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आईएस के खतरे से निपटने की चुनौती, यूएसए टुडे में छपी रिपोर्ट ने बढा़ई चिंता

सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी वेबसाइट्स और युवाओं पर नजर रखने के लिए कहा गया है।

आईएस के खतरे से निपटने की चुनौती, यूएसए टुडे में छपी रिपोर्ट ने बढा़ई चिंता
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दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन आईएस से देश को भले ही अभी तात्कालिक खतरा नजर नहीं आ रहा है, लेकिन उससे निपटने की तैयारियों का जायजा लेकर केंद्र सरकार ने समझदारी भरा कदम उठाया है। दरअसल, पिछले दिनों पंजाब के गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले और अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे में छपी एक रिपोर्ट ने देश की चिंता बढ़ा दी है।
पंजाब के पूर्व पुलिस प्रमुख केपीएस गिल ने आशंका जताई है कि गुरदासपुर हमले के जरिए आईएस देश में अपनी संभावना तलाश रहा है। वहीं अमेरिकी अखबार में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएस भारत में बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहा है। इसके बाद से केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े होना स्वाभाविक है। उसी के मद्देनजर शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्रालय ने देश के बारह राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर आईएस के संभावित खतरे को रोकने के लिए रणनीति बनाई।
इसके तहत देश में एक वर्ग के युवाओं के आईएस के चंगुल में फंसने से रोकने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। मसलन आईएस सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टर बना रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी वेबसाइट्स और युवाओं पर नजर रखने के लिए कहा गया है। युवा न बहकें इसके लिए खास समुदायों के धर्मगुरुओं और प्रभावी लोगों द्वारा काउंसिलिंग कराने की रणनीति बनाईगई है।
जाहिर है, इससे आईएस की सप्लाई लाइन कट जाएगी। अभी सीरिया और इराक के बड़े भाग पर आईएस का कब्जा है। अफ्रीका और अरब के कई देशों में उसने अपना विस्तार कर लिया है। यही नहीं वह यूरोप में भी घुसने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में उसकी ताकत का सहज अंदाजा लगा सकते हैं। मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान लड़ाकों के उसमें शामिल होने का खतरा पैदा हो गया है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी उसकी मौजूदगी के पुख्ता संकेत मिले हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान, जो स्वयं आतंकवाद से जूझ रहे हैं, आईएस के भारत की सीमा तक विस्तार के लिए मुफीद हो रहे हैं।
यह अकारण नहीं है कि इन दिनों जम्मू-कश्मीर में कई मौकों पर आईएस के झंडे देखे गए हैं पर अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वहां यह सब कौन कर रहा है? आईएस पर नजर रखने वाले सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आईएस का उभार सिर्फ हथियार के बल पर नहीं हुआ है, बल्कि इसमें उसकी कट्टर विचारधारा का भी हाथ है। इस कट्टर विचारधारा को रोकने की जरूरत है। जाहिर है, यदि वह भारत में हमले की योजना बना रहा है तो उसे भविष्य की बात बता कर खारिज नहीं किया जा सकता।
ऐसे में हमें सावधान रहने की जरूरत है। इसकी संभावना बहुत हैकि वह भारत में मौजूद इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संपर्क करे। इसके लिए हमें खुफिया तंत्र को चुस्त करना होगा, ताकि सटीक जानकारी मिल सके। इसके आधार पर ही हम कट्टरपंथी विचारों के देश में फैलने से रोक पाएंगे। जब जनता से किसी प्रकार का सर्मथन नहीं मिलेगा तो आईएस कोईबड़ा खतरा पैदा नहीं कर पाएगा।
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