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जीएसटी में सुधार से तेज होगी अर्थव्यवस्था, मिलेगा ये लाभ

भारत में अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी के टैक्स ढांचे में एकमुश्त राहत से आने वाले वक्त में अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) परिषद की 28वीं बैठक के दौरान 88 वस्तुओं पर जीएसटी की दर को कम किया गया है, सेनेटरी नैपकिन को टैक्समुक्त किया गया है।

जीएसटी में सुधार से तेज होगी अर्थव्यवस्था, मिलेगा ये लाभ

भारत में अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी के टैक्स ढांचे में एकमुश्त राहत से आने वाले वक्त में अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) परिषद की 28वीं बैठक के दौरान 88 वस्तुओं पर जीएसटी की दर को कम किया गया है, सेनेटरी नैपकिन को टैक्समुक्त किया गया है।

जीएसटी में बदलावों से 100 से अधिक आयटम सस्ते होंगे। सभी फैसले 27 जुलाई से लागू होंगे। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम बेशक सरकार पर तेज कसे कि जल्दी-जल्दी चुनाव हो, ताकि जीएसटी में और राहत मिले, लेकिन कांग्रेस का एकल टैक्स का प्रस्ताव था, उसमें तो कमी की गुंजाइश ही नहीं होती। कांग्रेस के एकल टैक्स प्रस्ताव में 16 से 18 फीसदी के बीच जीएसटी रखने का विचार था।

अगर ऐसा होता तो आज जिन वस्तुओं पर पांच और 12 फीसदी जीएसटी है, वे सभी महंगी होतीं। ऐसे में कम से कम कांग्रेस को टैक्स रेट को लेकर सरकार की आलोचना करने का नैतिक हक नहीं है। आम लोगों और व्यापारियों के लिए बड़ी बात यह है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, जीएसटी वसूली की प्रक्रिया सामान्य हो रही है और बाजार से फीडबैक आ रहा है, वैसे-वैसे सरकार उसमें सुधार कर रही है।

शुरू में बहुत सी ऐसी वस्तुएं थीं, जिन्हें पांच फीसदी के स्लैब में होनी चाहिए थीं, पर वह 12 या 18 फीसदी स्लैब में थीं। सरकार ने इस बात की समझी और अब सुधार कर रही है। जीएसटी लागू होने के बाद यह करीब चौथी बार है, जब सरकार ने टैक्स व अन्य नियमों में राहत दी है। इसलिए इसे किसी चुनाव से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जैसा विपक्ष कर रहा है।

जीएसटी में सुधार बाजार के फीडबैक के आधार पर किया जा रहा है। इसे लचीला बनाए रखना जरूरी है। टैक्स ढांचे में राहत भरे बदलाव से महिला, किसान, मध्यवर्ग, व्यापारी समेत लगभग सभी वर्ग लाभान्वित होंगे। सेनेटरी नैपकिन को टैक्स मुक्त कर महिलाओं को राहत दी गई है। हैंडीक्राफ्ट, स्टोन, मार्बल और लकड़ी की बनी मूर्तियां, फूल वाली झाड़ू, साल पत्ते पर अब टैक्स नहीं लगेगा।

हैंडबैग्स, जूलरी बॉक्स, पेटिंग के लिए लकड़ी के बॉक्स, आर्टवेयर ग्लास, हाथ से बने लैंप, बांस से बने सामनों, हैंडलूम की दरी पर टैक्स में कमी करने से दस्तकारी क्षेत्र को फायदा होगा। टीवी (27 इंच तक), वॉशिंग मशीन, रिफ्रिजरेटर, विडियो गेम्स, लिथियम आयन बैट्रीज, वैक्यूम क्लीनर, ड्रायर, पेंट, परफ्यूम, टॉइलट स्प्रे पर 28 फीसदी टैक्स घटाकर 18 फीसदी कर तथा फूड ग्राइंडर, मिक्सर, स्टोरेज वॉटर हीटर, वॉटर कूलर, मिल्क कूलर, आइसक्रीम कूलर्स पर टैक्स में 10 फीसदी की कमी कर मध्यवर्ग को राहत दी गई है।

1000 रुपये तक के फुटवेयर पर अब 5 फीसदी टैक्स लगेगा, पहले यह राशि 500 रुपये थी। तराशे हुए कोटा पत्थर, सैंड स्टोन और इसी गुणवत्ता के अन्य स्थानीय पत्थरों पर जीएसटी की दर को 18 से घटाकर 12 प्रतिशत करके कंस्ट्रक्शन क्षेत्र को रियायत दी गई है। कपड़ा के बाद सबसे अधिक रोजगार इसी क्षेत्र में सृजित होते हैं।

एथनॉल पर भी टैक्स को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया है। इससे चीनी उद्योग और किसानों को फायदा होगा। व्यापारियों के लिए नियम आसान किया गया है। अब सालाना पांच करोड़ रुपये से नीचे के कारोबार करने वाले तिमाही रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। मासिक रिटर्न नहीं भरना होगा। इस फैसले से 93 प्रतिशत व्यापारिक इकाइयों को सुविधा होगी। छोटे कारोबारियों की लंबे समय से ऐसी मांग थी।

इन बदलावों के लिए संसद से संशोधन पास कराने होंगे। हालांकि जीएसटी में अभी भी कई सुधार किए जाने बाकी हैं। जैसे पेट्रोलियम समेत कई वस्तुओं को इसके दायरे में लाया जाना है। सेवा कर की दर पांच से 12 फीसदी के स्लैब में होनी चाहिए। 28 फीसदी कर स्लैब को समाप्त किया जाना चाहिए। 28 व 18 फीसदी को मर्ज कर 16 फीसदी का उच्चतम कर स्लैब बनाया जा सकता है। इन सुधारों से जहां कंज्यूमर सेक्टर की सुस्ती दूर होगी, वहीं अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी तेज होगी।

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