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संपादकीय लेख : कोरोना वैक्सीन की बर्बादी रोके सरकार

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से अब तक 10 करोड़ में से 44 लाख टीके बर्बाद हो चुके हैं। देश में हर दिन 6 फीसदी डोज वेस्ट हो रही है। यह चिंताजनक है।

संपादकीय लेख : कोरोना वैक्सीन की बर्बादी रोके सरकार
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Haribhoomi Editorial : एक तरफ देश में राज्यों से कोविड वैक्सीन की कमी की शिकायत आ रही है, जिस पर केंद्र सरकार को सफाई देनी पड़ रही है कि देश में वैक्सीन की कमी नहीं है, तो दूसरी तरफ लाखों टीके बर्बाद हो रहे हैं। टीके की बर्बादी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वैक्सीन बर्बाद होने से अच्छा है कि इसे सभी को लगाया जाए, चाहे वे किसी भी उम्र के हों।

दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से अब तक 10 करोड़ में से 44 लाख टीके बर्बाद हो चुके हैं। देश में हर दिन 6 फीसदी डोज वेस्ट हो रही है। यह चिंताजनक है। सोचने वाली बात है कि देश में अभी कोरोना की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है, यहां तक कि डबल म्यूटेंट अधिक खतरनाक रूप से पांव पसार रहा है। रोजाना दो लाख से अधिक नए मरीज आ रहे हैं। बढ़ते मामलों के पीछे यही 'डबल म्यूटेंट' वायरस को जिम्मेदार बताया जा रहा है। यह वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है और तेजी से फैलता है। भारत के इस नए वैरिएंट को वैज्ञानिक तौर पर बी.1.617 नाम दिया गया है, जिसमें दो तरह के म्यूटेशंस (ई484क्यू और एल452आर) हैं। यह वायरस का वह रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है। एल452आर स्ट्रेन अमेरिका के कैलिफोर्निया में, जबकि ई484क्यू स्ट्रेन भारत में पाया जाता है। डबल म्यूटेंट वायरस की पहचान अब तक कम से कम पांच राज्यों में की जा चुकी है, जिसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश शामिल हैं। दोनों स्ट्रेन ज्यादा संक्रमण दर के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में वैक्सीन डोज का खराब हो जाना हमारे सिस्टम की लापरवाही उजागर करता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 'यह बहुत बड़ी बर्बादी है। जो वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, उन्हें लगा दें। जिसे आप लगा सकते हैं, उसे लगाइए। चाहे वह 16 साल का हो या 60 साल का, सभी को वैक्सीनेशन की जरूरत है। महामारी भेदभाव नहीं करती है।' इस बार नौजवान भी खूब प्रभावित हो रहे हैं। कई युवाओं की जान जा चुकी है। यदि दिन के आखिर में कुछ डोज बचते हैं तो वे भी लगाए जा सकते हैं जो इसके लिए तय दायरे में नहीं आते। उच्च न्यायालय कोरोना के टेस्ट से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था, इस याचिका पर 19 अप्रैल सोमवार को सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान हाईकोर्ट की यह टिप्पणी अहम है कि 'महामारी बहुत ज्यादा तेजी के साथ फैल रही है और हमारी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी ढांचा ढहने की कगार पर है।

आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी से पता चला है कि भारत में जनवरी से वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद पांच राज्यों में 7 फीसदी से ज्यादा डोज बर्बाद हो गई। केंद्र के मुताबिक, तमिलनाडु में 12% से ज्यादा, हरियाणा में 9.74%, पंजाब में 8.12%, मणिपुर में 7.8% और तेलंगाना में 7.55% डोज बर्बाद हुई हैं। सबसे कम वैक्सीन खराब करने वाले राज्यों में केरल, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा, दमन और दीव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप हैं। इन राज्यों में वैक्सीन का वेस्टेज लगभग जीरो है। इन राज्यों के प्रबंधन से अधिक डोज बर्बाद करने वाले राज्य सबक लें। टीकाकरण अभियान में जुटे कर्मी कोशिश करें कि एक भी डोज बर्बाद न हो, सरकारों को भी टीके की बर्बादी रोकने का पुख्ता इंतजाम करना चाहिए।

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