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अच्छी खबर / बिजनेस रैंकिंग में भारत ने रचा इतिहास, कारोबार करना हुआ और आसान

आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर है। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) इंडेक्स में भारत ने एक वर्ष में 23 अंक की छलांग लगाई है। भारत 100वें से सीधे 77वें स्थान पर आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के महज तीन साल में भारत ने 65 पायदान की छलांग लगाई है।

अच्छी खबर / बिजनेस रैंकिंग में भारत ने रचा इतिहास, कारोबार करना हुआ और आसान

आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर है। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) इंडेक्स में भारत ने एक वर्ष में 23 अंक की छलांग लगाई है। भारत 100वें से सीधे 77वें स्थान पर आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के महज तीन साल में भारत ने 65 पायदान की छलांग लगाई है। अब तक किसी भी बड़े देश ने यह उपलब्धि हासिल नहीं की है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने उम्मीद जताई कि भारत अगले 3 साल में कारोबार सुगमता रैंकिंग में शीर्ष 25 देशों की सूची में स्थान बना सकता है और अगले साल भारत टॉप 50 देशों में आ सकता है। पीएम मोदी ने सत्ता में आने के बाद 2014 में पांच साल में 50 देशों में आने का लक्ष्य रखा था और उसके बाद आर्थिक क्षेत्र में एकल खिड़की समेत अनेक प्रक्रियागत सुधार किए थे। उन्होंने कई बेकार व बोझिल कानूनों को रद किया और जीएसटी लागू किया। अब विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव जीएसटी के जरिए आया है। जीएसटी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। पिछले साल की रैंकिंग में जीएसटी को शामिल नहीं किया गया था। जीएसटी ने कारोबार की शुरूआत करना आसान बना दिया है, क्योंकि इसमें कई सारे एप्लीकेशन फॉर्म को इंटिग्रेट कर एक सिंगल जनरल इनकॉर्पोरेशन फॉर्म लाया गया है। इससे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेज हुई है। विश्व बैंक का आंकलन सही है कि जीएसटी के चलते भारत में कारोबार की प्रक्रिया और टैक्स संग्रहण के ढांचे में आमूल-चूल सुधार हुआ है। आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। छह माह में दूसरी बार है कि जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ। अक्टूबर से पहले अप्रैल में भी जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक था। सरकार को उम्मीद थी कि नवंबर-दिसंबर में एक लाख का आंकड़ा पार करेगा, लेकिन अक्टूबर में ही यह उपलब्धि हासिल हो गई। एक जुलाई 2017 को देश में जीएसटी लागू हुआ था, शुरू के महीनों को छोड़कर कलेक्शन में लगातार सुधार हुआ है। हालांकि विपक्ष अभी तक जीएसटी का आलोचक बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष भी जीएसटी की सराहना कर चुका है। ईज ऑफ डूइंग बिजनस में ग्लोबल रैंकिंग सुधरने का स्पष्ट मतलब है कि भारत कारोबार करने के लिहाज से बेहतर देश होता जा रहा है, यहां कारोबारी व प्रशासनिक नियम सरल हो रहे हैं। यानी बिजनेस रजिस्ट्रेशन, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, टैक्स पेमेंट मेकेनिज्म आदि में काफी सुधार हुए हैं। विदेशी निवेशक यह देखते हैं कि किस देश में बिजनेस करना आसान है, कहां कारोबारी मानक विश्वस्तरीय है? ईज ऑफ डूइंग बिजनस रैंकिंग में सुधार से विदेशी निवेश बढ़ेंगे। जिसका असर आर्थिक वृद्धि के तौर पर देखने को मिलेगा। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि कारोबारी सुगमता में सुधार अर्थव्यवस्था में ‘अच्छे दिन’ का परिचायक है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी माना है कि वर्ष 2018 व 2019 में भारत की विकास की रफ्तार तेज बनी रहेगी। भारत किसी भी ग्लोबल आर्थिक दबाव से निकलने में सक्षम है। अभी रुपये की कमजोरी व कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था दबाव में है। अगले दो साल भारत 7.5 फीसदी जीडीपी दर से विकास करता रहेगा। भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते और आसियान, ब्रिक्स, जी-20, जी-77, ग्रुप-4 जैसे मंचों के जरिये भी अपनी अर्थव्यवस्था में जान फूंक रहा है। यही कारण है कि वैश्विक सुस्ती के बावजूद भारत सबसे तेज गति से विकास कर रहा है। ईज ऑफ डूइंग रैंकिंग बेहतर होने से भारत की आर्थिक रफ्तार और तेज होगी।

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