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अच्छी खबर / सहयोग के नए शिखर पर भारत और जापान

भारत और जापान के रिश्ते उत्तरोत्तर प्रगाढ़ होते गए हैं। व्यापार, तकनीक, कूटनीति से लेकर सामरिक क्षेत्र तक दोनों देशों के आपसी संबंध मजबूत हैं। इस वक्त जिस तेजी से वैश्विक परिस्थतियां और समीकरण बदल रहे हैं, उसमें दोनों प्रमुख एशियाई देशों की दोस्ती के व्यापक कूटनीतिक मायने हैं। वैश्विक मंच पर जापान हमेशा भारत के साथ खड़ा दिखता है।

अच्छी खबर / सहयोग के नए शिखर पर भारत और जापान

भारत और जापान के रिश्ते उत्तरोत्तर प्रगाढ़ होते गए हैं। व्यापार, तकनीक, कूटनीति से लेकर सामरिक क्षेत्र तक दोनों देशों के आपसी संबंध मजबूत हैं। इस वक्त जिस तेजी से वैश्विक परिस्थतियां और समीकरण बदल रहे हैं, उसमें दोनों प्रमुख एशियाई देशों की दोस्ती के व्यापक कूटनीतिक मायने हैं। वैश्विक मंच पर जापान हमेशा भारत के साथ खड़ा दिखता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा से दोनों देश के रिश्तों को नया जोश मिला है। धार्मिक व सांस्कृतिक रूप से बेहद करीब भारत और जापान के बीच पीएम की इस यात्रा के दौरान छह समझौते हुए हैं। इसके तहत दोनों मुल्क हाई स्पीड ट्रेन, नेवी कॉर्पोरेशन, डिजिटल पार्टनरशिप से साइबर स्पेस, स्वास्थ्य, रक्षा क्षेत्र, समुद्र से अंतरिक्ष में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के बीच 2+2 वार्ता को लेकर भी सहमति बनी है। जापान भारत के नेतृत्व में इंटरनेशनल सोलार अलायंस में भी आगे बढ़ेगा। जापान ने जिस भव्यता व गर्मजोशी से पीएम मोदी का स्वागत किया है और जापानी पीएम शिंजो आबे ने पीएम मोदी को अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया है, वह दोनों देशों व नेताओं के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।

इस वक्त चीन की जाल में फंसे पाकिस्तान के खस्ता आर्थिक हालात, सरकार बदलने के बावजूद भारत के खिलाफ पाक का आतंकवाद को बढ़ावा देना, श्रीलंका में राजनीतिक उठापटक, मलेशिया में चीनी दखल, ईरान पर यूएस का आर्थिक प्रतिबंध, अमेरिका व रूस में बढ़ती खटास समेत अमेरिका और चीन के बीच तीखे हो रहे ट्रेड वार आदि कुछ वैश्विक स्थितियां-परिस्थितियां हैं,

जिसमें भारत को विश्व स्तर पर जापान जैसे मजबूत सहयोगी की जरूरत है। एशिया में भी भारत व चीन के बीच ठंडा गरम संबंध के चलते भारत व जापान एक-दूसरे के पूरक हैं। जापान के पीएम शिंजो आबे ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की अहम भूमिका को रेखांकित किया है। मोदी सरकार विकास के वादे के साथ सत्ता में आई है। भारत की विकास यात्रा में जापान बड़ा भागीदार रहा है।

मेट्रो रेल, ऑटो प्रोजेक्ट, हाई स्पीड ट्रेन, बुलेट ट्रेन, तकनीक आदि क्षेत्र में जापान भारत में बड़ा निवेशक है। तीन साल पहले जब पीएम बनने के बाद मोदी पहली जापान यात्रा पर गए थे, उस वक्त जापान ने भारत के साथ 35 अरब डालर निवेश का करार किया था। इस बार भी जब मोदी 13वें भारत-जापान वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान में हैं और उन्होंने वहां बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया है,

तब 2.5 अरब डालर भारत में निवेश की घोषणा की गई है। इससे निश्चित ही भारत और जापान के बीच ट्रेड और बढ़ेंगे। दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत सागर में भी भारत और जापान मिलकर चीन को संतुलित रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। समुद्र में वैश्विक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर एक अलायंस बना रहे हैं।

पिछले साल ही शिंजो आबे को एक कार्यकाल और मिला है। 2019 में भारत में आम चुनाव होना है। पीएम मोदी की कोशिश रोजगार फ्रंट पर करिजल्ट देने की है। जापान के निवेश से नए रोजगार के सृजन होने में मदद मिल सकती है। हाल में शिंजो आबे ने चीन की भी यात्रा की है। एशिया में अगर भारत, चीन और जापान मिल कर शांति और विकास के लिए काम करें,

तो एशियाई देशों की यूरोपीय व अमेरिकी निर्भरता कम होगी और तब निश्चित ही 21वीं सदी एशिया की होगी। हालांकि चीन की विस्तारवादी मानसिकता इसमें बाधक है। लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक भारत और जापान विकास व शांति के लिए आपसी सहयोग के नए कीर्तिमान स्थापित करते रहेंगे।

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