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GSAT-19: कई गुना बढ़ेगी इंटरनेट की स्पीड

इसरो ने देश के सबसे बड़े स्वदेशी रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 डी-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।

GSAT-19: कई गुना बढ़ेगी इंटरनेट की स्पीड
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इसरो ने देश के सबसे बड़े स्वदेशी रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 डी-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। भारत का सबसे भारी यह रॉकेट संचार उपग्रह जीसैट-19 (वजन 3136 किलोग्राम) को लेकर गया है।

इसकी कामयाबी से भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने में भारत सक्षम हो गया है। भारत से अब तक राकेश शर्मा ही 1984 में अंतरिक्ष में पहुंचे हैं। वह भी रूस की ओर से भेजे गए अंतरिक्ष यान से।

लेकिन अब अंतरिक्ष में सूखा जल्द समाप्त होगा। इसरो दो से तीन साल में वह पहले भारतीय नागरिक को अंतरिक्ष में भेजेगा। पहली बार किसी महिला को यह मौका मिल सकता है। फिलहाल रूस, अमेरिका और चीन के पास इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता है।

इसरो के इतिहास में भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) एमके-3 डी-1 का प्रक्षेपण मील का पत्थर है। निश्चित ही यह समूचे देशवासियों के लिए गौरव का क्षण है। अब इसके जरिये बड़े उपग्रहों का देश में ही प्रक्षेपण हो सकेगा।

यह साधारण, बेहतर पेलोड वाला और मजबूत प्रक्षेपण यान है। यह 4000 किलो तक के पेलोड को उठाकर जीटीओ और 10 हजार किलो तक के पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने में सक्षम है। इसका कुल वजन 640 टन (1 टन =1000 किग्रा) है।

यह भविष्य के भारत का रॉकेट है। संचार उपग्रह जीसैट-19 देश की हाई स्पीड इंटरनेट युग में छलांग है। डिजिटल क्रांति के लिए देश में हाई स्पीड इंटरनेट की बहुत जरूरत है। सरकार जिस तेजी से देश को डिजिटल दौर में ले जा रही है, उसमें इंटरनेट की स्पीड भी उतनी तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता है।

जीसैट-19 इस काम को बखूबी करेगा। यह संचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाला उपग्रह है। यह पुराने 6-7 संचार उपग्रहों के समूह के बराबर होगा। यह मेक इन इंडिया उपग्रह डिजिटल भारत को सशक्त करेगा। पहली बार किसी उपग्रह पर कोई ट्रांसपोंडर नहीं होगा।

यह प्रति सेकंड चार गीगाबाइट डेटा देने में सक्षम होगा। अभी क्षमता एक गीगाबाइट प्रति सेकेंड की है। इसकी उम्र 15 वर्ष होगी। इसे स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देखा जा सकता है। जीसैट -19 में मॉडर्न प्लेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।

यह देश में तैयार सबसे वजनी सैटेलाइट है। यह अंतरिक्ष आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके तेज स्पीड वाली इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने में सक्षम है। इसरो की डेढ़ साल के अंदर दो अन्य संचार उपग्रहों जीसैट-11 और जीसैट-20 को भी अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।

जीसैट-11 का साल के अंत में प्रक्षेपण किया जाएगा। इसे अमेरिका की मदद से भेजा जाएगा। यह प्रति सेकंड 13 गीगाबाइट डेटा स्पीड देने में सक्षम होगा। जीसैट-20 का प्रक्षेपण वर्ष 2018 में किया जाएगा।

इसका डेटा रेट 60-70 गीगाबाइट प्रति सेकंड होगा। फिलहाल अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित 41 भारतीय उपग्रहों में से 13 संचार उपग्रह हैं। देखते ही देखते भारत ने संचार उपग्रह के क्षेत्र में काफी प्रगति कर ली है। इ

से जारी रखने की आवश्यकता है और बजट आड़े नहीं आना चाहिए। मंगलयान के बाद एक साथ सबसे अधिक 104 उपग्रह लांच कर इसरो ने अपनी क्षमता पहले ही साबित कर दी है। वह और भी इतिहास रचेगा। वैज्ञानिकों को बधाई।

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