिया।

हाल ही में NGT ने केजरीवाल सरकार पर 25 करोड़ का जुर्माना ठोक दिया। दिल्ली में आज (10 दिसंबर 2018) भी हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा है। लोधी रोड में PM 2.5 की मात्रा 260 है जबकि PM 10 की मात्रा 258 है।

लेकिन क्या यह सब करके ही दिल्ली और केंद्र जागेगा क्योंकि पिछले साल भी यही हालात थे और इस साल भी राजधानी के लोग बेफिजूल धुंए को पी रहे हैं। क्या यह भारत के लोगों के अधिकारों का हनन नहीं जिसे संविधान ने लोगों को दिए हैं।

खुली हवा में सांस लेना हर किसी का अधिकार है लेकिन प्रशासन के मौन रहने पर लोगों को उन अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। यहां पर हमें याद रखना होगा कि सिर्फ सरकारों को ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

हम लोगों को भी इस पर चिंतन करने की जरूरत है। जिससे हमें मिले अधिकारों से हम खुद को ही वंचित न कर लें। यह हम सब की भागीदारी है कि प्रदूषण को कम किया जाए और लोगों को मिले उनके अधिकारों से उन्हें रूबरू कराए तभी लगेगा कि हम अपने मानव अधिकारों से वंचित नहीं हैं।

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