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गोवा ब्रिक्स सम्मेलन का एक खास महत्व

इस साल दक्षिण एशियाई देशों का संगठन सार्क का सम्मेलन पाक में 9 व 10 नवंबर को होने वाला था।

गोवा ब्रिक्स सम्मेलन का एक खास महत्व
भारत में पांच ताकतवर व विकासशील देशों के संगठन ब्रिक्स का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन को रद करना पड़ा है। एक देश में किसी ग्लोबल सम्मेलन के रद होने और दूसरे देश में उससे बड़े ग्लोबल सम्मेलन के होने का वैश्विक संदेश साफ है कि जहां विश्व में भारत के भरोसेमंद देश का रुतबा बरकरार है, वहीं पाकिस्तान अलग-थलग पड़ चुका है। इस साल का आठ दक्षिण एशियाई देशों का संगठन सार्क का सम्मेलन पाक में 9 व 10 नवंबर को होने वाला था।
किन परिस्थितियों में सार्क के अध्यक्ष नेपाल को यह सम्मेलन रद करना पड़ा है, वह पूरी दुनिया जानती है। कश्मीर के उरी में सैन्य कैंप पर आतंकी हमले में जिस तरह पाक के हाथ होने के सबूत मिले, उसके बाद यह आरोप पुख्ता हो गया कि पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह दे रहा है और भारत को जख्म दे रहा है। भारत के कहने के बाद भी आतंकवाद परपाक के दोहरे रवैये में फर्क नहीं आया, तो भारत ने उसे वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की कूटनीतिक मुहिम छेड़ी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने सबूत के साथ पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने व उसे अलग-थलग करने की जोरदार मांग की। भारत ने सार्क सम्मेलन में भी नहीं जाने का फैसला किया। उसके बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का सर्मथन करते हुए सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और र्शीलंका ने भी सार्क में भाग लेने इस्लामाबाद नहीं जाने का निर्णय किया। पीओके में आतंकी कैंपों पर सजिर्कल स्ट्राइक के बाद भारत को जिस तरह ग्लोबल सर्मथन मिला, उससे पाकिस्तान और भी अलग-थलग पड़ गया।
अब ऐसे समय में इस ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी से भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और बेहतर तरीके से आगे ले जाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत विकास, शांति और सुधार के एजेंडे को आगे बढ़ाएगा। जी-7 और जी-20 के बाद ब्रिक्स सबसे ताकतवर ग्लोबल मंच है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील व दक्षिण अफ्रीका जैसे मजबूत देश शामिल हैं। ब्रिक्स आबादी, अर्थव्यवस्था और जीडीपी के लिहाज से विश्व में बड़ा योगदान करता है।
चीन का पाक के प्रति झुकाव जगजाहिर है और हाल में रूस ने पाक संग सैन्य अभ्यास किया है। उससे पाक को लग रहा है कि चीन व रूस के रूप में उसे दो सहयोगी देश मिल चुके हैं, पर ब्रिक्स सम्मेलन पाक के इस भ्रम को तोड़ देगा। भारत आने से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जिस तरह भारत को अपना अहम सामरिक साझेदार व पुराना दोस्त बताया है और दोनों देशों के बीच करीब 40 हजार करोड़ रुपये की डिफेंस डील समेत कई लगभग तीस करार होने की बात कही है, उससे ग्लोबल संकेत साफ है कि रूस भारत के साथ पहले की तरह ही है।
रही बात चीन की तो, वह कूटनीतिक रूप से बेशक पाक की तरफ झुका दिखे, लेकिन आर्थिक शक्ति के तौर पर उसे भारत का महत्व अच्छी तरह पता है। उसे मालूम है कि भारत के साथ व्यापार संतुलन उसी के पक्ष में है। इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने बिम्सटेक (भारत, म्यांमार, थाईलैंड, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश व श्रीलंका) और अफगानिस्तान व मालदीव को विशेष आमंत्रित किया है। इससे भारत के सार्मथ्य व ग्लोबल स्वीकार्यता का पता चलता है। ऐसे समय में जब विश्व पाक से दूर हो रहा हो, उस समय भारत के लिए गोवा में चीन व रूस के साथ ग्लोबल ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व और बढ़ जाता है।
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