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संपादकीय : लंबे समय तक कोरोना से जूझना महती चुनौती

दुनियाभर में करीब 78 करोड़ लोगों को कोराना वायरस का टीका लगाया जा चुका है, लेकिन संक्रमण रोकने के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी खत्म होने में लंबा समय लगेगा।

संपादकीय : लंबे समय तक कोरोना से जूझना महती चुनौती
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भारत ने विदेशी कोरोना वैक्सीन को देश में इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी देने का फैसला लिया। 

Haribhoomi Editorial : भारत ही नहीं समूचा विश्व आज कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसकी दूसरी-तीसरी-चौथी लहर ने स्वास्थ्य वैज्ञानिकों व चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का ताजा बयान भी चिंताजनक संदेश दे रहा है। भारत समेत दुनिया भर में फिर से तेजी बढ़ रहे संक्रमण को लेकर डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह महामारी लंबे समय तक रहेगी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहोम घेबियस ने कहा, 'सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में निरंतरता की कमी के कारण कोविड-19 संक्रमण और मौतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा दुनियाभर के लोगों के बीच आत्मसंतुष्टि और भ्रम की स्थिति होने के कारण भी कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।

दुनियाभर में करीब 78 करोड़ लोगों को कोराना वायरस का टीका लगाया जा चुका है, लेकिन संक्रमण रोकने के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी खत्म होने में लंबा समय लगेगा।' भारत में पिछले तीन दिनों से लगातार रोजाना 1.5 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। कोरोना ने भारत ही नहीं अमेरिका, फ्रांस, चीन, रूस व चीन जैसे शक्तिशाली देशों की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी। इस महामारी ने साबित किया है कि दुनिया की अधिकांश सरकारें कैसे स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं आमजन को उपलब्ध कराने में विफल रही हैं। यह केवल वानगी है। शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क, आवास, रोजगार आदि मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं की जा सकी हैं। विश्व की वर्तमान आर्थिक व्यवस्था से आर्थिक असमानता बढ़ी ही है।

कोरोना महामारी ने आर्थिक विषमता की खाई को और बढ़ा दी है। गरीबों के लिए जीवनयापन करना कठिन होता जा रहा है। भारत भी इन सबसे अछूता नहीं है। आजादी के बाद से डा. भीमराव आंबेडकर ने जिस समृद्ध, संपन्न और समतामूलक भारत के निर्माण के लिए संविधान देश को दिया, उनके लक्ष्य करीब 74 साल बाद आज भी अधूरे हैं। आज भी भारत जातिमुक्त समाज नहीं बन सका है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक विभाजन की जड़ें गहरी ही हुई हैं।

देश ने अब तक अपने सभी नागरिकों तक शिक्षा स्वास्थ्य, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकी हैं। चूंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में विश्व के अधिकांश देशों में कमी की ओर इशारा किया है, ऐसा भारत में भी है, इसलिए भारत आज जब डा. आंबेडकर की 130वीं जयंती मना रहा है और देश अपनी आजादी के 75 वर्ष में है, तो जरूरी है कि कृतज्ञ राष्ट्र डा. आंबेडकर के सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प ले। केंद्र में जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तब से सरकार लगातार अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने का काम कर रही है। अंत्योदय, उज्ज्वला, जनधन, मुद्रा, डिजिटल, छात्रवृत्ति, ग्रामज्योति, जल मिशन आदि योजनाएं गरीबों के जीवन में अपेक्षित बदलाव ला रही हैं। सरकार डा. आंबेडकर के समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। कोरोना टीका का महाभियान सबके कल्याण के लिए ही कदम है। अभी देश को कोरोना के प्रभावों से जूझना है, विकास की गति में तेजी लाने का प्रयास करना है, लेकिन इससे पहले जरूरी है कि देश महामारी की दूसरी लहर को मजबूती से रोके। सरकार के सामने महामारी को रोकने व अर्थव्यवस्था जारी रखने के बीच संतुलन साधने की चुनौती है।

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