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कब तक झूठ की खेती करता रहेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान की सेना और उग्रपंथी तत्व पिछले तीन दशक से छाया युद्ध छेड़े हुए हैं।

कब तक झूठ की खेती करता रहेगा पाकिस्तान
कारगिल युद्ध को सत्रह साल हो गए हैं। जिस तरह पाकिस्तान को इससे पहले की तीन लड़ाइयों 1948, 1965 और 1971 में मुंह की खानी पड़ी, उसी तरह 1999 के कारगिल युद्ध में भी उसे पराजय का सामना करना पड़ा। भारत के साथ सीधी जंग लड़ने का अंजाम कई बार भुगत चुके पाकिस्तान के नेता, वहां की सेना और उग्रपंथी तत्व पिछले तीन दशक से छाया युद्ध छेड़े हुए हैं। जिस तरह कारगिल को लेकर वहां की सेना लंबे समय तक झूठ बोलती रही कि उसमें पाक सेना शामिल नहीं थी मुहाजिरों ने घुसपैठ की थी, उसी तरह वह सीमा पार से छेड़े गए छाया युद्ध पर भी बराबर झूठ बोलते आ रहे हैं।
देश की राजधानी दिल्ली, आर्थिक राजधानी मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद से लेकर जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे अनेक हिस्सों में आतंकी हमलों को अंजाम देने वाली तंजीमों को पाकिस्तानी सेना और सरकार का किस तरह संरक्षण मिलता रहा है, यह अब किसी से दबी छिपी बात नहीं रह गई है। भारत पाकिस्तान ही नहीं, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ को भी पाकिस्तानी घुसपैठ और साजिशों के पुख्ता सबूत उपलब्ध करवा चुका है। मुंबई अटैक के दस में नौ हमलावर मौके पर ही मार गिराए गए थे जबकि आमिर अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था, जिसे बाद में लंबी सुनवाई के बाद उसके अंजाम तक पहुंचाया गया।
शुरू में कसाब के बारे में भी पाकिस्तानी हुक्मरान यह स्वीकार करने को तैयार नहीं थे कि उसका वहां से कोई रिश्ता है, परन्तु पाकिस्तानी टेलीविजन ने ही इसका भंडाफोड़ कर दिया कि वह कहां का रहने वाला है और उसके वालिद वगैरा क्या करते हैं। यह खुलासा भी किया गया कि उसे ट्रेनिंग देने वाली तंजीमें कौन सी थी और किस तरह उन्हें कराची के रास्ते मुम्बई तक भेजने की व्यवस्थाएं की गईं। उसके बाद भी भारत के कई हिस्सों में बड़ी आतंकी वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें सैकड़ों आतंकी सुरक्षाबलों के हाथों मारे जा चुके हैं। ऐसे भी कई मौके आए हैं, जब सुरक्षाबल कुछ आतंकियों को जिंदा पकड़ने में कामयाब रहे हैं। इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के ही बाशिंदे हैं।
पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। यह हमला ऐसे समय अंजाम दिया गया, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस और अफगानिस्तान से दिल्ली लौटते समय कुछ घंटों के लिए लाहौर रुके थे और उन्होंने पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की नातिन को निकाह की मुबारकबाद दी थी। मोदी के इन शांति प्रयासों को वहां के सेना, आईएसआई और चरमपंथी तत्व पचा नहीं सके। भारत ने एयरबेस के हमलावरों की सीमा पार हो रही बातचीत की रिकॉडिंग और दूसरे अहम दस्तावेज पाकिस्तानी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई। पहली बार पाकिस्तानी जांच एजेंसी को भारत (पठानकोट) आने की इजाजत दी गई, परन्तु इस सबके बावजूद पड़ोसी मुल्क की कुटिलता में कहीं कोई कमी देखने को नहीं मिली।
कसाब को कभी का उसके अंजाम तक पहुंचाया जा चुका है, परन्तु पाकिस्तान में मुम्बई के हमलावरों पर अभी तक ढंग से सुनवाई तक शुरू नहीं हुई है। भारत की सदाशयता का जवाब पाकिस्तान अधिकांशत: कुटिल चालों के जरिए देता आ रहा है। पिछले एक साल में न केवल घुसपैठ में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है बल्कि वारदातों की संख्या भी बढ़ी हैं। कारगिल विजय दिवस पर भी पाकिस्तान बाज नहीं आया। सरहद पर घुसपैठ करते चार आतंकियों को भारतीय सुरक्षाबलों ने नौगाम सेक्टर में ढेर कर दिया जबकि एक पाकिस्तानी आतंकी को जिंदा पकड़ने में उन्हें कामयाबी मिली। वह लाहौर का रहने वाला है। जाहिर है, इससे पाकिस्तान का यह झूठ एक बार फिर बेनकाब हो गया है कि वह अपनी जमीन का उपयोग भारत के खिलाफ किसी को नहीं करने दे रहा है।
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