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संपादकीय लेख : समुद्र की सुरक्षा के लिए वैश्विक रोडमैप जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्री सुरक्षा पर विश्व का ध्यान आकृष्ट किया है। आतंकी घटना और समुद्री लुटेरों के लिए समंदर के रास्तों का इस्तेमाल होना समूचे विश्व के लिए खतरा है।

संपादकीय लेख :  समुद्र की सुरक्षा के लिए वैश्विक रोडमैप जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : समुद्री सुरक्षा आज विश्व के लिए चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्री सुरक्षा पर विश्व का ध्यान आकृष्ट किया है। आतंकी घटना और समुद्री लुटेरों के लिए समंदर के रास्तों का इस्तेमाल होना समूचे विश्व के लिए खतरा है। समुद्री लुटेरे व्यापक स्तर पर वैश्विक कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। इस पर काबू पानी जरूरी है। विश्व का 50 फीसदी से अधिक कारोबार समुद्री मार्ग से होता है, जहां समुद्री लुटेरों का खतरा बना रहता है। समुद्री विवाद का समाधान शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के आधार पर होना चाहिए। समुद्र के रास्ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना विश्व की ज़रूरत है।

वैश्विक व्यवस्था के तहत समुद्र पर सभी देशों का साझा हक है। जलमार्ग से अंतराष्ट्रीय व्यापार बेरोकटोक हो, इसके लिए सभी देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना जरूरी है। चीन ने जब से दक्षिण चीन सागर में मनमानियां शुरू की है, समुद्र में निर्बाध आवाजाही में गतिरोध उत्पन्न होने लगा है। साउथ चाइना सी में अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर चीन के सैन्य अड्डे के निर्माण से विश्व के प्रमुख देश चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय अदालत हेग में फिलिपींस के खिलाफ समुद्र में अतिक्रमण को लेकर हार के बावजूद चीन का कोर्ट के फैसले को नहीं मानना वैश्विक कानूनों का अपमान है, जबकि चीन यूएन का स्थायी सदस्य है। समुद्री व्यापार में कोई भी बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है। वैध समुद्री व्यापार से बाधाओं को दूर करने के साथ ही विवादों को शांतिपूर्वक और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए।

यूएनएससी में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर खुली बहस की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच मूल सिद्धांत के जरिये वैश्विक एजेंडा दुनिया के सामने रखा है। समुद्र हमारी साझा धरोहर हैं। आज कई देशों के बीच समुद्री विवाद हैं। इसके हल के लिए विश्व को एक फ्रेमवर्क बनाना चाहिए। हम सभी की समृद्धि समुद्री व्यापार के सक्रिय फ्लो पर निर्भर करती है, इसलिए समुद्री व्यापार को बढ़ाने के लिए जलमार्ग के बुनियादी ढांचे का निर्माण आवश्यक है। फ्री मेरिटाइम ट्रेड भारत की सभ्यता के साथ अनादि काल से जुड़ा है। प्राचीन समय के स्वतंत्र मेरिटाइम माहौल में ही भगवान बुद्ध का शांति संदेश विश्व में फैल पाया। आज के संदर्भ में भारत ने इस खुले स्वभाव के आधार पर सागर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन दि रीजन का विजन परिभाषित किया है। यह विजन एक सेफ, सिक्योर और स्टेबल मेरिटाइम डोमेन का है। फ्री मेरिटाइम ट्रेड के लिए यह भी जरूरी है कि हम एक-दूसरे के नाविकों के अधिकारों का पूरा सम्मान करें।

साइक्लोन, सुनामी और प्रदूषण संबंधित समुद्री आपदाओं में भारत फर्स्ट रिस्पॉन्डर रहा है। पाइरेसी को रोकने के लिए भारतीय नौसेना 2008 से हिंद महासागर में पेट्रोलिंग कर रही है। हमने कई देशों को हाइड्रोग्राफिक सर्वे सपोर्ट और समुद्री सुरक्षा में प्रशिक्षण भी दिया है। समुद्री पर्यावरण और समुद्री संसाधनों को भी संजो कर रखना होगा। समुद्री पर्यावरण को प्लास्टिक जैसे प्रदूषण से मुक्त रखना होगा। ओवर फिशिंग और मरीन कोचिंग के खिलाफ साझा कदम उठाने होंगे। ओशन साइंस में भी सहयोग बढ़ाना चाहिए। भारत ने एक महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन लॉन्च किया है। भारतीय सुझावों से समुद्री सुरक्षा का वैश्विक रोडमैप बन सकता है।

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