Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

सीबीआई के संवैधानिक होने पर प्रश्न चिह्न्

गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक फैसले ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय जांच एजेंसी) के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न् लगा दिया है।

सीबीआई के संवैधानिक होने पर प्रश्न चिह्न्
X

गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक फैसले ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय जांच एजेंसी) के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न् लगा दिया है। हाईकोर्ट ने असम के बीएसएनएल कर्मचारी नवेंद्र कुमार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उस नियम को ही गलत ठहराया है, जिसके तहत सीबीआई का गठन हुआ है। हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई जिन मामलों की जांच कर रही है, जिन मुकदमों की सुनवाई में शामिल है, अभी तक जो गिरफ्तारियां की हैं, जितने भी तलाशी अभियान चलाए हैं, सामान जब्त करने की जो कार्रवाई की है, वो सब असंवैधानिक है। अर्थात हाईकोर्ट ने सीबीआई की सभी कार्रवाइयों को अवैध करार दे दिया है। इस समय कई बड़े मामलों की जांच, वह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर, सीबीआई कर रही है। यूपीए सरकार के दौरान ही हुए कोयला, 2जी और कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। आदर्श घोटाला सहित कई राज्यों के मामले भी सीबीआई के पास हैं। ऐसे में यह आदेश सीबीआई के लिए संकट खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ विभिन्न हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जिन मामलों की जांच कर रही है, क्या उन्हें भी अवैध माना जाएगा? अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई हैं, क्योंकि उसी का फैसला अंतिम होगा। सीबीआई का गठन 1963 में हुआ था। करीब पचास वर्ष इसे काम करते हुए हो गए। पहली बार कानूनी लड़ाई में फंसती हुई दिखाई दे रही है। यह केंद्र सरकार की एजेंसी है जो भ्रष्टाचार से जुड़े और पेचीदा आपराधिक मामलों की जांच करती है। ऐसे मामलों की भी जांच करती है जिनकी सिफारिश राज्य सरकारें करती हैं। इसे बहुत सारे मामलों में कामयाबी मिली है तो बहुत में बदनामी भी मिली है। बोफोर्स कांड में क्वात्रोची का उदाहरण सामने है। यह भी कहा जाता रहा हैकि सीबीआई केंद्र सरकार के उपकरण के रूप में काम करती है। विरोधियों को फंसाने के लिए इसके दुरुपयोग के भी आरोप लगते रहे हैं।कईपूर्व निदेशकों ने यह स्वीकारा भी हैकि केंद्र सरकार उन्हें निर्देशित करती है। कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे फटकार लगाई है। हाल ही में शीर्ष अदालत ने इसे पिंजरे में बंद तोता करार दिया था। इस तरह विवादों से इसका लंबा नाता रहा है। परंतु गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जो आदेश जारी किए हैं वह अलग तरह का मामला है। हाईकोर्ट ने जिस प्रस्ताव के तहत सीबीआई का गठन किया गया है, उसे ही रद्द करार दे दिया है। यह भी कहा है कि सीबीआई, दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेबलिशमेंट एक्ट का हिस्सा नहीं है। इसके तहत सीबीआई को पुलिस फोर्स का भी दर्जा नहीं दिया जा सकता है। सीबीआई के गठन का गृह मंत्रालय का प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट का नहीं था और ना ही इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली हुई है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को विभागीय आदेश माना जा सकता है, लेकिन कानून नहीं। यह मामला दूर तक जाएगा। यदि सीबीआई के गठन में कहीं कोई कानूनी खामी रही है और इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं तो केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को जवाब देना होगा और उसमें सुधार करना होगा। परंतु हाईकोई के फैसले से सीबीआई के कामकाज और बने रहने पर गंभीर सवाल तो खड़ा हो ही गया है। ऐसे में इसने पूर्व में जो भी जांच किए हैं, अनेकों मामलों में कितनों को सजा दिलवाई है, उस पर भी प्रश्न चिह्न् लग गए हैं।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top