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वायु प्रदूषण में कमी लाने को कदम उठाएं सरकारें

वायु प्रदूषण देशभर के शहरों की समस्या है।

वायु प्रदूषण में कमी लाने को कदम उठाएं सरकारें
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दिवाली के बाद से वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बनकर उभरा है। खासकर दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में जहरीले वातावरण का खासा असर देखा जा रहा है। दिल्ली से सटे वेस्ट यूपी के क्षेत्र में भी वायु प्रदूषण का प्रभाव पसरा हुआ है। हालांकि एयर पोल्यूशन देशभर के शहरों की समस्या है है और वायु प्रदूषण पर राज्य सरकारों की उदासीनता नई बात नहीं है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के चलते दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगानी पड़ी है।
एनजीटी ने केंद्र सरकार को भी तलब किया है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को 10 साल पुराने डीजल वाहन बंद करने पर अमल करने को कहा है, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान के सचिवों को तलब किया है और राज्यों से 8 नवम्बर तक रिपोर्ट मांगी है। चिंता की बात यह है कि जागरूकता अभियान के बावजूद दिवाली पर अंधाधुंध पटाखों का इस्तेमाल, हरियाणा-पंजाब-राजस्थान में पराली दहन और जहरीली गैस छोड़ती गाड़ियों की रेलम-पेल के चलते दिल्ली और आस-पास के क्षेत्र में हवा बेहद प्रदूषित हो गई है। दिल्ली में अभी हवा का प्रदूषण 6 गुना ज्यादा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से जारी की गई दो तस्वीरों में पराली जलते देखा गया है।
हवा में प्रदूषण का स्तर इतना घना है कि उसने स्मॉग का रूप ले लिया है। वातावरण में धुंध देखकर लोगों को सर्दी के मौसम के आने का आभास होता है, लेकिन मौसम विज्ञानियों ने अगाह किया है कि यह ठंड की धुंध नहीं है, बल्कि खतरनाक स्मॉग है। इस कारण जहां रात में घना कोहरा छाया लगता है, वहीं दिन में भी चार बजे के बाद दृष्यता कम होने लगती है। स्मॉग प्रदूषित हवा का एक प्रकार है। यह शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों स्मोक और फॉग से मिलकर बना है। स्मॉग शब्द का इस्तेमाल 20वीं सदी की शुरूआत से हो रहा है। इसका सीधा असर आम लोगों के जनजीवन पर पड़ा है। गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है।
सड़कों पर वाहनों के टकराने के मामले बढ़ गए हैं। लोगों को आंख व सांस की तकलीफें होने लगी हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक स्मॉग होने पर मिर्शित प्रदूषण करने वाले हानिकारक तत्व हवा में मौजूद रहते हैं। पटाखों के धुएं से हवा में सूक्ष्म पर्टिकुलेट कण, ओजोन, नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड बढ़ जाती है। पराली जलाने से सीओटू और सीओ गैस निकलती हैं। गाड़ियों के धुएं से कार्बन मोनोक्साइड व सल्फर डाईऑक्साइड गैस निकलती है। ये सभी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। इस समय स्मॉग के चलते हवा में हानिकारण सूक्ष्म कणों की मोटाई करीब 2.5 माइक्रोमीटर होती है, जो सांस के साथ फेफड़ों में घुस जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। इन्हीं कणों के कारण आंखों में जलन, आंखें लाल होना, आंखों में एलर्जी आदि होती है।
टीबी व दमा के रोगियों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एक अरसे से स्मॉग और उससे सेहत को पहुंचने वाले नुकसान के प्रति देशों को जागरूक करने की कोशिश करता रहा है। पिछले सालों में डब्ल्यूएचओ ने बार-बार कहा है कि इन हानिकारक पदाथरें के लिए एक सीमा तय करनी चाहिए नहीं तो बड़ें शहरों में रहने वाले लोगों को बहुत नुकसान पहुंचेगा। ऐसे में सरकारों को प्रदूषण कम करने के उपायों पर तेजी से काम करना चाहिए। सरकार को एक तरफ जहां ट्रैफिक से जुड़े व विजिबिलिटी बढ़ाने संबंधी प्रिकॉशनरी कदम उठाने चाहिए, वहीं हवा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सख्त उपाय करना चाहिए। इस समय केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।
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