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उम्मीद करें, समग्र वार्ता के नतीजे भी निकलें

भारत - पाकिस्तान वार्ता से उम्मीद है कि यह अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी और सार्थक नतीजे लेकर आएगी।

उम्मीद करें, समग्र वार्ता के नतीजे भी निकलें
भारत - पाकिस्तान अपने द्विपक्षीय रिश्ते को नया मुकाम देने के लिए सभी मुद्दों पर समग्र बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। उम्मीद है, यह वार्ता अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी और सार्थक नतीजे लेकर आएगी। हालांकि रिश्तों पर जमी बर्फ यूं ही नहीं पिघली है। इसके लिए माहौल बनाने के लिए पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से एक छोटी मुलाकात की थी उसके दस दिनों के अंदर दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और विदेश सचिव स्तर की बैठकें हो चुकी हैं।
पड़ोसी देश होने के नाते भारत पाकिस्तान के साथ मधुर रिश्तों की अहमियत जानता है। पाकिस्तान में आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर अभी जिस तरह की चुनौतियां हैं उसे देखते हुए उससे संवाद बनाए रखना सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया क्षेत्र के हित में है। यही वजह है कि तमाम दबावों के बाद भी भारत दोस्ती का हाथ बढ़ता रहा है। अफगानिस्तान से संबंधित हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने के कार्यक्रम के बहाने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दो दिवसीय पाकिस्तान दौरा इस मकसद को भी समेटे हुए था। दरअसल, इस दौरान उनकी नवाज शरीफ से संबंध बहाली को लेकर सकारात्मक वार्ता हुई है।
दोनों पक्षों की ओर से भारत पाक के रिश्तों को कैसे आगे बढ़ाया जाए इस पर चर्चा हुई है। ऐसे में कहा जा सकता है कि लंबे समय से ठप पड़ी द्विपक्षीय वार्ता फिर से पटरी पर लौट आई है। हालांकि दोनों देशों के बीच आतंकवाद, कश्मीर और सीमा सहित कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर गंभीर विवाद है। इन मतभेदों के दूर होने के बाद ही अमन बहाली की उम्मीद की जा सकती है और फिर आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक आदि द्विपक्षीय रिश्ते परवान चढ़ पाएंगे। हालांकि भारत में नई सरकार आने के बाद दो बार बातचीत की प्रक्रिया पाकिस्तान के अड़ियल रुख के कारण ही रुक गई थी। ऐसे में अब तीसरा प्रयास कितना आगे बढ़ता है यह पाकिस्तान के रुख पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
यदि उसकी मंशा सच में रिश्तों को सुधारना है तो उसे भारत को उकसाने या बेजा शतरें को थोपने से बचना होगा। दोनों देशों के बीच आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा रहा है। भारत इसका भुक्तभोगी है। जब जब रिश्ते पटरी पर आते प्रतीत होते हैं तभी कुछ अनहोनी हो जाती है और मामला जहां से चला होता है वहीं पहुंच जाता है। पाकिस्तान को इसका ध्यान रखना होगा। और आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को दूर करने पर गंभीरता दिखानी होगी।
26/ 11 के मुंबई हमले के गुनाहगारों को सजा दिलाने की मांग भारत लंबे समय से कर रहा है। इस पर भी तत्परता दिखानी होगी। जब तक सीमा पर शांति नहीं आएगी, तो न ही संबंधों में मधुरता आएगी और ना ही व्यापार बढ़ेगा। बहरहाल, सुषमा स्वराज व नवाज शरीफ की बातचीत को दोनों पक्षों ने उत्साहवर्धक बताया है। टकराव की बजाय सहयोग का वातावरण बनाने व सभी विवादित मुद्दों पर दोनों देशों में समग्र बातचीत से उम्मीद है कि भारत-पाक आगे बढ़ेंगे।
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