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समाज को आइना दिखाती एक लघुकथा ''अपने-अपने संस्कार''

जब इस बार भी नित्या ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया तो मैं आगबबूला हो गया

समाज को आइना दिखाती एक लघुकथा
छुट्टी का दिन था और शाम को सात बजे से भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले टी-ट्वेंटी डे नाइट मैच का प्रसारण टीवी पर होने वाला था। मैच को लेकर मेरी उत्सुकता चरम सीमा पर थी क्योंकि इस मैच की विजेता ही इंटरनेशनल चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश करने वाली थी।
यही वजह थी मैं मैच शुरू होने से कुछ देर पहले ही डबलबेड पर आराम से अधलेटा सा बैठ गया था। खाने-पीने का सारा इंतजाम भी कर लिया ताकि मैच के बीच में उठकर जाना ना पड़े। तभी मुझे याद आया कि फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक की बोतल निकालना मैं भूल गया। मैंने अपनी छोटी बेटी नित्या से कोल्ड ड्रिंक की बोतल लाने को कहा और पास में रखी मैगजीन पलटने लगा।
कुछ पल बाद मैंने देखा कि नित्या ने मेरा कहा नहीं माना और सावधान की मुद्रा में खड़ी है। मुझे थोड़ा गुस्सा आया और मैंने तेज आवाज में उससे फिर कहा कि कोल्ड ड्रिंक की बोतल वह ले आए।
जब इस बार भी नित्या ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया तो मैं आगबबूला हो गया। मैं कुछ कहता, इससे पहले ही नित्या मेरी ओर पलटी और बोली ‘पापा, मैंने आपकी बात सुन ली थी लेकिन मैच शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाया जा रहा था, इसलिए मैं रुकी थी।’ यह कहकर वह दूसरे कमरे से मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेने चली गई और मैं उसे देखता रह गया।
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