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डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : घर-घर विराजे गणपति

कोरोना प्रकोप के चलते धूमधाम कम है, पर इस संकट में भी अपनेपन को पोषित करने वाले प्रथम पूज्य गणेश घर-घर विराजे हैं। आपदा के दौर में बहुत सादगीपूर्ण ढंग से यह पर्व मनाया जा रहा है। घर से बाहर निकलने के बजाय लोग घर में ही प्रतिमा का विसर्जन कर रहे हैं। पंडालों में भी भीड़ जुटाने की अपेक्षा ऑनलाइन दर्शन की सुविधा रखी गई है। कई आयोजकों ने फेसबुक, गूगल व जूम वीडियो के जरिये भक्तों को गजानन के वर्चुअल दर्शन करवाने की तैयारियां की हैं।

गणपति विसर्जन के बाद क्या करें, आप भी जानें
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प्रतीकात्मक तस्वीर

डॉ. मोनिका शर्मा

कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी और आम जीवन से जुड़े कई प्रतिबंधों के बीच देश में गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। हालांकि इस दस दिवसीय उत्सव की पारंपरिक धूमधाम इस साल कम ही है पर लोगों के मन में उत्साह कायम है। सुखद है कि इस वर्ष यह पर्व कोरोना बीमारी से जूझने के सरोकारी भावों से भी जुड़ गया है। मुंबई के मशहूर लालबागचा राजा गणेश उत्‍सव पंडाल में गणेश उत्‍सव नहीं बल्कि आरोग्‍य उत्‍सव मनाया जा रहा है। आयोजकों ने उत्सव की धूमधाम के बजए यहां ब्‍लड और प्‍लाज्‍मा डोनेशन के कैंप का आयोजन किया है। साथ ही सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक यहां गणपति की छोटी मूर्ती ही स्थापित की गई है। लालबागचा राजा नाम से मशहूर गणेश पंडाल में हर वर्ष लगाई जाने वाली विशाल प्रतिमा के पूजन दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती है, लेकिनइस साल कोरोना संक्रमण की समस्या के चलते विशाल प्रतिमा लगाने की जगह महज 4 फीट की प्रतिमा लगाई गई है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा गणेशोत्सव के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों में इस वर्ष सार्वजनिक पंडालों और घरों में आयोजित होने वाली पूजा में गणपति की प्रतिमा की ऊंचाई सीमित कर दी गई है। पंडालों के लिए प्रतिमा की ऊंचाई अधिकतम चार फुट और घरों में स्थापित करने के लिए अधिकतम दो फुट रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गणेश उत्सव की शुरुआत या विसर्जन से पहले शोभा यात्रा निकालने की भी मनाही है। प्रथम पूज्य का स्वागत और विसर्जन के समय सामूहिक पूजा पंडाल ही नहीं आम लोग भी इन गाइडलाइंस का पालन करते दिख रहे हैं। ऐसे में उत्सवीय रंगों की फीकी रौनक को समझ और सरोकारी सोच ने सार्थक बना दिया है।

हर वर्ष गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक पूरे देश में गणेश उत्सव मनाया जाता है। विशेषकर महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की खूब रौनक रहती है। हर बार यह उत्सव खुशियों की सौगात साथ लाता है। कंक्रीट के जंगल बन चुके शहरों में भी मेलजोल का माहौल बन जाता है। घरों और सार्वजानिक पंडालों में गजानन को हर वर्ष ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते- गाते घर लाने की परम्परा है। मन-जीवन के उत्साह से भरे इस उत्सव में डेढ़ दिन, ढाई दिन से लेकर 11 दिन तक के लिए गजानन की स्थापना की जाती है। बप्पा के पूजन-दर्शन के लिए आस-पड़ोस में न्योते भेजे जाते हैं। आपाधापी के बीच भी लोग मेल-मिलाप के लिए समय निकाल लेते हैं। पर इस साल यह त्योहार घर के लोगों के साथ ही मनाए जाने की स्थितियां बनी हुई हैं।

हालांकि कोरोना प्रकोप के चलते धूमधाम कम है पर इस संकट में भी अपनेपन को पोषित करने वाले प्रथम पूज्य घर-घर विराजे हैं। आपदा के दौर में बहुत सादगीपूर्ण ढंग से यह पर्व मनाया जा रहा है। घर से बाहर निकलने के बजाए लोग घर में ही प्रतिमा का विसर्जन कर रहे हैं। पंडालों में भी भीड़ जुटाने के बजाए ऑनलाइन दर्शन की सुविधा रखी गई है। कई आयोजकों ने फेसबुक, गूगल व जूम वीडियो के जरिए भक्तों को गजानन के वर्चुअल दर्शन करवाने की तैयारियां की हैं। विसर्जन के समय भीड़भाड़ से बचने के लिए कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इतना ही नहीं कई सार्वजानिक पंडालों में कोरोना को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। महामाया गणपति संगठन कोरोना थीम के साथ गणेश उत्सव मना रहा है। पंडाल में गणपति की सवारी मूषक को कोरोना से लड़ते हुए दिखाया है। भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथ में अस्त्र की जगह सैनिटाइजर दिया गया है| यह श्रद्धालुओं को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक रहने का संदेश लिए हैं।

कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए त्योहार मानने की परंपरा को कायम रखना सकारात्मक संदेश लिए है। गणेश पूजन की इस परंपरा का इतिहास केवल आस्था से ही नहीं आजादी के आन्दोलन से भी जुड़ा है| स्वतंत्रता आन्दोलन के समय बाल गंगाधर तिलक ने समाज में समरसता बढ़ाने के लिए गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की रीत शुरू की थी, ताकि आम लोगों की इस उत्सव के साथ ही स्वतंत्रता आन्दोलन में भी भागीदारी हो सके। आजादी पाने के लिए लोकोत्सव बना यह पर्व आज सामाजिक-पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने का अवसर है। साथ और स्नेह बांटने का प्यारा पर्व है। परम्पराओं के जीवंत होने का अहसास करवाने वाले इस पर्व पर हर साल न केवल घर-आंगन में रौनक रहती है बल्कि सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। मुंबई में तो आमजन ही नहीं कई क्षेत्रों के चर्चित चेहरे भी पूजन दर्शन को पहुंचते हैं। ऐसे में इस संकटकाल में काफी सूझबूझ के साथ यह पर्व मनाया जा रहा है। देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए संकट बनी कोरोना संक्रमण की परिस्थितियों में जीवन सहेजने वाले नियमों का पालन करते हुए गणेशोत्सव की परंपरा को सहेजना वाकई सराहनीय है।

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