Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ग्रीस संकट से सहमे दुनिया भर के बाजार, ATM पर लगी पाबंदी

भारी कर्ज में डूबे ग्रीस पर वित्तीय संकट का असर गहराता नजर आ रहा है।

ग्रीस संकट से सहमे दुनिया भर के बाजार, ATM पर लगी पाबंदी
X
भारी कर्ज में डूबे ग्रीस पर वित्तीय संकट का असर गहराता नजर आ रहा है। वहां सभी बैंकों को छह जुलाईतक बंद कर दिया गया है। ग्रीस सरकार ने एटीएम ट्रांजैक्शन पर भी पाबंदी लगा दी है। लोग 60 यूरो से अधिक नहीं निकाल सकते हैं और अनुमति बिना वे देश से बाहर पैसे नहीं भेज सकते हैं। तब तक शेयर बाजार भी बंद रहेगा। गौरतलब है कि मंगलवार तक ग्रीस को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को डेढ़ अरब यूरो का कर्ज चुकाना है। अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसे दिवालिया तक करार दिया जा सकता है। ऐसे में इसका असर यूरोप समेत विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उधर, यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने भी सोमवार को ग्रीस की बैंकिंग सिस्टम को इमरजेंसी फंड देने से मना कर दिया।
उसने यह कदम ग्रीस और यूरो जोन के देशों के बीच बातचीत विफल होने के बाद उठाया है। अब दुनियाभर के शेयर बाजारों की नजर पांच जुलाई पर है, जब ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास प्रस्तावित राहत पैकेज समझौते पर जनमत संग्रह का ऐलान करेंगे। जाहिर है, कजरें के बोझ तले दबे देश ग्रीस के अब यूरो जोन में बने रहने की कोशिशें नाकाम नजर आ रही हैं। ग्रीस संकट के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूट गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीस संकट 2008 के संकट की तरह नहीं है। हालांकि, छोटी अवधि में इसका असर देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसका असर देखने को नहीं मिलेगा।
दरअसल, बाजार इसका अंदाजा पहले से ही लगा चुका है, यही वजह है कि संकट का प्रभाव कम होगा। ग्रीस का कर्ज संकट अपनी आर्थिक हैसियत से अधिक खर्च करने का नतीजा है। अपने बेतहाशा खर्च के कारण आज वह दिवालिया होने के मुहाने पर खड़ा है। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया के आर्थिक इतिहास में वह ऐसा पहला देश होगा, जो डिफॉल्टर घोषित किया जाएगा। 2001 में ग्रीस इस प्रलोभन से कि उसे आसानी से कर्ज मिलेगा, यूरो जोन में शामिल हुआ था। वह अपनी हैसियत से अधिक कर्ज प्राप्त करने के लिए यूरो जोन व दुनिया को अपने आर्थिक हालात के मद्देनजर धोखे में रखा। इसके लिए उसने खातों में हेर-फेर भी की जिससे उसकी विश्वसनीयता काफी गिर गई।
हालांकि इसके बाद भी ग्रीस को यूरो जोन, यूरोपियन सेंट्रल बैंक व आईएमएफ से राहत पैकेज मिलते रहे पर वह सुधारों की राह पर धीमा चलता रहा व राहत पैकेजों की शतरें का पालन करने में विफल रहा। आज उस पर 340 अरब यूरो का कर्ज है। यह कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद से भी बहुत अधिक है। दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में एक ग्रीस के लोग आज आर्थिक संकट के कारण बेजार हैं। अब जब कई सालों से चल रहा ग्रीस संकट अपने चरम पर पहुंच गया है, तो शायद दुनिया रिर्जव बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की बातों को अधिक वास्तविक ढंग से समझ सकती है, जो हमेशा उनको अपने खचरें पर लगाम लगाने की सलाह देते हैं। यह दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी इस मायने में सबक है कि अगर आप अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नहीं कर पाते हैं, तो आपकी हालत भी ग्रीस के जैसी हो सकती है।
यह प्रश्न इसलिए उठता है कि भारत के दंगों में झंडा लेकर हमला करने की घटनाएं शायद ही कहीं हुई हों। झंडा लेकर लोग समूह में हमला करने निकले हों, इसका रिकॉर्ड तो उत्तर प्रदेश पुलिस के पास होगा नहीं। दंगा और झंडा में आखिर क्या संबंध है? हां, फिल्मों में अवश्य ऐसे दृश्य देखे गए हैं। तो उत्तर प्रदेश की पुलिस का यह अभ्यास फिल्मों से प्रेरित था या वाकई दंगा से निपटने की भावना से किया गया था? अगर दंगों से निपटने की भावना से प्रेरित था तो इसके लिए किसी झंडे की आवश्यकता ही नहीं थी। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में 29 दंगों की घटनाएं बताई जा रही हैं। इनमें से कितने दंगे हैं जिनमें भगवा झंडा लेकर हमला किया गया? या कितने दंगे हैं जिनमें झंडे का उपयोग हुआ? एक भी नहीं। मुजफ्फरनगर दंगे की सिहरन भरी घटनाएं हम सब आज तक नहीं भूले हैं। कोई एक घटना उत्तर प्रदेश पुलिस बता दे जिसमें भगवा झंडे या किसी प्रकार के झंडे का प्रयोग हुआ हो।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top