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प्रभात कुमार रॉय का लेख : आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा

भारत में वैक्सीन देने की रफ्तार अपेक्षाकृत बहुत धीमी रही है, जबकि विराट जनसंख्या को अभी वैक्सीन प्रदान की जानी है। एक बड़ा खतरा और भी बताया जा रहा कि यदि वैक्सीन देने में अधिक विलंब हुआ तो कोविड 19 भारत में म्यूटेट होकर और अधिक खतरनाक सिद्ध हो सकता है। एक मई से 18 वर्ष और इससे अधिक आयु को भारतवासियों का वैक्सीन टीकाकरण अभियान प्रारम्भ होना है। कोविड के विरुद्ध जंग में भारत की घरेलू नीति भले ही नाकाम सिद्ध हुई है किंतु भारतीय विदेश नीति की कामयाबी वस्तुतः भारत को कोविड संकट से निजात दिला देगी। किंतु भारत सरकार को आगामी दौर में ऐसी रणनीति का निर्धारण करना होगा कि कोविड के खिलाफ जंग में भारत एक स्वावलंबी देश के तौर पर खड़ा हो सके।

प्रभात कुमार रॉय का लेख : आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

कोविड- 19 की दूसरी विनाशकारी लहर वस्तुतः इस दफा इंगलैड से उभरी। कोविड की इस लहर ने सबसे अधिक तांडव भारत में मचाया है। भारत में तकरीबन तीन लाख पचास हजार कोविड संक्रमित केस प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। तकरीबन तीन हजार से अधिक भारतवासी प्रतिदिन काल के गाल में समा रहे हैं। जहां एक तरफ भारत में कोविड संक्रमितों की तादाद भयानक उछाल आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोप और चीन में संक्रमितों की संख्या में काफी कुछ कमी देखने में आ रही है। इसी वर्ष फरवरी के महीने में भारत में संक्रमितों की संख्या तकरीबन 12 हजार रह गई थी। ऐसा प्रतीत हुआ कि कोविड का विनाशकारी दौर गुजर चुका है। दुर्भाग्यवश 17 अप्रैल के तत्पश्चात भारत में दो लाख से अधिक संक्रमित केस प्रतिदिन आने लगे। विगत वर्ष जब कोविड संक्रमण भारत में अपने चरम बिंदु पर था तब भी प्रतिदिन तकरीबन 93 हजार कोविड केस सामने आ रहे थे। इस दौरान कोविड संक्रमण से मर जाने वालों की तादाद तकरीबन तीन हजार तक पंहुच चुकी है।

भारत में कोविड की दूसरी लहर के प्रकोप की समीक्षा करें तो एक तथ्य स्पष्ट तौर पर सामने आता है कि भारतीय हुकूमत और जनमानस ने कोविड के प्रकोप को विनाशकारी बनाने में अपना अपना किरदार निभाया है। हुकूमत की जिम्मेदारी यकीनन जनमानस से कहीं अधिक बड़ी होती है। प्रांतीय चुनाव और कुंभ का मेला दो ऐसे बड़े विशिष्ट कारण रहे जिन्होंने कि कोविड संक्रमण को भयानक स्तर पर पंहुचाने में अपनी भूमिका निभाई है। दोनों आयोजनों को सरकार द्वारा बाकायदा टाला जा सकता था। भारत सरकार चुनाव आयोग से प्रांतीय चुनावों को स्थगित करने का प्रबल आग्रह कर सकती थी। कुंभ मेले के आयोजन के स्थगित करने का निर्णय तो सरकार द्वारा खुद ही लिया जा सकता था।

आने वाला दौर तो भारत के लिए और भी अधिक विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। जबकि मई के महीनें में आशंका है कि कोविड संक्रमण अपने शिखर बिंदु पर पंहुच सकता है। इस विकट दौर में सबसे अधिक विनाशकारी सिद्ध हो रहा है कोविड संक्रमण से जंग करने के लिए उलब्ध संसाधनों की जबरदस्त कमी। कोविड संक्रमितों को अस्पतालों में सबसे अधिक तड़पाया है आक्सीजन सिंलडरों की बेहद कमी ने। केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों को लंबा वक्त हासिल हुआ संसाधनों को जुटाने का, किंतु इनकी घनघोर अकर्मण्यता के चलते अधिक कुछ हो ना सका और संपूर्ण हैल्थ सिस्टम चरमरा कर रह गया। संपूर्ण भारत के पटल केरल अकेला ऐसा प्रांत बनकर उभरा है तो आक्सिजन की कमी से नहीं जूझ रहा है।

उम्मीद की जा रही है कि जुलाई में कोविड संक्रमण की रफ्तार भारत के पटल पर कुछ धीमी पड़ सकती है। अब समस्त विश्व का मीडिया भारत में कोविड संक्रमण से निपटने में नाकाम रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर तोहमतें लगा रहा है। सारी दुनिया के देश विशेषकर इंगलैंड, अमेरिका, कनाडा, यूरोपियन यूनियन, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, चीन आदि इस भयानक संकट के दौर में भारत की सहायता करने के लिए आगे आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ नरेंद्र मोदी की 45 मिनट की लंबी बातचीत के तत्पश्चात अमेरिका ने वैक्सीन के निर्माण कार्य में प्रयोग आने वाले कच्चे माल के निर्यात से पाबंदी निरस्त कर दी है। उल्लेखनीय है कि भारत ने भी कोविड संकट में अमेरिका की विगत वर्ष मदद की थी। 75 वीं संयुक्तराष्ट्र महासभा के प्रजिडेंट बोलकान बोजिकर ने कहा कि भारत ऐसा देश हैै जिसने कि बेहद मुश्किल वक्त में उन देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई जिनके लिए कोविड टीकाकरण की व्यवस्था करना असंभव था।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राईस ने फरमाया है कि भारत के साथ अमेरिका की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है उन्होंने अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि किसी तरह से राजनीतिक समर्थन की चाह में अमेरिका वस्तुतः भारत की मदद नहीं कर रहा है। अमेरिकन राष्ट्रपति की पहल पर तकरीबन चालीस अमेरिकन कंपनियाें ने भारत की मदद करने का निर्णय लिया है। इंगलैंड ने भारत के लिए वैंटिलेटर्स और आक्सीजन भेजना प्रारम्भ कर दिया गया है, ताकि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड भारत में बड़े पैमाने पर निर्मित हो सकेगी। सऊदी अरब ने भारत को बड़े पैमाने पर आक्सीजन की सप्लाई शुरु कर दी है। सर्वविदित है कि रुस द्वारा स्पूतनिक 5 का निर्यात भारत में किया जा रहा है। चीन और पाकिस्तान सरीखे दुश्मन देशों द्वारा भारत की मदद करने की पेशकश की गई है। भारत में वैक्सीन देने की रफ्तार अपेक्षाकृत बहुत धीमी रही है, जबकि विराट जनसंख्या को अभी वैक्सीन प्रदान की जानी है। एक और बड़ा खतरा और भी बताया जा रहा कि यदि वैक्सीन देने में अधिक विलंब हुआ तो कोविड 19 भारत में म्यूटेट होकर और अधिक खतरनाक सिद्ध हो सकता है। एक मई से 18 वर्ष और इससे अधिक आयु को भारतवासियों का वैक्सीन टीकाकरण अभियान प्रारम्भ होना है।

कोविड के विरुद्ध जंग में भारत की घरेलू नीति भले ही नाकाम सिद्ध हुई है किंतु भारतीय विदेश नीति की कामयाबी वस्तुतः भारत को कोविड संकट से निजात दिला देगी। किंतु आत्मनिर्भर भारत का गगनभेदी नारा बुलंद करने वाली सरकार को आगामी दौर में ऐसी रणनीति का निर्धारण करना होगा कि कोविड के बरखिलाफ जंग में भारत एक स्वावलंबी देश को तौर पर खड़ा हो सके। व्हाइट हॉउस के मेडिकल सलाहकार और अमेरिका में महामारी के शीर्ष विशेषज्ञ डा. एथनी फॉऊची का कथन है कि भारत में निर्मित कोवैक्सीन कोविड वॉयरस के वैरिएंट बी 1. 1.617 पर भी विजय प्राप्त करने में कामयाब सिद्ध हुई है। ऐसे में कोविड वैक्सीन टीकारण बेहद जरूरी है। इस भारतीय कोवैक्सीन को भारत बॉयोटेक और नेशनल इंसीटीट्यूट ऑफ वाइरोलोजी ने इंडियन कॉऊंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेतृत्व में निर्मित किया है। सरकारों को वैक्सीन की व्यवस्था को लेकर ऐसी सुनिश्चित रणनीति बनानी होगी कि इसकी दोनों खुराक के बजाय पहली खुराक को प्राथमिकता दी जाए, ताकि इस महामारी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके।

सरकार का दावा है कि खासकर कोविशील्ड वैक्सीन, जो 90 प्रतिशत लोगों को दी गई है। अगर अगले छह हफ्तों तक ऐसा कुछ मुमकिन हो पाए, तो भारत इस दूसरी लहर को तोड़ सकता है और तीसरी लहर से जंग करने के लिए के लिए खुद को तैयार कर सकता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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