Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

इस साल झुलसाएगी गर्मी, मौसम वैज्ञानिकों ने किए ये चौंकाने वाले खुलासे

भारतीय मौसम विभाग और मौसम वैज्ञानिकों के अलावा कई गैर सरकारी मौसम विज्ञान की संस्थाओं का भी कहना है कि 110 साल में भारत के तापमान में 0.60 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और 30 साल में लू के थपेड़ों जैसे हालात में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

इस साल झुलसाएगी गर्मी, मौसम वैज्ञानिकों ने किए ये चौंकाने वाले खुलासे

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल गर्मी ज्यादा होगी। अभी से जिस तरह मौसम का पारा ऊपर चढ़ रहा है, उससे ऐसा लगता है कि इस बार झुलसाने वाली गर्मी पड़ेगी। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव हमारी खेती पर पड़ेगा। मौसम विभाग की घोषणा में काफी चिंताजनक बातें कही गई हैं। भारतीय मौसम विभाग के अलावा कई गैर सरकारी मौसम विज्ञान की संस्थाओं का भी कहना है कि देश में इस बार गर्मी पिछले सारे रिकार्ड तोड़ने वाली है।

110 साल में भारत के तापमान में 0.60 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और 30 साल में लू के थपेड़ों जैसे हालात में भी बढ़ोत्तरी हुई है। जलवायु परिवर्तन पर 2014 में अंतर सरकारी पैनल की पांचवी आकलन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। मौसम की गर्मी के साथ-साथ मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक में पानी का संकट भी गहराता जा रहा है।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल अप्रैल से जून के दौरान गर्मी पिछले सारे रिकार्ड तोड़ देगी। राहत की बात यह है कि मानसून समय से आएगा। पिछले साल को मौसम विभाग सहित अन्य एजेंसियों ने अब तक का सबसे गर्म साल बताया था, पर इस साल तापमान पिछले साल के औसत से कुछ ही अधिक रहेगा। मौसम विभाग ने 28 फरवरी को अपना पहला पूर्वानुमान घोषित किया था।

एक अप्रैल को घोषित यह उसका दूसरा पूर्वानुमान है। दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में मार्च में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। अप्रैल की शुरुआत में ही देश के कई हिस्सों में पारा 40 के पार पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई बड़ा पश्चिमी विक्षोभ आए बिना तापमान में कोई बड़ी गिरावट नहीं आने वाली है। पिछले दस सालों में यह पहला मामला है जब मार्च में दिन का तापमान इतना ऊंचा रहा।

1901 के बाद अभी तक 2016 सबसे ज्यादा गर्म साल रहा। उस दौरान राजस्थान के फलौदी में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और तेलंगाना में सामान्य से अधिक तापमान रह सकता है।

वैज्ञानिकों के शोध बताते हैं कि देश का न्यूनतम तापमान तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले सालों में यह और तेजी से बढ़ता दिखाई देगा। एक अनुमान के अनुसार अगले चार साल में न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। यह भी दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2050 तक न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।

ग्लोबल वार्मिंग, बार-बार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय शहरी कारक न्यूनतम तापमान में लगातार वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिकों ने न्यूनतम ताप बढ़ने के जो कारण बताएं हैं उनमें ग्रीन हाउस गैसों का ज्यादा सक्रिय होना है। रात में ये गैसें इंफ्रारेड किरणें ज्यादा सोखती हैं इससे तापमान बढ़ जाता है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक देश का तापमान इस बार दीर्घकालिक औसत से ज्यादा एक डिग्री ऊपर रहेगा, लेकिन इस घोषणा में एक पेचीदगी है।

तीन महीने की अवधि में औसत तापमान एक डिग्री ऊपर रहने का मतलब यह है कि इन गर्मियों में लू चलने के दिन ज्यादा होंगे, उसकी तीव्रता ज्यादा होगी और उसका प्रभाव क्षेत्र भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा व्यापक होगा। याद रहे, पिछले साल लू लग जाने से देश में ढाई हजार मौतें हुई थीं, जिनमें ज्यादातर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दर्ज की गई थी।

पहली बार भारतीय मौसम विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि हाल के वर्षों में गर्मियों के बढ़ते दौर की वजह ग्लोबल वार्मिंग में और पिछले दो वर्षों के दौरान अल नीनो में खोजी जा सकती है। अल नीनो दुनियाभर के मौसमों के मिजाज में देखी जाने वाली वह गड़बड़ी है, जो प्रशांत महासागर के बीच के हिस्से के तापमान कभी-कभी अचानक बढ़ जाने की वजह से पैदा होती है।

पिछले साल दुनियाभर में अल नीनो का सितम चरम पर था। इस समुद्री प्रभाव ने इस साल भी दुनियाभर में मौसम को प्रभावित किया, इसमें उसका साथी ब्लाॅब भी शामिल रहा है। ब्लाॅब का साथ पाकर ही अल नीनो सशक्त हुआ था। 2015-16 में प्रशांत महासागर में अल नीनो के कारण समुद्री जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर यह अध्ययन किया गया।

इसे कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, स्िक्रप्ट इंस्टीट्यूशन आॅफ ओशियानोग्राफी और नेशनल ओशियानिक एंड एटमास्फेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन फिशरीज (एनओएए फिशरीज) के शोधकर्ताओं ने मिलकर किया है। यह अध्ययन जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित हुआ है। ब्लाॅब प्रशांत महासागर में होने वाला मौसमीय प्रभाव है। इसे 2013 में पहली बार समझा गया था। यह समुद्री जल का तापमान सामान्य से चार डिग्री तक बढ़ा देता है।

2015 तक इसका प्रभाव 1600 किमी. समुद्री क्षेत्र में फैल चुका था। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या साल दर साल गहरा रही है। 2017 अब तक का सबसे गर्म साल रहा था। वैश्विक तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई और ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघली। यह सिलसिला इस साल भी जारी रहने वाला है। वर्ल्ड मीटियोरोलाॅजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मौसम की दशाएं ज्यादा अनियमित और असामान्य रहने वाली हैं।

अल नीनो प्रभाव के अलावा अन्य कारक हैं जो विश्व के मौसम चक्र को हानि पहुंचा रहे हैं। 1961-1990 के औसत तापमान को इस इस वृद्धि का आधार माना गया है। वर्ष 2001 से अब तक हर साल इस तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस वृद्धि हो रही है। 2017 में अल नीनो प्रभाव के चलते समुद्री स्तर भी चिंताजनक रूप से बढ़ा। अटलांटिक से आर्कटिक की ओर जाने वाला गर्म और नम हवाओं का तूफान इस शीत ऋतु में तीन बार चला।

इसका मतलब यह है कि शीत ऋतु में आर्कटिक पर बर्फ जमने के दौरान कई दिन बर्फ पिघलने लायक तापमान था। आर्कटिक व अंटार्कटिका में बर्फ लगातार कम हो रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक 1979 के बाद से इस साल दोनों ध्रुवों पर बर्फ का क्षेत्र सबसे कम रहा। कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा खतरा देश के पश्चिमी हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के आसपास के हिस्सों और प्रायद्वीपीय भारत के प्रमुख हिस्सों पर है।

देश के इन हिस्सों में मानसून के मुख्य चारों महीनों में औसत से कम बारिश की आशंका है। केवल पूर्वी भारत के हिस्सों खासकर ओडिशा, झारखंड और पश्चिमी बंगाल में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। कमजोर मानसून की आशंकाएं हमारे माथे पर इसलिए पसीना लाती रही हैं।

जिस देश की माली हालत खेती-बाड़ी पर टिकी हो यह लाजिमी था कि पानी सहेजने और कम पानी में पैदा होने वाली फसलों पर जोर दिया जाता। ध्यान रहे कि जिस दिन हम ये सबक सीख लेंगे, मानसून की कमजोरी आशंका बनने की बजाय सामान्य खबर बनकर रह जाएगी।

Next Story
Top