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Editorial : देश की सरकारी संस्थाएं समझें अपनी जिम्मेदारी

देश में कोविड महामारी की ऐसी डरावनी स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? नागरिक, सरकार या कोई और? मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी बताती है कि बीते कुछ सप्ताह में कोरोना के केसों में तेजी से इजाफे के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। हाईकोर्ट ने कहा कि ‘गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए।

Editorial : देश की सरकारी संस्थाएं  समझें अपनी जिम्मेदारी
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Haribhoomi Editorial : अगर कहें कि देश में कोविड संक्रमण की स्थिति विस्फोटक है, अस्पतालों में हालात बेकाबू हैं, चीजें सरकार के नियंत्रण से बाहर हो गई हैं और निराश जनता बेबस है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। देश में कोरोना की दूसरी लहर का ऐसा कहर है कि अप्रैल में लगातार रिकार्ड तोड़ नए मरीज मिल रहे हैं। भारत रोजाना के नए मामलों में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। रोजाना तीन लाख से अधिक नए केस आ रहे हैं।

आईआईटी कानपुर व हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि 4-8 मई के बीच रोजाना संक्रमण का आंकड़ा 4.4 लाख तक को छू सकता है। आईआईटी के मैथमैटिकल मॉडल के अनुसार, भारत में 14-18 मई के बीच दूसरे लहर की पीक होगी, जिसमें एक्टिव केस 38-48 लाख तक जा सकते हैं। अभी एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 28 लाख से ऊपर है। हालांकि इस महीने के शुरू में, आईआईटी के वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान लगाया था कि देश में 15 अप्रैल तक इलाजरत मरीजों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह बात सच साबित नहीं हुई, लेकिन जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं, पीक का अनुमान सच साबित हो सकता है, तब यह विस्फोटक स्थिति होगी। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मौंतें संकेत दे रही हैं कि हालात बेकाबू हो चुके हैं।

नीति आयोग ने जिस तरह देशवासियों से घर में भी मास्क लगाने की राय दी है, इससे लग रहा है कि अब स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर हो गई है। नीति आयोग में स्वास्थ्य मंत्रालय के सदस्य डा. वीके पॉल ने कहा, 'अब वक्त आ गया है, जब हमें घर के अंदर परिवार के साथ रहते हुए भी मास्क पहनना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि मेहमानों को घर पर न बुलाएं।' आयोग ने शोध का हवाला देते हुए कहा है कि 'अगर एक व्यक्ति फिजिकल डिस्टेंसिंग न अपनाए तो वह 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है, पर अगर इन्फेक्टेड और अनइन्फेक्टेड दोनों ने मास्क लगाया हो तो इन्फेक्शन का खतरा घटकर 1.5 फीसदी ही रहेगा।' संक्रमितों के परिवार की बेबसी का ऐसा आलम है कि अस्पतालों में जगह नहीं मिलने, ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर की कमी, दवाओं की किल्लत आदि के चलते उनके आंखों के सामने उनके अपने दम तोड़ रहे हैं और वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

देश में कोविड महामारी की ऐसी डरावनी स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? नागरिक, सरकार या कोई और? मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी बताती है कि बीते कुछ सप्ताह में कोरोना के केसों में तेजी से इजाफे के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। हाईकोर्ट ने कहा कि 'गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी को अदा करने में विफल रहा है। चुनाव में राजनीतिक दलों ने कोरोना प्रोटोकॉल का जमकर उल्लंघन किया है और आयोग उन्हें रोकने में नाकाम रहा है। आयोग के चलते स्थिति इतनी विकराल हुई है और वह राजनीतिक दलों पर नकेल कसने में नाकाम रहा है।' केंद्रीय चुनाव आयोग को देशवासियों को जवाब देना चाहिए। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन आपूर्ति में सरकारी लापरवाही को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी कि 'बाधा पहुंचाने वालों को लटका दिया जाएगा।' ऑक्सीजन आपूर्ति और कोरोना से निपटने को लेकर केंद्र सरकार से नेशनल प्लान मांगा है। अदालतों की सख्त टिप्पणी से साफ है कि हमारी सरकारी एजेंसियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं।

सरकारी बैठक वर्चुअल जबकि बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां, चुनावी राज्यों में कोविड से बचाव मानदंडों में ढिलाई, कुंभ का आयोजन, क्रिकेट मैच, अनियंत्रित बाजार आदि ऐसी लापरवाहियां थीं, जिससे सरकार बच सकती थी। संवैधानिक संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए व उसी के अनुरूप संजीदा बर्ताव करना चाहिए। सरकार चाहे तो स्कूल, कालेज, स्टेडियमों, धार्मिक परिसरों में अस्थायी अस्पताल बना सकती है।

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