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भारत का पोलियो मुक्त होना बड़ी उपलब्धि

पोलियो मुक्त देश घोषित होना भारत के लिए वाकई खुश होने का क्षण है।

भारत का पोलियो मुक्त होना बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली. पोलियो मुक्त देश घोषित होना भारत के लिए वाकई खुश होने का क्षण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पोलियो प्रभावित देशों की सूची में से भारत का नाम पहले ही हटा लिया था। पिछले तीन साल से देश में पोलियो की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। ऐसे में पिछले दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र की ये सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। 1980 में चेचक के बाद यह दूसरा मौका है जब देश में टीके से किसी बीमारी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
1985 में देश में करीब दो लाख पोलियो के मामले उजागर हुए थे। 2009 तक भारत में पूरी दुनिया के आधे से अधिक पोलियो के मामले दर्ज किए जाते थे। वहीं 2010 में मात्र 42 ही शिकायतें आई थीं। 2011 में केवल एक मामला, पश्चिम बंगाल में, सामने आया था। इस सफलता में पल्स पोलिया अभियान का प्रभावकारी क्रियान्वयन, 24 लाख स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं व सामाजिक संस्थाओं की बड़ी भूमिका है। यह उपलब्धि दिखाती हैकि यदि ईमानदारी से कोई कार्य किया जाए तो लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि भारत को यह सफलता काफी पहले हासिल कर लेनी चाहिए थी परंतु लोगों में पोलियो उन्मूलन अभियान के प्रति जागरूकता में कमी के कारण इसमें देरी हुई।
समाज में फैला अंधविश्वास और अज्ञानता के कारण भी पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को दो बूंद जिंदगी की पिलाने में आनाकानी करते रहे। जागरूकता फैलने के लिए अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर जैसे नायकों को मैदान में उतारा गया, सरकारी स्तर पर भी प्रयास तेज किए गए और लाखों स्वयंसेवी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच साल के बच्चों को पोलियोरोधी टीका पिलाए, तब कहीं जाकर देश को आज यह मुकाम हासिल हुआ है। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्व एशिया रीजन भी पूरी तरह पोलियो मुक्त हो गया है। अब तक इस क्षेत्र में भारत ही पोलियो मुक्त नहीं हुआ था। पोलियो का वायरस पांच साल के बच्चों को अपना शिकार बनाता है और यह लाइलाज है।
पहली बार 1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा में पोलियो के विश्वव्यापी उन्मूलन के प्रस्ताव को पारित किया गया था। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन, रोटरी इंटरनेशनल और यूनिसेफ की सक्रिय भागीदारी रही है। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक पोलियो उन्मूलन प्रयास के परिणामस्वरूप 1995 में पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान आरंभ किया। वैसे दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं, जो पहले पोलियो मुक्त घोषित हुए थे, लेकिन बाद में वहां पोलियो के वायरस लौट आए। वहीं पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में पोलियो का खतरा बरकरार होने से हमें खतरा भी है।
लिहाजा भारत को सतर्क रहना होगा। हालांकि एक ओर हमें यह सफलता मिली है वहीं दूसरी ओर भारत अब भी शिशु मृत्युदर और कुपोषण में दुनिया में पहले स्थान पर है। हर साल लाखों बच्चे दस्त, मलेरिया और निमोनिया जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से मरते हैं। देश में पोलियो उन्मूलन अभियान का एक सशक्त नेटवर्क सामने आया है। हमें इससे सबक लेनी चाहिए। अब समय आ गया हैकि इससे सीख लेते हुए सरकार देश में ऐसा ढांचा खड़ा करे जिससे बच्चों से जुड़ी तमाम बीमारियों से मुक्ति पाया जा सके।
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