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योगेश कुमार गोयल का लेख : धरती के भगवान चिकित्सक

जिस प्रकार दुनियाभर में आज चिकित्सक अपनी जान की परवाह किए बिना लाखों लोगों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं, ऐसे में वे सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं।

योगेश कुमार गोयल का लेख : धरती के भगवान चिकित्सक

योगेश कुमार गोयल

आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, जिससे विश्व की एक करोड़ से ज्यादा आबादी संक्रमित हो चुकी है और पांच लाख से अधिक व्यक्ति प्राण गंवा चुके हैं। तस्वीर का दूसरा पहलू देखें तो संक्रमितों की बड़ी संख्या में से 50 लाख से भी ज्यादा को ठीक करने में भी सफलता मिली है और इस सफलता का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वे हैं हमारे चिकित्सक। जिस प्रकार दुनियाभर में आज चिकित्सक अपनी जान की परवाह किए बिना लाखों लोगों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं, ऐसे में वे सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं। आज निजी चिकित्सा तंत्र भले ही मुनाफाखोरी के व्यवसाय में परिवर्तित हो चुका है, लेकिन फिर भी इस सच को नकारा नहीं जा सकता कि कोरोना हो या कैंसर, हृदय रोग, एड्स, मधुमेह इत्यादि कोई भी बीमारी चिकित्सक ही करोड़ों लोगों को उबारते हैं। चिकित्सक मरीज को मौत के मुंह से भी बचाकर लाते हैं, इसीलिए उन्हें भगवान का रूप माना जाता रहा है।

बिना चिकित्सा व्यवस्था के इंसान की जिंदगी कैसी होती, इसकी कल्पना मात्र से ही रोम-रोम सिहर जाता है। चिकित्सकों के समाज के प्रति इसी समर्पण व प्रतिबद्धता के लिए कृतज्ञता एवं आभार व्यक्त करने और मेडिकल छात्रों को प्रेरित करने के लिए ही प्रतिवर्ष देश में एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। चिकित्सक दिवस मनाने का मूल उद्देश्य चिकित्सकों की बहुमूल्य सेवा, भूमिका और महत्व के संबंध में आमजन को जागरूक करना, चिकित्सकों का सम्मान करना और साथ ही चिकित्सकों को भी उनके पेशे के प्रति जागरूक करना है।

भारत में वर्ष 1991 में चिकित्सक दिवस की स्थापना हुई थी। पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और जाने-माने चिकित्सक डा. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में चिकित्सकों की उपलब्धियों तथा चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम हासिल करने वाले डॉक्टरों के सम्मान के लिए इस दिवस का आयोजन होता है। वे एक जाने-माने चिकित्सक, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और वर्ष 1948 से 1962 में जीवन के अंतिम क्षणों तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर, बिधाननगर, अशोकनगर, कल्याणी तथा हबरा नामक पांच शहरों की स्थापना की थी। संभवतः इसीलिए उन्हें पश्चिम बंगाल का महान वास्तुकार भी कहा जाता है। कलकत्ता विश्वविद्यालय से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1911 में एमआरसीपी और एफआरसीएस की डिग्री लंदन से ली। उन्होंने एक साथ फिजिशयन और सर्जन की रॉयल कॉलेज की सदस्यता हासिल कर सबको अपनी प्रतिभा से हतप्रभ कर दिया था। वर्ष 1911 में भारत में ही एक चिकित्सक के रूप में उन्होंने अपने चिकित्सा कैरियर की शुरूआत की। वे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में शिक्षक नियुक्त हुए। वर्ष 1922 में वे कलकत्ता मेडिकल जनरल के सम्पादक और बोर्ड के सदस्य बने। 1926 में उन्होंने अपना पहला राजनीतिक भाषण दिया और 1928 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य भी चुने गए।

वर्ष 1928 में डा. बिधान चंद्र रॉय ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के गठन और भारत की मेडिकल काउंसिल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई बड़े-बड़े पदों पर रहने के बाद भी वे प्रतिदिन गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज किया करते थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने अपना समस्त जीवन चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दिया। 4 फरवरी 1961 को उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 1967 में दिल्ली में उनके सम्मान में डा. बी.सी. रॉय स्मारक पुस्तकालय की स्थापना हुई और 1976 में उनकी स्मृति में केन्द्र सरकार द्वारा डा. बीसी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना की गई। संयोगवश डा. रॉय का जन्म और मृत्यु एक जुलाई को ही हुई थी। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को पटना में और मृत्यु 1 जुलाई 1962 को कोलकाता में हुई थी।

वैसे चिकित्सक दिवस की शुरूआत सबसे पहले अमेरिका के जॉर्जिया में हुई थी। वहां चिकित्सकों के सम्मान के लिए एक दिन निश्चित करने का सुझाव जॉर्जिया निवासी डा. चार्ल्स बी एलमंड की पत्नी यूडोरा ब्राउन एलमंड ने 30 मार्च 1933 को दिया था। 30 मार्च 1958 को यूएस के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने उनके उस सुझाव को स्वीकार करते हुए यह दिवस मनाना शुरू किया। जहां अमेरिका में 30 मार्च को चिकित्सक दिवस मनाया जाता है, वहीं वियतनाम में इसकी स्थापना 28 फरवरी 1955 को हुई थी और वहां तभी से 28 फरवरी को या उसके आसपास वाले किसी दिन यह दिवस मनाया जाता है। ब्राजील में महान चिकित्सक रहे कैथोलिक चर्च के सेंट ल्यूक के जन्मदिवस पर 18 अक्तूबर को जबकि क्यूबा में पीले बुखार पर शोध करने वाले चिकित्सक कार्लोस जुआन फिनले के जन्मदिवस 3 दिसम्बर को यह दिवस मनाया जाता है। नेपाल में यह दिवस 4 मार्च को तथा ईरान में महान चिकित्सक एविसेना के जन्मदिवस के अवसर पर 23 अगस्त को मनाया जाता है।

बहरहाल, चूंकि चिकित्सकों को पृथ्वी पर भगवान का रूप माना जाता है, इसलिए समाज की भी उनसे यही अपेक्षा रहती है कि वे अपना कर्त्तव्य ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ निभाएं। दरअसल चिकित्सा केवल पैसा कमाने का पेशा मात्र नहीं है। इसीलिए चिकित्सक को सदैव सम्मान की नजर से देखने वाले समाज के प्रति उनसे समर्पण की उम्मीद की जाती है।

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